बाल विवाह रोकने पंचायतें करा रहीं मुनादी
बाल विवाह का सिलसिला जिले में लगातार जारी है। महिला बाल विकास विभाग की जिला बाल संरक्षण टीम इस दिशा में कार्रवाई तो कर रही, लेकिन सूचना मिलने पर ही संबंधित स्थानों पर टीम पहुंचकर बाल विवाह रूकवा रही है। जिला बाल संरक्षण टीम को भी ऐसी शंका है, इसलिए जिले के सभी 355 पंचायतों को लिखित रूप से आदेशित कर बाल विवाह की रोकथाम करते हुए विभाग को सूचना देने कहा गया है।
कुछ पंचायतों द्वारा इस आदेश को लेकर मुनादी भी कराई गई है। जिला बाल संरक्षण अधिकारी आनंद पाठक ने कहा कि बाल विवाह की आशंका को लेकर सभी ग्राम पंचायतों, मितानिनों, जनपदों को विभाग की ओर से कार्रवाई के लिए कहा गया है।
जिला स्तर पर भी टीम बनी है। 2015 से अब तक 42 बाल विवाह रोक चुके हैं। कैटरर्स, टेंट आदि संस्थानों में आधार कार्ड देखने के बाद आर्डर लेने के प्रस्ताव को कलेक्टोरेट में सप्ताहभर बाद होने वाली विभागीय बैठक में रखेंगे। निर्णय अनुसार इस पर कार्रवाई करेंगे।
नगरी, मगरलोड सहित दूरस्थ, वनांचल गांवों में आज भी बाल विवाह हो रहे हैं। पिछले तीन साल में जिला बाल संरक्षण टीम 42 बाल विवाह रोकने में सफल हुई। 2018 में ही 8 बाल विवाह रोके गए। बुधवार को अक्षय तृतीया है। वर्षभर का यह सबसे बड़ा व श्रेष्ठ मुहूर्त माना जाता है। इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ अक्षय तृतीया पर्व मनाया जाएगा, इसलिए दर्जनों शादियां इस दिन होंगी। ऐसे में बाल विवाह की शंका को भी नकारा नहीं जा सकता।
इधर बाल विवाह को रोकने शहर के नागरिक प्रभावी कदम उठाने की मांग प्रशासन से कर रहे हैं। एसके पांडेय, विजय लक्ष्मी सोनी, शिक्षिका मंजू साहू, प्रेरणा साहू ने कहा कि बाल विवाह भी सामाजिक बुराई है। इस पर पूर्ण रूप से अंकुश लगाने के लिए प्रशासन स्तर पर आधार कार्ड की अनिवार्यता लागू की जानी चाहिए।
एमपी में इस तरह का प्रयास हो रहा है। इसके तहत टेंट, कैटरर्स, शादी कार्ड प्रिंटर्स को आदेशित किया जाए कि वे शादी का आर्डर तभी लें, जब वर-वधु के आधार कार्ड उनके परिजन प्रस्तुत करें। इससे उम्र की पुष्टि हो जाएगी और काफी हद तक बाल विवाह रोकने में सफलता मिलेगी।
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अक्षय तृतीया
तीन साल में जिले की बाल संरक्षण टीम ने 42 बाल विवाह रोके, गांवों में फिर भी जारी
परिवार को लगी थी 5 लाख की चोट
कुछ दिनों पूर्व जिला बाल संरक्षण टीम ने एक बाल विवाह रुकवाया था, लेकिन वर पक्ष के परिजन कैटरर्स व टेंट वालों को 50 प्रतिशत राशि एडवांस में दे चुके थे। ढाई लाख रुपए एडवांस में दिया जा चुका था, जिसे वापस लेना मुश्किल था। ऐसी स्थिति में परिजनों ने शादी तो रोक दी, लेकिन भोज का आयोजन मजबूरी में करना पड़ा। परिवार को लगभग 5 लाख का नुकसान हुआ।