स्वीकृति के तीन साल बाद भी झराबहाल में बन रही मनरेगा की सड़क पूरी नहीं बन पाई है। सिर्फ स्ट्रक्चर खड़ाकर अधूरा छोड़ दिया गया है। इसके कारण आने-जाने में परेशानी के अलावा दुर्घटना की भी आशंका बनी हुई है। वहीं काम करने वाले ज्यादातर मजदूरों का भुगतान तक भी नहीं किया गया है। प्रशासनिक उदासीनता के चलते ऐसे कई निर्माण कार्य अधर में लटके हैं।
इस संबंध में विभाग के कार्यक्रम अधिकारी मुकेश करैत ने कहा कि मेरी जानकारी में नहीं है, ऐसा कुछ हुआ है तो संबंधित इंजीनियर को भेज कर मामले की जानकारी लेता हूं। वहीं काम को जल्द पूरा कराया जाएगा। चूंकि मजदूरी भुगतान खाते में जाती है, इसलिए जिन्होंने काम किया है, उनके खाते में नहीं गया होगा तो चेक कराकर भुगतान करवाता हूं। डोहेल पंचायत में मनरेगा के तहत 2015-16 में तीन जगह पर सड़क सह पुलिया बनाने के लिए 18-18 लाख की स्वीकृति मिली थी, लेकिन तीन साल होने को हैं, तीनों काम अधूरे पड़े हैं। तीनों जगहों पर पुलिया निर्माण कराया गया, स्ट्रक्चर में मिट्टी मुरुम नहीं भरा गया है, जिससे उक्त मार्गो पर आवागमन बाधित है। ग्रामीण परमानंद यादव ने बताया कि अधूरे काम के कारण बारिश में आने-जाने में भारी दिक्कत होती है। पुलिया के सामने पानी भर जाता है। बाकी दिनों में आए दिन दुर्घटना होती रहती है। ग्रामीणों के मुताबिक मनरेगा के उक्त कार्यों में गांव के 50 से भी ज्यादा मजदूरों को मजदूरी तक नहीं मिली है। निर्माण कार्य का जिम्मा वैसे तो ग्राम पंचायत का होता है, पर महिला सरपंच देबकी बाई ने बताया कि तीनों कार्य रोजगार सहायक प्रेम मांझी द्वारा कराया गया। वे केवल मस्टररोल पर दस्तखत करवाती थी। मटेरियल की खरीददारी से लेकर सब कुछ रोजगार सहायक द्वारा कराया जाता था। रोजगार सहायक प्रेम मांझी ने कहा कि सभी काम में एक तिहाई रकम आहरण हुआ है। जितना आहरण हुआ उतना काम किया गया है। अधूरे काम को पूरा करा देंगे। जिनके खाते में नाम या नंबर मिलान में गड़बड़ी पाई गई, उन्हीं को भुगतान नहीं हुआ है।
देवभोग. झराबहाल में बन रही पुल पर मिट्टी-मुरुम नहीं भरा गया है।
25 से भी ज्यादा पंचायतों में मिली थी मंजूरी
2015 से अब तक मनरेगा में इस तरह के 25 से भी ज्यादा काम 11 पंचायतों में स्वीकृत किए गए थे। सड़क सह पुलिया निर्माण के इस कार्य में पुल के लिए प्रावधान 2 से ढाई लाख को पूरा व्यय कर दिया जाता है, जबकि मजदूरों को मिलने वाले लाखों रुपए के कार्य में एक तिहाई भी खर्च नहीं किया जाता है। डोहेल पंचायत के तीनों कार्य में साढ़े चार से 6 लाख रुपए तक व्यय किया गया है, जिसमें मटेरियल के लिए शत प्रतिशत व्यय किया गया है। यहां बताना लाजिमी है कि मटेरियल के काम में मिलीभगत कर गुणवत्ता को ताक पर रख दिया जाता है। झराबहाल में टिकेलाल से गजेंद्र के घर तक जिस सड़क निर्माण को अधूरा छोड़ा गया है, उसमें बनी पुल के स्लैब में पखवाड़ेभर में ही दरार आ गई थी। संबंधित तकनीशियन ने भी देखा पर काम को ओके दर्शाने के लिए स्लैब पर प्लास्टर करवा कर गुणवत्ता पर पर्दा डालने की कोशिश की गई है।