जगह बदलकर खेत में बनाया जा रहा चेकडैम, तंबू लगा विरोध शुरू
गिरसुल के तालजोर में स्वीकृत 67 लाख रुपए के चेक डैम की जगह बदल कर किसान के खेत में सिंचाई विभाग निर्माण करवा रहा है। जबकि तय स्थल नाला के बीचोंबीच था। 15 दिन पहले शुरू हुए निर्माण कार्य का पीड़ित किसान बीरसिंह मांझी लगातार विरोध करता रहा। बावजूद इसके काम नहीं रोका गया तो उसने खेत में ही तंबू लगाकर डेरा जमा लिया है।
इस मामले में सिंचाई विभाग के एसडीओ बीआर चंद्राकर ने कहा कि किसान की सहमति के बाद ही निर्माण शुरू कराया गया है। मुआवजा प्रकरण तैयार किया जा रहा है। उचित मुआवजा दिया जाएगा। बहाव के ज्यादा ठहराव और उससे मिलने वाले सिंचाई लाभ को देखते हुए स्थल परिवर्तन किया गया है, जो किसानों के हित में है।
देवभोग मुख्यालय से 6 किमी दूरी स्थित गिरसुल के तालजोर में चेक डैम के लिए सिंचाई विभाग ने 67 लाख रुपए की स्वीकृति दी था। तालजोर नाला से किसान बीरसिंह मांझी का 5 एकड़ खेत लगा हुआ है। स्वीकृत प्राक्कलन के मुताबिक चेक डैम के निर्माण के लिए तय स्थल नाला के बीचोंबीच था, लेकिन काम शुरू होने से पहले ले आउट दिया गया तो तय स्थल के बजाए बीरसिंह के खेत के बीचोंबीच दे दिया गया। किसान ने बताया कि इसका विरोध वह शुरू से कर रहा था। विभाग के एसडीओ बीआर चंद्राकर ने मौके पर पहुंच पहले मुआवजा देंगे, फिर काम शुरू करने का भरोसा दिलाया था। पीड़ित के मुताबिक मुआवजे के बिना उसने निर्माण की सहमति नहीं दी। बावजूद उसके खेत में काम शुरू कर दिया गया। काम रुकवाने के लिए किसान ने ठेके कर्मी के अलावा ग्रामीणों का भी सहयोग लिया। कम पढ़े-लिखे होने के कारण किसान ने अपनी तकलीफ लिखित में प्रशासन को दे सका।
देवभोग. पीड़ित किसान के खेत के बीचोंबीच बनाया जा रहा चेक डैम।
नाला से आधा किमी दूरी पर किसान का घर है। जब उसकी बातों को अनसुनी कर डैम का निर्माण शुरू किया गया तो अनोखा विरोध प्रदर्शन करने के लिए 65 वर्षीय किसान अपने खलिहान में ही डेरा जमा लिया है। आंधी तूफान में लकड़ी का तंबू उजड़ गए फिर भी धूप-छांव की परवाह किए बगैर रात दिन काट रहा है।
धूप-छांव की परवाह नहीं, विरोध करने जमाया डेरा
निर्माणाधीन स्थल के पास अपने खेत में डेरा जमाए पीड़ित किसान बीर सिंह।
िकसान की करीब 2 एकड़ जमीन हो जाएगी चौपट
चेक डैम का निर्माण करीब 340 वर्गफीट रकबे पर हो रहा है। चूंकि नाले के मुख्य बहाव से हटकर निर्माण किया जा रहा है, जिसे जोड़ने के लिए 20 हरे-भरे पेड काट दिए गए हैं। बताया जा रहा है इस निर्माण के बाद पीड़ित किसान की दो एकड़ जमीन बर्बाद हो जाएगा। वहीं रोके गए बहाव के बाद जमा पानी पीड़ित के रकबे जाएगा। इन सारे नुकसान की भरपाई के बजाए किसान को केवल कंस्ट्रक्शन इलाके के रकबे का मुआवजा देने का भरोसा दिलाया गया है।
अफसर और ठेकेदार की िभलीभगत का आरोप
गांव के युवा संगठन के नेता कन्हैया मांझी ने बताया कि विरोध के बावजूद डैम का काम नहीं रोका गया। निर्माण कार्य धमतरी के एक बड़े ठेकेदार का बताया गया है। सिंचाई विभाग के बड़े अधिकारी भी वहीं के होने के कारण सारा काम विभागीय देख- रेख में किया जा रहा है। डैम निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। नेता का कहना है कि 25 अप्रैल को पीड़ित को राजधानी ले जाकर प्रभारी मंत्री के समक्ष इसकी शिकायत की जाएगी।