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कुटीर निर्माण के लिए पटवारी ने किसान के बीच खेत में बता दी सरकारी जमीन

3 वर्ष पहले
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मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आदिवासियों को जमीन के पट्‌टे बांट रहे हैं वहीं अधिकारी आदिवासियों से उनकी पुस्तैनी जमीन छीनने पर उतारू हैं। ऐसा ही एक मामला तुलसी नगर में सामने आया है। जहां एक आदिवासी गरीब किसान के बीच खेत में आबादी की जमीन होना बताकर तहसीलदार, पटवारी व आरआई और सरपंच प्रतिनिधि ने मिलकर कुटीर निर्माण के लिए सीमांकन कर दिया।

10 कुटीर के निर्माण के लिए पंचायत ने नायब तहसीलदार को पत्र लिखकर जगह की मांग की थी। तहसीलदार ने पटवारी को सरकारी जगह उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। पटवारी ने तुलसीपार निवासी किसान 3 एकड़ जमीन के किसान विष्णु गोंड के खेत के बीच में आबादी की जमीन होना बताया और सोमवार सुबह सरपंच प्रतिनिधि लक्ष्मण लोधी व पटवारी पुष्पेंद्र शर्मा किसान के खेत पर पहुंचे और जेड आकार में चूना डालकर करीब 30 डिसमिल जमीन पर खूटियां ठोक दीं।

इसलिए बताई जा रही आबादी की जमीन : किसान विष्णु गोंड के पास 3 एकड़ जमीन है। करीब 80 साल से किसान इस जमीन पर खेती कर रहा है। इस बार भी उसने उक्त जमीन पर चने बोए थे। तीनों भाईयों के पास करीब 12 एकड़ जमीन है। एक हिस्सा बहन के नाम पर है। किसान विष्णु की जमीन में टीले पर पूर्वजों का चबूतरा है। जो पहले इसी जमीन पर घर बनाकर रहते थे। उनकी मौत के बाद परिवार के लोग धीरे-धीरे तुलसीपार में बस गए और जमीन पर खेती की जाने लगी। लेकिन सरकारी रिकार्ड में अब भी उक्त जमीन आबादी की बताई जा रही है। जबकि करीब 50 साल से इस जमीन पर किसान खेती कर रहा है और यहां न तो आबादी है न ही कोई मकान है और न ही सड़क बिजली, पानी जैसे कोई सुविधा।

सीधा खेत में जाकर चूना डालकर कर दिया सीमांकन

बड़ा सवाल: खेतों में फसल लगी होगी तब कुटीरों तक कैसे पहुंचेंगे लोग

बड़ा सवाल यह है कि बीच खेत में यदि कुटीरों का निर्माण कर भी दिया जाता है तो जब खेतों में फसल लगी होगी तब कुटीरों में रह रहे लोग कहां से निकलेंगे। यही बात जब पटवारी से पूछी गई तो पटवारी पुष्पेंद्र शर्मा का कहना था कि हमारा काम जगह उपलब्ध कराना था। अब आगे पंचायत जानें और अधिकारी जानें।

किसान बोला: रास्ते में मिले पटवारी पर मुझे नहीं दी सूचना

किसान विष्णु ने बताया कि सोमवार सुबह 11 बजे मैं खेत से घर आ रह था। रास्ते में सरपंच प्रतिनिधि लक्ष्मण लोधी व पटवारी पुष्पेंद्र शर्मा मिले भी थे, लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि वह मेरे ही खेत पर जा रहे हैं मैं घर आ गया। इसके बाद जानकारी लगी की मेरे खेत में चूना डालकर नपती कर रहे हैं। विष्णु के मुताबिक इस जमीन पर पहले पूर्वज मकान बनाकर रहते थे।

बीच खेत में चिंन्हित की गई सरकारी जमीन बताता किसान का परिवार।

इन स्थानों पर भी है सरकारी जमीन

वर्तमान में मोघा स्टाफ डेम के पास, पेट्रोल पंप के पास, आलनपुर के पास कई एकड़ जमीन सरकारी है। लेकिन किसान के बीच खेत में आबादी की जमीन पर कुटीर निर्माण करना समझ से परे है। इस संबंध में नायब तहसीलदार आरपी ठाकुर का कहना है कि पंचायत से कुटीर निर्माण के लिए जगह की मांग की गई थी। पटवारी को जगह बताने के लिए सूचित किया गया था। जिसने किसान विष्णु गोंड के खेत के बीच आबादी की जमीन बताई थी, तो मैंने सीमांकन का आदेश दे दिया।

खेत पर बने पूर्वजों के चबूतरे के पास बताई गई है आबादी की जमीन।

निकलने के लिए नहीं है रास्ता, पंचायत व अिधकारी ही जानें

नायब तहसीलदार के निर्देश पर मैंने जमीन बताई है। किसान विष्णु गोंड के खेत में 30 डिसमिल आबादी की जमीन है। जिसका सीमांकन किया गया है। निकलने के लिए रास्ता नहीं है तो पंचायत जाने व अधिकारी जानें। पुष्पेंद्र शर्मा, पटवारी

कई वर्षों से हम इस जमीन पर कर रहे हैं खेती

सीएम आदिवासियों को जमीन दे रहे हैं। वहीं अधिकारी हमसे जमीन छीनी रहे हैं। हमारे पास जमीन की बही है जिसमें 3 एकड़ जमीन है। सालों से हम इस जमीन पर खेती कर रहे हैं। हीराबाई, किसान की प|ी

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