मियाला हाइवे पर 15 साल पहले ट्रक चालक की शराब की बोतल फोड़ कर नृशंस हत्या करने के मामले का खुलासा करते हुए देवगढ़ पुलिस ने पंद्रह साल से फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। वर्ष 2003 में मियाला गांव में ट्रक चालक की हत्या के बाद आरोपी गुजरात के जामनगर में फरारी काट रहा था। मामले में एक आरोपी अभी फरार है। थानाधिकारी राजेंद्र गोदारा ने बताया कि मोरड़ी का दाता बरार निवासी हुकम सिंह (38) पुत्र कर्म सिंह रावत को 15 साल पहले ट्रक ड्राइवर की हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। हुकुम सिंह के साथ यूपी हाल भीम निवासी इरफान ने मिलकर 2003 में ट्रक चालक सिविल लाइन, जालंधर निवासी बुद्धि सिंह पुत्र हरनाम सिंह की हत्या कर शव को ट्रक में छोड़कर फरार हो गए थे।
कहासुनी पर कर दी ड्राइवर की हत्या : थाना प्रभारी राजेंद्र गोदारा ने बताया कि हुकम सिंह ने पूछताछ में बताया कि अहमदाबाद में ट्रक पर हमाली का काम करता था। इस दौरान ट्रक चालक यूपी में कोशांबी हाल भीम निवासी इरफान पुत्र लल्लन मिया सिंधी से दोस्ती हो गई। तत्कालीन समय में किसी कारणवश ट्रकों की हड़ताल होने से इरफान और हुकुम सिंह को भीम जाना था। दोनों ही अहमदाबाद के टीलोड़ा चौराहे पर खड़े होकर ट्रकों को हाथ दे रहे थे। अहमदाबाद से दिल्ली जा रहे गुड़गांव ट्रांसपोर्ट के ट्रक चालक सिविल लाइन जालंधर निवासी बुद्धि सिंह पुत्र हरनाम सिंह की ट्रक में लिफ्ट लेकर इरफान और हुकुम सिंह को ट्रक में बिठाया। तीनों ही ट्रक में बैठकर राजसमंद पहुंचे। तब तक रास्ते में इरफान और हुकुम सिंह की ट्रक चालक बुद्धि सिंह से दोस्ती हो गई। इसके चलते गोमती चौराहे पर तीनों ने मिलकर शराब खरीदी। शराब पीते हुए जा रहे थे तभी देवगढ़ में सांगावास में हाइवे पर तीनों के बीच शराब के नशे में झगड़ा हो गया। तभी झगड़ा मारपीट में बदल गया। इस दौरान इरफान ने शराब की बोतल फोड़ी और बुद्धि सिंह पर जानलेवा हमला कर दिया। बुद्धि सिंह विरोध करने लगा तो हुकम सिंह ने उसे पकड़ा और इरफान ने फूटी हुई शराब की बोतल से बुद्धि सिंह पर वार कर मार डाला। मौत के बाद दोनों ने ट्रक को मियाला के पास हाइवे से उतारकर एक किलोमीटर दूर खेतों में खड़ा कर दिया और दोनों ही मौके से फरार हो गए। दूसरे दिन ट्रक के केबिन से खून टपकता देख ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी। इस पर पुलिस मौके पर पहुंची। तो ट्रक के केबिन में बुद्धि सिंह का शव मिला।
ट्रक ड्राइवर जालंधर का, अहमदाबाद से बैठे थे आरोपी
गौरतलब है कि 11 अप्रैल 2003 को रात 8 बजे देवगढ़ पुलिस को सूचना मिली थी कि ठीकरवास बस स्टैंड से मियाला खेड़ा जाने वाले कच्चे रास्ते में नाले के पास एक ट्रक खड़ी है। ट्रक के केबिन से खून टपक रहा है। अंदर कोई व्यक्ति मरा हो सकता है। इस पर घटनास्थल पर पहुंच ट्रक के फाटक को खोल केबिन में देखा तो बोनट और खलासी सीट के बीच में एक व्यक्ति की लाश पडी मिली। शरीर पर घाव से खून निकल रहे थे। मृतक के जेब से ड्राइविंग लाइसेंस मिला, इसमें नाम बुद्धि सिंह पुत्र हरनाम सिंह निवासी सिविल लाइन, जालंधर था। इस पर ट्रांसपोर्ट कम्पनी से संपर्क कर परिजनों को सूचना दी। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया था। हत्या की इस वारदात की जांच में दो व्यक्ति के साथ ट्रक में अहमदाबाद से साथ होना ज्ञात हुआ। इनके गवाहों के बताए हुलिये के अनुसार स्कैच तैयार किए। स्कैच के हुलिये के आधार पर हुकुम सिंह और उसका साथी इरफान का संदिग्ध होना पाया गया। जिनकी तलाश की गई, लेकिन पता नहीं चल पाया।
दोस्त के साथ हत्या करना कबूला
हुकुमसिंह को गिरफ्तार के बाद जब पूछताछ की तो उसने अपने साथी इरफान के साथ हत्या करना स्वीकार किया है। इस वारदात का खुलासा करने में देवगढ़ थानाप्रभारी राजेंद्र कुमार गोदारा के साथ कांस्टेबल मोहम्मद सलीम, खीवराज, मुकेश कुमार का अहम योगदान रहा।