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तंदुरुस्त पंजाब मुहिम के बावजूद बढ़ रहा युवाओं में नशों का रुझान

तंदुरुस्त पंजाब के तहत जहां प्रदेश में नशाें की रोकथाम कर सेहत की फिक्र के बावजूद डेराबस्सी में युवाओं का रुझान...

Dainik Bhaskar

Jun 24, 2018, 02:00 AM IST
तंदुरुस्त पंजाब मुहिम के बावजूद बढ़ रहा युवाओं में नशों का रुझान
तंदुरुस्त पंजाब के तहत जहां प्रदेश में नशाें की रोकथाम कर सेहत की फिक्र के बावजूद डेराबस्सी में युवाओं का रुझान नशों की ओर बढ़ रहा है। यहां के वीरान फॉरेस्ट एवं नेचर पार्क में अब सैरगाह से अधिक नशेड़ी युवाओं के अड्डे बनते जा रहे हैं। जंगली घास एवं झाड़ियों से भरपूर इन पार्कों में युवकों को नशीली गोलियां व इंजेक्शन लेते देखा जा सकता है। पार्कों के इर्दगिर्द इस्तेमाल हुए इंजेक्शन व सिरिंज, सिरप की शीशियां व गोलियों के खाली पत्तों के ढेर इसके पुख्ता सबूत हैं।

शहर में सरस्वती विहार के सदासुख पार्क, शक्तिनगर के नेचर पार्क व इसापुर पार्क का दौरा करने पर यह सब देखने को मिला। जो दवा बीमारी से निजात दिलाने के लिए बनाई गई है। उसका उपयोग अब युवाओं द्वारा नशे के लिए किया जा रहा है। नशे के लिए अब कम खर्च में नशीली दवा सीरप और इंजेक्शन का उपयोग अधिक हो रहा है। दर्द और एलर्जी से राहत दिलाने के लिए बनाई गई दवाइयों को उपयोग युवा वर्ग नशे के लिए करने लगा है।

ग्रामीण क्षेत्रों संचालित मेडिकल स्टोर्स की बात तो छोड़ ही शहरी क्षेत्र में भी मेडिकल स्टोर्स में बिना पर्ची के दवा दी जा रही है। नशे में बर्बाद हो रही युवा पीढ़ी को बचाने के लिए सरकार, प्रशासन व कानून ही काफी नहीं, बल्कि युवाओं के परिजनों समेत समाज को भी सचेत रहने की जरूरत है। घर में पकड़े जाने की टेंशन से बचने के लिए युवा वर्ग नशीली दवा का सेवन कर आफत मोल ले रहे हैं। जानकारों की मानें तो पेंटविंन इंजेक्शन लगाने के 30 सेकंड के अंदर उसे नशा हो जाता है। इसी तरह स्पाजमो प्राक्सीवान कैप्सूल और कोरेक्स सीरप का नशा शराब जैसे दूसरे नशे की तुलना में सस्ता पड़ता है।

यह हर जगह मेडिकल स्टोर में आसानी से भी मिल जाते हैं। इसे खाते समय किसी से छिपने की जरूरत नहीं पड़ती। शराब की तरह मुंह से बदबू भी नहीं आती जिससे नशे के रूप में ऐसी दवा का उपयोग किया जाता है।

इन दवाओं का नशे में खुलकर हो रहा इस्तेमाल

पार्क में नशेड़ियों द्वारा इस्तेमाल के बाद फेंके गए खाली इंजेक्शन, गोलियों के पत्ते व सिरिंज।

पेंटविन इंजेक्शन, कोरेक्स सीरप और स्पाजमो प्राक्सीवान कैप्सूल का नशे के लिए उपयोग किया जा रहा है। नशे के ये सामान मेडिकल स्टोर में आसानी से मिल जाते हैं। स्पाजमो प्राक्सीवान कैप्सूल पेट दर्द से राहत की दवा है। युवा एक साथ चार से पांच कैप्सूल खाकर इसका उपयोग नशे के लिए कर रहे हैं। इसके अलावा पेंटविन इंजेक्शन लगाकर भी युवा वर्ग नशा कर रहा है। नशे के लिए युवा स्पाजमो प्राक्सीवान, एंटी एलर्जिक टेबलेट एविल, नारफिन एंपुल, नाइट्रोसीन टेबलेट, आयोडेक्स व कोरेक्स सीरप का भी उपयोग कर रहे हैं। इनमें से नारफिन व नाइट्रोसीन को तो प्रतिबंधित कर दिया गया है। फिर भी ये मेडिकल स्टोर्स में मिल जाते हैं। बपरिमोरफिन इंजेक्शन ड्रग एचवन की श्रेणी में आता है जो केवल नशामुक्ति केंद्रों एवं सरकार को ही सप्लाई किया जा सकता है परंतु यहां पार्कों मेंं भी ये खाली इंजेक्शन मिल रहे हैं।

क्या कहते है पुलिस व प्रशासन

मेडिकल स्टोर वाले अपने थोड़े से फायदे के लिए बिना डाॅक्टर की पर्ची देखे ही ये नशीली दवाएं अवैध रूप से बेंच रहे हैं। जबकि, सरकार ने ऐसी दवाओं की खुली बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस बाबत पूछने पर ड्रग इंस्पेक्टर अमित लखनपाल ने बताया कि पंजाब में ज्यादातर उक्त दवाएं बैन हैं। परंतु हरियाणा व चंडीगढ़ में बैन न होने से इनकी सप्लाई वहां से ज्यादा आसान है। उन्होंने कहा कि तंदुरूस्त पंजाब के तहत ड्रग इंस्पेक्टर्स के एरिया की शफलिंग कर एक दूसरे के क्षेत्रों में बड़े स्तर पर रेड की जा रही है और भारी मात्रा में प्रतिबंधित दवाएं पकड़ी जा रही हैं। हालांकि, डेराबस्सी व लालडू में ऐसी कोई छापे देखने को नहीं मिले परंतु ड्रग इंस्पेक्टर की माने तो यह मुहिम लंबी चलने वाली है। उधर, थाना प्रभारी मोहिंदर सिंह ने कहा कि सेहत विभाग या ड्रग इंस्पेक्टर की काल आने पर रेड के लिए पुलिस भेजते रहते हैं। बाकी सार्वजनिक स्थानों पर इस्तेमाल हो रहे नशों को रोकने के लिए भी पुलिस अपनी गश्त और बढ़ाएगी।

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