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नगर काउंसिल की करोड़ों की जमीन पर पूर्व कांग्रेसी अध्यक्ष का कब्जा: संधू

मनोज जोशी|मोहाली manoj.joshi@dbcorp.in नगर काउंसिल डेराबस्सी की करीब 6 एकड़ जमीन पर नगर काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष एवं पंजाब...

Danik Bhaskar | Jul 10, 2018, 02:00 AM IST
मनोज जोशी|मोहाली manoj.joshi@dbcorp.in

नगर काउंसिल डेराबस्सी की करीब 6 एकड़ जमीन पर नगर काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष एवं पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीपीसीसी) के पूर्व सदस्य अमृतपाल सिंह और उनके भाई सतपाल सिंह की ओर से कब्जा किया गया है। इस कब्जे को लेकर नगर काउंसिल की ओर से फरवरी में एक प्रस्ताव पारित कर इस जमीन की जांच करवाने की मांग की गई है। उसी के आधार पर इस कब्जे की जांच कर जमीन नगर काउंसिल को दी जाए। यह आरोप आम आदमी पार्टी के खरड़ से विधायक एवं प्रवक्ता कंवर संधू और जिला मोहाली के अध्यक्ष एडवोकेट दर्शन सिंह धालीवाल ने लगाया है। उन्होंने कहा कि करोड़ों रुपए की जमीन पर दोनों भाइयों ने कब्जा कर रखा है, इसलिए जांच के बाद ये जमीन नगर काउंसिल को मिले और काउंसिल को करोड़ों रुपए का फायदा हो सके।

जमीन पर बना रखे हैं होटल और शोरूम: संधू और धालीवाल ने कहा कि अमृतपाल सिंह और सतपाल सिंह ने गांव माधोपुर और रौणी की करीब 25 बीघे जमीन जो 6 एकड़ के करीब बनती है, पर सालों से कब्जा किया हुआ है। इनमें से एक जमीन पर एवर ग्रीन होटल बनाया हुआ है, जबकि कुछ एरिया में शोरूम बनाए हुए हैं। इस जमीन पर लंबे समय से कब्जा किया हुआ है। उन्होंने इस कब्जे की जांच के लिए डीसी मोहाली को पत्र लिखा है और लोकल बॉडीज मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू को भी पत्र लिख कर कानूनी जांच करने के लिए कहा गया है। इस जमीन से संबंधित कानूनी जांच करने की मांग की गई है, ताकि कब्जा हटाकर जमीन लोक भलाई के लिए इस्तेमाल की जाए। उन्होंने कहा कि दोनों भाइयों ने रिकॉर्ड में हेरफेर करवाकर कागजों में भी गड़बड़ी की है।

संधू ने जमीन की खबर लगाई थी, अब फिर उठा रहे हैं मुद्दा: अमृतपाल

कंवर संधू और दर्शन सिंह धालीवाल ने लगाए आरोप।

प्रस्ताव पर एनके शर्मा के भी हस्ताक्षर...

संधू और धालीवाल ने बताया कि नगर काउंसिल डेराबस्सी की ओर से 16 फरवरी को प्रस्ताव पारित किया गया था कि इस जमीन के कब्जे को लेकर जांच की जाए। इस प्रस्ताव पर अकाली विधायक एनके शर्मा के हस्ताक्षर हंै। उन्होंने कहा कि नगर काउंसिल ने दोनों गांवों की जमीन पर कब्जा लेने के लिए प्रस्ताव पारित किया है, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई है। दोनों के राजनीतिक रसूख के चलते कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जो इस जमीन से लाखों रुपए का फायदा उठा रहे हंै। अगर कोई व्यक्ति इनके खिलाफ बोलने की कोशिश करता है तो उसकी आवाज बंद कर दी जाती है। अगर जांच की जाए तो रेवेन्यू और काउंसिल विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत भी सामने आएगी।

परनीत के नजदीकी कंवलजीत ने जारी कराए थे वारंट

1993 से 98 तक और फिर 2000 में दो बार नगर काउंसिल डेराबस्सी के अध्यक्ष रह चुके अमृतपाल सिंह कैप्टन अमरिंदर सिंह की प|ी परनीत कौर के नजदीकियों में शामिल हैं। इसी के चलते उन्हें पीपीसीसी का सदस्य भी बनाया गया था। इस समय यह परिवार लोकल राजनीति से दूर है, लेकिन नगर काउंसिल में इनका परिवार आज भी है। कांग्रेस सरकार के दौरान जांच की मांग के मायने साबित नहीं हो सकते हैं। अगर अकाली सरकार में जांच होती तो कार्रवाई हो सकती थी। अकाली सरकार के दौरान कैप्टन कंवलजीत सिंह ने भी कोर्ट में रिट डाली थी और अरेस्ट वारंट जारी करवा दिए गए थे। पूरा परिवार फरार रहा था बाद में मामला सेटल किया गया था।

दूसरी ओर, अमृतपाल सिंह ने बताया कि जिस जमीन की विधायक कंवर संधू बात कर रहे हैं, उसमें से कुछ जमीन उनकी पुश्तैनी है और कुछ जमीन खरीदी हुई है, जिसकी उनके पास रसीद भी है। एक इंच जमीन पर भी कब्जा नहीं किया है। उन्होंने कहा कि करीब 25 से 30 साल पहले कंवर संधू जब पत्रकार थे, उस समय भी उन्होंने इस जमीन की खबर लगाई थी, जिसे लेकर उन्होंने संधू को लीगल नोटिस भेजा था और फिर हाईकोर्ट में मानहानि का केस डाला था। संधू ने इस केस में लोकल लोगों को डालकर माफी मांगी थी। अब एमएलए बनने के बाद दोबारा उसी जमीन का मुद्दा उठा रहे हैं। अमृतपाल ने कहा कि दर्शन सिंह धालीवाल वकील हैं। वे जमीन का एक केस उनके खिलाफ लड़ रहे थे। उसमें वे हार गए हैं, इसलिए उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए झूठे आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि अगर प्रस्ताव एनके शर्मा ने पास किया है तो वे सामने आकर बोलें। आम आदमी पार्टी शर्मा के लिए काम कर रही है या संधू व धालीवाल काम कर रहे हैं। शर्मा ने अगर प्रस्ताव पारित करना था तो वे अकाली सरकार के दौरान करते। 10 साल अकालियों की सरकार रही है, उसमें जांच करवाते। अब कांग्रेस सरकार में प्रस्ताव पारित करने का कोई औचित्य नहीं है। इस बारे में संधू ने कहा कि डेफरमेशन केस की जानकारी नहीं है। एडिटर रहते बहुत से केस मिलते हैं।