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निंबुआ में लोक सुनवाई के दौरान नए केमिकल प्लांट को मिला समर्थन

निंबुआ में लोक सुनवाई के दोरान फैक्ट्री के नए प्रोजेक्ट का विरोध करते हुए ग्रामीण। मनोज राजपूत | डेराबस्सी ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 09, 2018, 02:00 AM IST

निंबुआ में लोक सुनवाई के दौरान नए केमिकल प्लांट को मिला समर्थन
निंबुआ में लोक सुनवाई के दोरान फैक्ट्री के नए प्रोजेक्ट का विरोध करते हुए ग्रामीण।

मनोज राजपूत | डेराबस्सी

डेराबस्सी के गांव निंबुआ सौरभ केमिकल्स फैक्ट्री द्वारा नया युनिट लगाने के लिए आयोजित लोक सुनवाई समारोह का आयोजन शुक्रवार को किया गया। अतिरिक्त जिला उपायुक्त चरणदेव सिंह मान की अध्यक्षता में सुनवाई के दौरान चंद लोगों ने प्रदूषण फैलने की आशंका से प्रोजेक्ट का विराेध किया। जबकि, आधा दर्जन गांवों के लोगों ने रोजगार बढ़ने और प्रदूषण की रोकथाम यकीनी बनाने की शर्त पर प्रोजेक्ट का समर्थन किया। मौके पर निकटवर्ती हजार्ड्स वेस्ट प्लांट का पानी बोरवेल में गिराने की शिकायत टीम ने वहां का दौरा किया और वहां वाटर सैंपल्स भी लिए।

60 करोड़ रुपए की लागत से 22 एकड़ में लगने जा रहा सबसे बड़ा प्लांट : सौरभ केमिकल्स नामक फैक्ट्री के डेराबस्सी में दो प्लांट पहले से ही चल रहे हैं और तीसरे प्लांट की एन्वायरमेंटल क्लीयरेंस के लिए शुक्रवार को मौके पर पब्लिक हियरिंग रखी गई थी। जिसमें करीब चार सौ लोगों ने हिस्सा लिया। कंपनी के एमडी प्रवीन सिंगला और वरिष्ठ अधिकारी प्रीत मोहिंदर सिंह ने बताया कि कंपनी यहां 22 एकड़ में 60 करोड़ रुपए की लागत से एपीआई बल्क ड्रग्स का सबसे बड़ा प्लांट लगाने जा रही है, जो जीरो वाटर डिस्चार्ज के साथ सौ फीसदी प्रदूषण मुक्त होगा। उन्होंने दावा किया कि प्लांट से एफ्लुएंट डिस्चार्ज जीरो रहेगा। साथ ही दावा किया कि कंपनी लगने से आसपास इलाके समेत 800 से 1000 लोगों को रोजगार भी प्राप्त होगा। जिससे इलाके में तरक्की व खुशहाली बढ़ेगी।

विडियोग्राफी के बीच दर्ज हुए समर्थन, आशंकाएं व एतराज: एतराजकर्ताओं का कहना था कि फैक्ट्री लगने के बाद उन्हें रोजगार की बजाय तोहफे में जल व वायु प्रदूषण दिया जाता है। पहले ही दर्जनों केमिकल युनिट, पोल्ट्री फार्म व मीट प्लांट यहां लोगों की सेहत से खिलवाड़ कर रहे हैं और वे नए प्लांट का और जोखिम नहीं लेना चाहते। इन्हीं लोगों ने निंबुआ स्थित हजार्ड्स वेस्ट प्लांट का जहरीला पानी बोरवेल में डिस्चार्ज करने का आरोप लगाया। सुनवाई के बाद टीम ने जाकर चेक किया तो डिस्चार्ज कहीं नहीं मिला। एसडीओ गुरशरण ने बताया कि वेस्ट प्लांट के इर्दगिर्द संचालक कंपनी राम की द्वारा करीब आठ बोरवेल मौजूद हैं, जो अंडरग्राउंड वाटर की गुणवत्ता मॉनिटर करने के लिए होते हैं। हालांकि ये बोरवेल रेगुलर इंटरवल पर चेक होते हैं और आज भी इसके सैंपल लिए गए परंतु कोई डिस्चार्ज न मिलने से शिकायतकर्ता मौके से खिसक गए।

एडीसी चरण देव सिंह मान के अलावा पंजाब प्रदूषण बोर्ड के एक्सीयन लवनीत दुबे, एसडीओ गुरशरण गर्ग, एसडीओ कंवर सिंह समेत टीम ने लोगों के सुझाव, आशंकाएं और एतराज सुने और बकायदा वीडियोग्राफी के बीच दर्ज भी किए। एडीसी ने बताया कि केवल आठ एतराजकर्ताओं को छोड़ बाकी सैकड़ों लोगों ने प्रदूषण न फैलाने और स्थानीय लोगों को रोजगार देने की शर्त पर नए युनिट का समर्थन हाथ खड़े कर किया।

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