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ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 2% की बढ़ोतरी पर लोगों ने किया विरोध

पंजाब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 2% इजाफा किए जाने से शहरी व ग्रामीण हलकों के बीच...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 26, 2018, 01:50 PM IST

ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 2% की बढ़ोतरी पर लोगों ने किया विरोध
पंजाब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 2% इजाफा किए जाने से शहरी व ग्रामीण हलकों के बीच लकीरें खिंचने लगी हैं। ग्रामीण हलकों के उद्योगपति, किसान व बाशिंदे जहां अपने आप को ठगा सा महसूस कर रहे हैं और उनमें फैसले के प्रति रोष पाया जा रहा है। वहीं, शहरी लोग हलके में राहत की सांस ले रहे हैं। व्यापारियों समेत उद्योगपतियों का कहना है कि बिजली दरें तय करने में म्युनिसिपल लिमिट का मापदंड नहीं होना चाहिए।

इस फैसले का असर आगामी पंचायती चुनावों पर पड़ने के पूरे आसार हैं। वहीं, ग्रामीण बाशिंदो का कहना है कि उनके गांवों भी नगर परिषद सीमा में शामिल कर लिए जाएं। बता दें कि पंजाब सरकार ने रुरल क्षेत्र के बिजली उपभोक्ताओं के सभी वर्गों पर इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी 13 से बढ़ाकर 15% कर दिया है। ये दरें 1 अप्रैल से लागू कर दी गई हैं। अर्बन क्षेत्र को इस बढ़ोतरी से छूट दी गई है।

इस मसले को लेकर सरकार विरोधी सियासी दल ग्रामीण क्षेत्र के बाशिंदों के पक्ष जा खड़े हुए हैं। उनका कहना है कि एकतरफा बिजली दरें बढ़ाकर सरकार ने शहरी व ग्रामीणों के बीच भेदभाव पैदा करने का काम किया है। दूसरी ओर, शहरी क्षेत्र के व्यापारी, उद्योगपति व बाशिंदों इस फैसले से राहत तो महसूस कर रहे हैं, परंतु खुलकर स्वागत करने की स्थिति में नहीं है। उन्हें लगता है कि ग्रामीण हलकों के दबाव में देर सवेर सरकार उनकी राहत भी छीन सकती है।

डेराबस्सी फोकल प्वाइंट में लगी इंडस्ट्रीज

भारी भरकम प्राॅपर्टी टैक्स, नक्शा फीस अदा कर रहे हैं शहरी उद्योग

डेराबस्सी फोकल प्वाॅइंट इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के प्रधान राकेश भार्गव ने इस फैसले का स्वागत किया है। उनका कहना है कि फोकल प्वाॅइंट वाले पहले ही प्राॅपर्टी टैक्स व बिल्डिंग मैप की भारी भरकम फीस अदा करते आ रहे हैं। यहां प्राॅपर्टी भी महंगी है और उन्होंने करीब डेढ़ दशक तक चुंगी का भुगतान किया है। इस फैसले से फोकल प्वाॅइंट में स्थित सभी 85 उद्योगों को राहत मिलेगी।

बिजली दरों में म्युनिसिपल लिमिट का पैमाना बेमानी : उद्योगपति

डेराबस्सी स्मॉल स्केल इंडस्ट्रीज एसोएिससन के प्रधान अनिल शर्मा के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में उत्पादन शुल्क दो फीसदी महंगा हो जाएगा। वे अपने शहरी उद्योगों से प्रतिस्पर्धा नहीं रख पाएंगे। इसलिए, बिजली दरें तय करने के लिए म्युनिसिपल लिमिट का पैमाना कतई नहीं होना चाहिए। डेराबस्सी इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के महासचिव राकेश रतन के अनुसार सरकार रिहायशी क्षेत्र से उद्योगों को पहले ही नगर निकाय सीमा से बाहर करना चाहती है। दूसरी ओर, गैर शहरी क्षेत्र में बिजली दरें बढ़ाकर उनके लिए बाहर भी मुश्किल पैदा कर रही है।

हलके में 500 उद्योग, आधे से अधिक पर पड़ी मार... डेराबस्सी हलके में करीब 500 छोटे, मध्यम व बड़े पैमाने के उद्योग हैं। इनमें से आधे से भी कम लालडू व डेराबस्सी नगर निकायों में पड़ते हैं। जबकि, बाकी फ्री एंटरप्राइज जोन में पड़ते हैं। डेराबस्सी में सैदपुरा व फोकल प्वाॅइंट के करीब डेढ़ सौ उद्योगों की ही नए फैसले से राहत मिली है। इनमें मुबारिकपुर क्षेत्र में शामिल क्रशर उद्योग व स्क्रीनिंग प्लांट भी शामिल हैं। लालडू में नाहर ग्रुप समेत पचास फीसदी उद्योगों को इस फैसले का लाभ मिलेगा। ऐसे में ग्रामीण क्षेत्र के उद्योगों में रोष पनपना लाजिमी है।

कांग्रेस राज में 20 फीसदी तक महंगी हो गई बिजली : एनके शर्मा

हलका विधायक एनके शर्मा ने इस वृद्धि की निंदा करते हुए कहा कि कांग्रेस के एक साल के कार्यकाल में बिजली दरों व करों में बढ़ोतरी से बिजली 17 से 20 फीसदी तक महंगी हो चुकी है। उन्होंने इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। साथ ही चेताया कि अाने वाले पंच सरपंच, ब्लॉक समिति व जिला परिषद चुनावों में जोकि ग्रामीण हलकों से संबंधित हैं, में कांग्रेस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा।

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