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एटीएस प्रोजेक्ट्स में समस्याओं को लेकर रेजिडेंट्स ने निकाला रोष मार्च

डेराबस्सी में एटीएस के परल्यूड और लाइफस्टाइल के बाशिंदे प्रबंधकों के खिलाफ रोष मार्च करते हुए। सिटी रिपोर्टर |...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 02, 2018, 03:10 AM IST

एटीएस प्रोजेक्ट्स में समस्याओं को लेकर रेजिडेंट्स ने निकाला रोष मार्च
डेराबस्सी में एटीएस के परल्यूड और लाइफस्टाइल के बाशिंदे प्रबंधकों के खिलाफ रोष मार्च करते हुए।

सिटी रिपोर्टर | डेराबस्सी

शहर के सबसे महंगे रिहायशी प्रोजेक्ट एटीएस में सुविधाओं की कमी को लेकर यहां परल्यूड टावर्स और लाइफस्टाइल टावर्स के बाशिंदों ने रविवार को प्रोजेक्ट प्रबंधकों के खिलाफ रोष मार्च निकाला। रोष मार्च का समापन एटीएस कार्यालय में हुआ, जहां रेजीडेंट्स ने प्रबंधकों से सुविधाओं में सुधार की मांग करते हुए प्रोजेक्ट के सीनियर मैनेजर शुभम गौरव को अपना मेमोरेंडम सौंपा। इसमें भारी संख्या में महिलाओं ने हिस्सा लिया। एटीएस परल्यूड अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन के प्रधान रिटायर्ड कर्नल गुरुचरण सिंह विरदी, उपप्रधान बीएल राजदान व संयुक्त सचिव निधि सिद्धू की अगुअाई में बाशिंदों ने क्लब से हाउस से पैदल रोष मार्च निकाला।

इससे पहले बाशिंदों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सबसे पॉश काॅलोनी का दर्जा हाेने के बावजूद एटीएस प्रोजेक्ट्स में नागरिक सुविधाएं प्रबंधकों के दावों से मेल नहीं खा रही हैं। बार बार शिकायत करने पर भी समाधान नहीं किया जा रहा है। प्रबंधक उनसे बीते 7 साल से मेंटेनेंस की महंगी मासिक फीस वसूलते आ रहे हैं, परंतु आज तक उन्होंने एसोसिएशन को इसका हिसाब नहीं दिया। उन्हें प्रोजेक्ट पॉलिसी बारे न बताया जाता है, न ही कोई मीटिंग उनका नुमाइंदा आता है। वैसे भी बिना एग्रीमेंट के ही उनसे भारी भरकम मेंटेनेंस फीस चार्ज की जा रही है, जो गलत है। प्रबंधकों के पास न फ्लैट ऑक्युपेशन देने का सर्टिफिकेट है, न ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट। इस मौके महिलाओं में निर्मला, मोंटी चोपड़ा, रशमी गौतम, प्रियंका, पूजा सिंगला, शशि लांबा, अरुणा मेहता के अलावा बलजीत कारकौर, राजू बतरा, मनप्रीत, मनजीत मलकपुर, विमल चोपड़ा भी शामिल थे।

ये मांगें हैं मेमोरेंडम में

मेमोरंडम में प्रबंधकों से मांग की गई है कि मेंटेनेंस एग्रीमेंट पूरी तरह लागू कर उसके मुताबिक ही शुल्क व सुविधाएं दी जाएं। हर माह 22 लाख रुपए से अधिक इकट्ठे हो रहे मेंटेनेंस फंड का हिसाब दिया जाए। उन्होंने बताया कि पांच साल में फीस चार बार बढ़कर 1 रु प्रति वर्ग फीट के बजाय 1.90 रुपए प्रति फीट हो गई है। ऑक्युपेशन सर्टिफिकेट बाशिंदों के साथ शेयर किया जाए। एकतरफा नियम व शर्तों के बजाय पंजाब अपार्टमेंट ओनरशिप एक्ट, 1995 के मुताबिक लागू किया जाए। एन्वायर्नमेंट क्लीयरेंस नियम उसके प्रावधान मुताबिक सुनिश्चित किया जाए। रेजिडेंट्स से प्राप्त आमदन व उसके खर्च का हिसाब किताब एसोसिएशन को बैठक में दिया जाए। इसके अलावा सभी रेजीडेंट्स की शिकायतों की एक मास्टर सूची तैयार कर उसके समाधान के लिए उसी मुताबिक एक्शन प्लान तय किया जाए।

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