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अवैध कॉलोनियों की आड़ में तहसील में बंद हो लूट

प्रॉपर्टी डीलर्स एंड बिल्डर्स एसोसिएशन डेराबस्सी की जनरल बॉडी की बैठक में प्राॅपर्टी कारोबारियों ने तहसीलों...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 08, 2018, 02:00 AM IST

अवैध कॉलोनियों की आड़ में तहसील में बंद हो लूट
प्रॉपर्टी डीलर्स एंड बिल्डर्स एसोसिएशन डेराबस्सी की जनरल बॉडी की बैठक में प्राॅपर्टी कारोबारियों ने तहसीलों में माल विभाग के कामकाज के खिलाफ जमकर भड़ास निकाली। सदस्यों ने अफसरों पर आरोप लगाए कि अवैध काॅलोनियों की आड़ में वहां प्लॉटों एवं मकानों समेत प्राॅपर्टी रजिस्ट्रेशन में आम लोगों की जेब काटी जा रही है। तहसील में कुछ एजेंटों के जरिए मोटी फीस लेकर पैसे अदा करने वालों की प्राॅपर्टी रजिस्ट्रेशन की जा रही है जिसे तुरंत बंद कर राहत देने की मांग की गई। प्राॅपर्टी एसोसिएशन ने इस मसले में एकजुट होकर सोमवार को तहसीलदार समेत एसडीएम से मुलाकात कर यह मसला उठाने का फैसला किया है। एसोसिएशन के प्रधान भूपिंदर राणा और चेयरमैन कुलदीप रंगी ने बताया कि बिकी हुई कॉलोनी में 35 फीसदी रकबा सड़क और पार्कों के लिए तथा 30 फीट चौड़ी सड़कें रखने का प्रावधान है, जिसे घटाकर 20% रकबा सड़कों और पार्कों के लिए और 20 फुट चौड़ी सड़क की प्रवानगी देनी चाहिए। इस सुझाव को नई पॉलिसी में शामिल करने की मांग के अलावा कॉलोनी पास कराने के लिए सारे अधिकार लोकल बॉडीज को दिए जाने की मांग की गई, ताकि सिस्टम को और सरल बनाया जा सके। इसके अलावा प्राॅपर्टी कारोबार में पेश आ रही कई दिक्कतें दूर करने के लिए अपने मांग पत्र में कई अन्य सुझावों को भी शामिल नई पॉलिसी में संशोधन कर उसे जल्द लागू करने की मांग की गई है। इस मौके एसोसिएशन के पूर्व प्रधान रमेश राणा, सरपरस्त रणजीत सिंह रेडी, महासचिव राकेश महेंद्रु, कैशियर तेजिंदर कपिल, पूर्व पार्षद चमन सैनी, दिलबाग सिंह, रविंदर रवि भांखरपुर, राहलु कौशिक, जसबीर चौधरी, पार्षद हरविंदर पिंका, जुल्फा, एडवाइजर नितिन जिंदरल और सुनील सैनी के अलावा कई सदस्य मौजूद थे।

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समयबद्ध सीमा के तहत रजिस्ट्रियों के इंतकाल खुद ब खुद दर्ज करने की प्रक्रिया तुरंत लागू की जाए। रोजवुड समेत गुलाबगढ़ में एक प्लॉट की कंप्युटराइज्ड फर्द लेने के 6 हजार रुपए से भी अधिक लगते हैं। हालांकि बताया गया कि एक सॉफ्टवेयर लागू करने के बाद यह समस्या नहीं रहेगी परंतु कारोबारियों ने मांग की है कि जब तक सॉफ्टवेयर प्रणाली लागू नहीं होती, मैन्युअल फर्द जारी कर लोगों को इसमें राहत दी जाए। एसोसिएशन का कहना है कि उनकी मांग पर अब नक्शे पास कराने, सीवर पानी कनेक्शन के लिए कंप्यूटराइज्ड फर्द से छूट दे दी गई है। रेगुलराइजेशन पॉलिसी में जमीन के किल्ले की रजिस्ट्री में 40 फीसदी तक छूट लागू की जा रही है क्योंकि नई पॉलिसी को कॉलोनाइजर्स का रिस्पांस नहीं मिला और सरकार के पास कोई एक नई कॉलाेनी अप्रूव होने नहीं आई। 100 फीसदी फीस देकर जिनकी कॉलोनियां व प्लॉट रेगुलराइज्ड हो गए हैं, उन्हें तुरंत एनओसी जारी किया जाना यकीनी बनाए जाए। नए रेरा एक्ट की जटिलताएं दूर की जाएं। डेराबस्सी में डेवलपमेंट चार्जेंस कई बड़े शहरों की तुलना में कहीं अधिक हैं, इन्हें घटाया जाए। लाल लकीर के अंदर डेपलपमेंट चार्ज लेने की नई शर्त का कड़ा विरोध करते हुए इसे तुरंत हटाने की मांग की गई।

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