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श्रमिकों के पक्ष में फैसला आने पर मेधा पाटकर ने की जनसभा

3 वर्ष पहले
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श्रमिकों के पक्ष में फैसला आने पर मेधा पाटकर ने की जनसभा

धामनोद|
नगर के समीपस्थ ग्राम सत्राटी स्थित फैक्टरी में प्रबंधन द्वारा श्रमिकों के साथ दुर्भावनावश एवं उन्हें निकालने की मंशा के चलते एक अनुबंध कर दूसरी कंपनी को सारा कार्यभार सौंप दिया था। 17 अक्टूबर 2017 से ही श्रमिकों एवं कर्मचारियों ने कारखाने के मुख्य गेट के बाहर सत्याग्रह धरना शुरू किया था। धरने में केवल श्रमिक ही नहीं उनके परिवार भी 8 महीनों से आंदोलन में हिस्सा ले रहे थे। यह जानकारी मिलने के बाद नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने भी श्रमिकों को नैतिक सहयोग किया। श्रमिकों की लड़ाई को लेबर कोर्ट एवं हाई कोर्ट तक के स्तर पर ले जाया गया। अब 8 माह पश्चात हाई कोर्ट एवं लेबर कोर्ट का फैसला श्रमिकों के पक्ष में आया है। कोर्ट ने अपने आदेश में सेंचुरी प्रबंधन द्वारा वेयरइट ग्लोबल कंपनी को अनुबंध के अस्तित्व को ही मानने से इंकार कर श्रमिकों को उनके स्वत्व का शीघ्र भुगतान करने के निर्देश भी दिए। श्रमिकों की जीत की खुशी में शुक्रवार देर रात सेंचुरी के ही गेट पर श्रमिकों ने जनसभा की।

पाटकर के अलावा ऊर्जा विशेषज्ञ वैज्ञानिक सौम्य दत्ता, हाईकोर्ट वकील बीएल नागर, एटक के महासचिव मोहन लिमजे, इंटक के महासचिव एपी यादव, सेंचुरी के श्रमिक नेता राजकुमार दुबे शामिल हुए। पाटकर ने कोर्ट में होने वाली समूची प्रक्रिया के बारे में बताया। कोर्ट के अंग्रेजी में आए हुए आदेश को हिंदी करण करके सभी को समझाया।

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