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भागवत की कथा से कभी तृप्त न हों, इसे सुनते रहने से मिलता है मोक्ष: पं. युवराज

3 वर्ष पहले
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भगवान की कथा से कभी तृप्त नहीं होना चाहिए। कान को समुद्र की तरह बनाकर रखना चाहिए। जिस प्रकार नदियों का जल समुद्र में समा जाता है, उसी प्रकार भगवत कथा कान में समाते रहना चाहिए, जिससे हमारे जीवन को मोक्ष मिलता रहेगा। यह बातें बसनी में आयोजित भागवत कथा में आचार्य पं. युवराज पांडे ने कहीं।

उन्होंने गजेंद्र मोक्ष की कथा बताते हुए कहा कि गजेंद्र पानी पीने समुद्र में गया तो मगर ने उसका पैर जकड़ लिया। संकट में पड़े गजेंद्र ने कमल फूल लेकर भगवान विष्णु को याद किया। विष्णु अवतरित हुए, गजेंद्र को मगर से मुक्ति दिलाई और दोनों को मोक्ष प्रदान किया।

इस पर माता लक्ष्मी ने कहा कि गजेंद्र का पैर पकड़ने वाले मगर को मोक्ष क्यों दे दिया। तब भगवान विष्णु ने बताया कि गजेंद्र तो मेरा भक्त है, उसने मेरा नाम लिया, उसका पैर मगरमच्छ ने पकड़ा था। मेरे नाम लेने वाले से ज्यादा श्रेष्ठ उसका पैर पकड़ने वाला होता है। इसलिए मगरमच्छ को भी मोक्ष देना पड़ा। पं. युवराज ने कहा कि ब्राह्मण में यदि ब्राह्मणत्व नहीं है तो वह ब्राह्मण नहीं हो सकता। वर्तमान में लोग वेद से विहीन होते जा रहे हैं। सनातन धर्म सर्वश्रेष्ठ है। इसकी रक्षा के लिए सभी को आगे आना होगा। पूजा-पाठ जप-तप प्रकांड विद्वान से ही कराना चाहिए। इससे शुभ फल प्राप्त होता है अन्यथा मंत्रोच्चारण में त्रुटि हुई तो अशुभ फल प्राप्त होता है। इस अवसर पर दाऊ टीकम सिंह ठाकुर, अरविंद सिंह, शेर सिंह, सुरेंद्र राजपूत, भीषम सिंह चंदेल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

पं. युवराज ने रविवार को गजेंद्र मोक्ष की कथा बताई।

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