किसान आंदोलन की आहट के बीच मंदसौर एसपी मनोजकुमार सिंह ने उपद्रव, अराजकता, रोकने के लिए प्लानिंग बनाई है। प्रत्येक जिले से मंगाई प्लानिंग में गृह मंत्रालय ने मंदसौर की प्लानिंग को ज्यादा कारगर माना है। अब तमाम बिंदुओं पर प्रदेश के सभी संवेदनशील स्थानों पर अमल होगा। उज्जैन जोन आईजी राकेश गुप्ता ने पिछले दिनों प्रेजेंटेशन देखा व पसंद किया। प्लानिंग के कारगर होने का कारण एसपी के मंदसौर व नीमच जिले के अनुभव माने जा रहे हैं। जून 2017 में बही फंटे से पिपलिया तक किसान आंदोलन के दौरान उपद्रव, हिंसा के बाद उपजे तनाव में मंदसौर के 5, नीमच के 1 व्यक्ति की मौत हो गई थी। प्रदेश के कुछ जिलों में भी हालात बिगड़े थे। चूंकि मुद्दा किसानों से जुड़ा था और प्रदेश की करीब 65 से 70 फीसदी तक आबादी अब भी कृषि पर निर्भर है। ऐसे में उभरे बिंदुओं पर मंदसौर एसपी ने स्टडी कर रिपोर्ट बनाई। इसमें खामी वाले पक्ष भी रखे हैं और मंदसौर एसपी ने उपद्रव-अराजकता को रोकने के लिए बनाया प्लान, प्रदेशभर में होगा लागू किसान आंदोलन : गृह मंत्रालय ने भी चुनौतियों के मद्देनजर प्लान को सटीक माना : शासन की मदद से अमल में लाने की तैयारी।
मुख्य बिंदु : कृषि उत्पादन बढ़ा लेकिन मंडियों में जगह नहीं, तुलाई में देरी, स्टाफ कम
मंदसौर एसपी ने प्लान में मुख्य उदाहरण प्रदेश की कृषि मंडियों के तौर पर दिया है। पिछले सालों में प्रदेश में लगभग सभी तरह की कृषि जिंसों का उत्पादन बढ़ा है लेकिन मंडियों में माल रखने की जगह नहीं है। किसानों की संख्या के मान से तौल-कांटे भी कम हैं। कई बार बारदान की कमी बनती है जिससे काफी इंतजार करना पड़ता है। ऐसे में कई बार किसान समूहों में एकत्र होकर मंडियों के गेट बंद करने, उपज फेंकने, नारेबाजी, जाम लगाने जैसे आक्राेश जताते हैं। मंडी में कैंपस का विस्तार, आधुनिक उपकरणों की सुविधा देने, मॉनीटरिंग के लिए कैमरे, तुलाई कर्मचारियों व स्टाफ की संख्या बढ़ाकर, उपज की राशि वितरण जल्द कराने जैसे कदम उठाकर काफी हद तक आक्राेश टाला जा सकता है।
उपद्रव रोकने का प्लान : तुरंत एक्शन, हर बिंदु की मॉनीटरिंग पर फोकस - उपद्रव रोकने के प्लान में ये प्राथमिकताएं तय की गईं। जिलेवार रूट चार्ट का डिटेल, एक्शन में देरी नहीं करना, पुलिस फोर्स का मूवमेंट बना रहे। वहां के पेट्रोल पंपों के रोज के स्टॉक का डिटेल, अधिक स्टॉक लेने वालों का डिटेल नजदीकी थाने भेजना, बोतल या कैन में पेट्रोलियम पदार्थ ना देना (पिछले जून में थानों व पुलिस स्टाफ पर पेट्राेल बम फेंकने के मद्देनजर)। कैमरों से मॉनीटरिंग रखना। अप्रिय स्थिति बनने पर तत्काल वायरलेस सेट पर अवगत कराना ताकि सूचना सबकाे पहुंचे व मामले कंट्रोल करने में आसानी हो।
कहीं पर भी जाम किसी भी हालत में ना लगने देना, ऐसे हालात से निपटने को टोल नाकों को फ्री करना। फोरलेन समेत अन्य रूटों पर ढाबों के आसपास ट्रकों को ना रुकने देना। यहां दुकानों पर रखे टायरों को हटवाना ताकि आगजनी जैसे हालात ना बने। प्रशासन-पुलिस अधिकारी नियमित गांवों में जाकर मिलें और समस्याओं का समाधान हो, कम्युनिकेशन सिस्टम भी बना रहे। पार्किंग स्थल तय हों। जेसीबी, फायर ब्रिगेड जैसे साधन तत्काल उपलब्ध हों।
बॉक्स . . .
प्रेजेंटेशन देखा, स्थिति कंट्रोल करने में मदद मिलेगी
मंदसौर एसपी द्वारा तैयार किया प्रेजेंटेशन देखा है। हर रूट, परिस्थितियों तक का जिक्र है। निश्चित कई जिलों में भी स्थिति कंट्रोल करने में मदद मिलेगी।
-राकेश गुप्ता, आईजी उज्जैन जोन