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नगर परिषद 3 दिन में नहीं कर सकी, गोताखोरों ने 1 घंटे में किया सीवरेज ठीक

डेराबस्सी समेत हलके में पहली बार सीवरेज लाइन के एक्सपर्ट गोताखोर बुलाए गए। जो काम नगर परिषद व वॉटर सीवरेज बोर्ड का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 08, 2018, 02:00 AM IST

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    डेराबस्सी समेत हलके में पहली बार सीवरेज लाइन के एक्सपर्ट गोताखोर बुलाए गए। जो काम नगर परिषद व वॉटर सीवरेज बोर्ड का अमला व मशीनें 3 हफ्तों में नहीं कर सकी, गोताखोर समेत 5 लोगों की टीम ने 1 घंटे में कर दिखाया। ऑक्सीजन मास्क की मदद से आदर्श नगर की गली नंबर-3 में 15 फीट गहरे सीवर पानी में घुसकर इस टीम ने ढ़ाई फीट चौड़े डॉट सीवर पाइप रेत सीमेंट मिक्स बोरे रखकर कुछ समय के लिए ब्लॉक कर दिया। दरअसल, गली नंबर 4 में ढह गए सीवर मैनहोल की रिपेयर के लिए सीवर पानी रोकने का यही एकमात्र विकल्प बचा था जिसे आउटसोर्स गोताखोर टीम ने अंजाम दिया। आदर्श नगर की गली नंबर 4 के मुहाने पर सीवर पानी लीकेज से हुए गड्ढे के कारण 3 हफ्ते पहले गली धंस गई थी। इस गली में हाईवे से सटा सीवर मैनहोल की दीवारें ओवरफ्लो व लीकेज से कमजोर होती गईं और अंतत: दीवारें गिरने से पूरा मैनहोल ढह गया। मैनहोल की रिपेयर के लिए 15 फीट तक खुदाई जरूरी हो गई, लेकिन गड्ढे से सीवर पानी ही नहीं निकाला जा सका। नगर परिषद समेत वाटर सीवरेज बोर्ड का अमला लगातार जेनसेट से पानी पंप आउट करता रहा और जेसीबी से मलवा निकालता रहा परंतु कभी बारिश तो कभी लगातार लीक हो रहे सीवर पानी से गड्ढा कभी खाली ही नहीं हो सका। इसमें तीन फीट पानी हमेशा बना रहा। आलम यह हुआ कि गली में आवाजाही बंद हो गई, वहीं आसपास घरों में सीवर मिक्स पानी चला गया जिससे डायरिया फैल गया।

    मनोज राजपूत | डेराबस्सी

    डेराबस्सी समेत हलके में पहली बार सीवरेज लाइन के एक्सपर्ट गोताखोर बुलाए गए। जो काम नगर परिषद व वॉटर सीवरेज बोर्ड का अमला व मशीनें 3 हफ्तों में नहीं कर सकी, गोताखोर समेत 5 लोगों की टीम ने 1 घंटे में कर दिखाया। ऑक्सीजन मास्क की मदद से आदर्श नगर की गली नंबर-3 में 15 फीट गहरे सीवर पानी में घुसकर इस टीम ने ढ़ाई फीट चौड़े डॉट सीवर पाइप रेत सीमेंट मिक्स बोरे रखकर कुछ समय के लिए ब्लॉक कर दिया। दरअसल, गली नंबर 4 में ढह गए सीवर मैनहोल की रिपेयर के लिए सीवर पानी रोकने का यही एकमात्र विकल्प बचा था जिसे आउटसोर्स गोताखोर टीम ने अंजाम दिया। आदर्श नगर की गली नंबर 4 के मुहाने पर सीवर पानी लीकेज से हुए गड्ढे के कारण 3 हफ्ते पहले गली धंस गई थी। इस गली में हाईवे से सटा सीवर मैनहोल की दीवारें ओवरफ्लो व लीकेज से कमजोर होती गईं और अंतत: दीवारें गिरने से पूरा मैनहोल ढह गया। मैनहोल की रिपेयर के लिए 15 फीट तक खुदाई जरूरी हो गई, लेकिन गड्ढे से सीवर पानी ही नहीं निकाला जा सका। नगर परिषद समेत वाटर सीवरेज बोर्ड का अमला लगातार जेनसेट से पानी पंप आउट करता रहा और जेसीबी से मलवा निकालता रहा परंतु कभी बारिश तो कभी लगातार लीक हो रहे सीवर पानी से गड्ढा कभी खाली ही नहीं हो सका। इसमें तीन फीट पानी हमेशा बना रहा। आलम यह हुआ कि गली में आवाजाही बंद हो गई, वहीं आसपास घरों में सीवर मिक्स पानी चला गया जिससे डायरिया फैल गया।

    मेन डॉट सीवरलाइन का पानी रोकना जरूरी था

    लगातार विकराल होती जा रही इस समस्या के समाधान के लिए टीम के तमाम उपाय कारगर साबित नहीं हो रहे थे। इसके लिए मेन डॉट सीवरलाइन का पानी रोकना जरूरी था। यह काम बठिंडा के मलोट से हायर किए गए 5 गोताखोरों की टीम ने 1 घंटे में कर दिया। एचपी कॉर्पोरेशन लाइन एंड कंट्रोल नामक आउटसोर्स कंपनी के हरपाल विर्दी की अगुवाई पांच गोताखोरों की टीम यहां पहुंची परंतु केवल एक गोताखोर को मेन लाइन में उतारा गया। धर्मेंद्र नामक गोताखोर को बाकायदा ऑक्सीजन मास्क व पाइप के अलावा सेफ्टी बेल्ट व अलार्म से लैस कर 15 गहरे डॉट सीवर में उतारा गया जिसे कंप्रेसर की मदद से पाइप द्वारा ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही थी। उसने बताया कि मैन होल में आठ फीट तक पानी था। करीब 40 सीमेंट मिक्स रेत के बोरे उसे रस्सी की मदद से पहुंचाए गए और धर्मेंद्र ने पानी में घुसकर 30 इंची पाइप के चैंबर में इस तरह फिट किए ताकि सीवर पानी गली नंबर 4 तक न पहुंच सके।

    60 फीट तक गहरे पानी में रिपेयर करती है टीम

    यह काम तीन घंटे में अंजाम दे दिया और अब गली नंबर 4 का मैनहोल बनने के बाद ही इन थैलों को हटाने के लिए फिर इस गोताखोर टीम की मदद ली जाएगी। हरपाल विर्दी के अनुसार टीम का काम गहरे गंदे व सीवर पानी में घुसकर चोक सीवर खोलना या जरूरत मुताबिक उसे बंद करना और रिपेयर करना है। वह पंजाब के कई नगर निगमों के लिए बतौर आउटसोर्स काम कर रहे हैं और टीम के गोताखोर 60 फीट गहराई तक जाकर रिपेयर करने में भी सक्षम हैं। बता दें कि उक्त गड्ढा यहां के लोगों के लिए नासूर बनता जा रहा था। तीन हफ्ते से प्रशासन गड्ढे से पानी व मलवा नहीं निकाल पाया। ऐसे में मरम्म्त कार्य शुरु करने की समय सीमा नहीं थी जबकि गली खुलनी तो बाद में थी। गली में वाहनों की एंट्री इस गड्ढे के कारण बंद है।

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