अरबों का बजट पर निगम 15% भी नहीं जुटा पाता
निगम शासन से योजनाओं को स्वीकृति दिलाने के मामले में फिसड्डी
धमतरी | नगर निगम विकास कार्यो के लिए हर साल बजट में अरबों रुपए का प्रावधान करता है, पर शासन से योजनाओं को स्वीकृति दिलाने के मामले में फिसड्डी ही रहता है। पिछले साल के बजट में 27723.28 लाख रुपए का प्रावधान किया गया था, पर निगम मात्र 4204.92 लाख रुपए ही जुटा पाया। इसके पहले के तीन बजट का भी यहीं हाल रहा था। ऐसे में विकास कार्यों के लिए राशि की कमी नहीं होने के शासन के दावों के बीच निगम के पदाधिकारियों और अधिकारियों की क्षमता पर सवाल उठ रहे हैं।
नगर पालिका के अपग्रेड होकर नगर निगम बनने के बाद पहला बजट वर्ष 2015- 16 में पेश हुआ, जिसमें विकास कार्यो के लिए 29770.53 लाख रूपए जुटाने का प्रावधान था। इसके विपरीत निगम सालभर में 4406.99 रुपए ही जुटा पाया। इसके बाद वर्ष 2016-17 के बजट में 33531.49 लाख रूपए का प्रावधान किया गया, पर 3902.63 लाख रूपए ही मिल पाए। इसी तरह वर्ष 2017-18 के बजट में 27723.28 लाख रुपए का प्रावधान किया गया, पर मात्र 4204.92 लाख रूपए ही मिले। अब वर्ष 2018-19 के लिए भी निगम ने 33768.96 लाख रूपयों का भारी-भरकम बजट बनाया है, जिसमें 33756.10 लाख रुपए खर्च करने का प्रावधान है।
योजनाएं जो सालों से बजट तक ही सीमित : सिटी माल, मल्टीस्टोरी काम्पलेक्स, मल्टीस्टोरी पार्किंग, पालिका बाजार, कामकाजी महिला हास्टल, ट्रांसपोर्ट नगर, गोकुल धाम, आडिटोरियम, जिला स्तरीय स्पोटर्स काम्पलेक्स, खेल मैदान विकास, नाचन क्षेत्र विकास, स्वीमिंग पुल, गोल बाजार पुनर्निर्माण, रामसागर तालाब के पास चौपाटी, सभी तालाबों का विकास एवं नाली निर्माण, एकीकृत ड्रेनेज सिस्टम, हाईटेक बस स्टैंड समेत शहर विकास की कई बड़ी योजनाएं हैं, जिनके लिए निगम के बजट में हर साल करोड़ों रूपयों का प्रावधान किया जाता है, पर ये कार्य धरातल पर आ ही नहीं पा रहे।
कल विस्तार से बताऊंगी
इस संबंध में बार-बार कॉल किए जाने के बावजूद निगम कमिश्नर अशोक द्विवेदी ने मोबाईल नहीं उठाया। महापौर अर्चना चौबे ने कहा कि आज दिनभर कार्यक्रमों में रहने के कारण सिर में काफी दर्द हो रहा है, इसलिए सारी चीजें कल विस्तार से बताऊंगी।