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पानी की सप्लाई न देने और मोटर ठीक न करवाने पर कंपनी का ठेका किया रद्‌द

डेराबस्सी नगर परिषद में पेयजल सप्लाई समेत 3 दर्जन ट्यूबवेल्स की देखभाल में खरा न उतरने के आरोप में ठेकेदार का...

Danik Bhaskar | Jul 14, 2018, 02:00 AM IST
डेराबस्सी नगर परिषद में पेयजल सप्लाई समेत 3 दर्जन ट्यूबवेल्स की देखभाल में खरा न उतरने के आरोप में ठेकेदार का सालाना अनुबंध रद्द कर दिया गया है। उसकी दूसरे नंबर पर रहे बोलीदाता को ट्यूबवेल्स के रखरखाव का काम वीरवार से सौंप दिया। यह फैसला शहर में खस्ताहाल वाटर सप्लाई को लेकर एक्टिंग प्रधान मुकेश गांधी की अध्यक्षता में हुई नगर पार्षदों की विशेष बैठक में वीरवार शाम लिया गया। हालांकि कंपनी ने नगर परिषद के फैसले को गलत बनाया है परंतु दोनों के बीच कशमकश का खामियाजा आम जनता को ही भुगतना पड़ रहा है।

शहर में ऐसा पहली बार हुअा है पानी सप्लाई को लेकर किसी ठेकेदार का अनुबंध रद्द करने की कार्रवाई की गई हो। प्रधान मुकेश गांधी ने बताया कि डेराबस्सी में 36 ट्यूबवेल की सालाना देखभाल का साल 2017-18 का ठेका वीएच इंटरप्राइजेज, अमृतसर को बीते साल 1 सितंबर से दिया गया था परंतु ठेकेदार द्वारा टेंडर की शर्तें व हिदायतों का उल्लंघना की जा रही है। ठेकेदार के पास न तो जरूरत के अनुसार स्पेयर मोटरें हैं, न ही वह मोटरों की रिपेयर के लिए कोई पक्का बंदोबस्त कर सका। यहां तक कि खराब हुई मोटर्स भी 5 से 7 दिन तक ठीक नहीं कराई जातीं जबकि उन्हें अनुबंध मुताबिक 24 घंटे के भीतर ठीक कराना अनिवार्य है।

ऐसे में नगर परिषद को प्रभावित क्षेत्र में टैंकर्स के जरिए पानी सप्लाई करना पड़ा जिससे वित्तीय नुकसान भी हुआ है। बार बार लिखित पत्र, टेलीफोन समेत जुबानी शिकायत करने के बावजूद ठेकेदार ने कोई आई गई नहीं दी। इसी के चलते सभी पार्षदों ने एक सुर में कंपनी का ठेका रद्द करने का प्रस्ताव पास किया है। उसके साल के दौरान उसकी पेंडिंग अवधि में दूसरे नंबर की कंपनी कुलदीप इलेक्ट्रिकल व मैकेनिकल वर्क्स, जीरकपुर को आज से ही नलकूपों की देखभाल का काम अलॉट किया गया है। साथ ही पुरानी कंपनी को डेराबस्सी में डीबार कर पंजाब में अन्य नगर निकायों में दो साल तक काम न देने की सरकार से सिफारिश की गई है।


कसूर परिषद का, बलि का बकरा मुझे बनाया गया: ठेकेदार

दूसरी ओर, वीएच इंटरप्राइजेज के डायरेक्टर राजन शर्मा ने कहा कि नगर परिषद ने उसे बलि का बकरा बनाया है जबकि कसूर खुद परिषद के अमले का है। शहर में 35 नलकूप चल रहे हैं जिनके लिए 10 मोटर्स स्पेयर हैं परंतु सिफारिश के चलते इन मोटर्स को रेस्ट नहीं दिया जाता। छह घंटे तक चलने वाली मोटर को 16 से 22 घंटे तक चलाकर एक इलाके की जगह दो से तीन इलाकों में पानी पहुंचाने का बोझ डाला जा रहा है। शहर में भूमिगत जल गिरकर खतरनाक स्तर 360 फीट तक जा पहुंचा है और आधा दर्जन नलकूपों की मोटर पाइप डालकर कई कई फीट डाउन करनी पड़ी हैं जबकि अमृतसर में यही पानी मात्र 120 फीट पर उपलब्ध है। इस ओर परिषद का ध्यान ही नहीं है। पुराने ठेकेदार से जो आधी से अधिक मोटरें खस्ताहालत में मिली हैं परंतु उस ठेकेदार के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया। नजला उस पर गिराया जा रहा है। ठेका रद्द करने से पहले उसे मीटिंग में बुलाना चाहिए था। उसे अब तक केवल नगर परिषद से एक ही शिकायत पत्र मिला है। वह परिषद के फैसले के खिलाफ विभाग में अपील करेंगे।