5 साल पहले 25 लाख से बने पुरातत्व संग्रहालय भवन में चल रहा च्वाइस सेंटर
पूरे जिले और जिले के सीमावर्ती इलाकों में पुरा संपदा बिखरी पड़ी है, लेकिन इन्हें सहेजने के प्रति विभागीय अफसर दिलचस्पी दिखा रहे, न ही जिला प्रशासन। स्थिति यह है कि जिला मुख्यालय में कलेक्टोरेट के बाजू 5 साल पहले पुरातत्व संग्रहालय का भवन 25 लाख की लागत से बनाया जा चुका है, पर जिलेभर में बिखरी पड़ी पुरा संपदा को यहां लाकर संरक्षित करने का प्रयास अब तक नहीं हुआ, उल्टे इस भवन में प्रशासन ने च्वाइस सेंटर खुलवा दिया है।
जिला पुरातत्व संग्रहालय की बिल्डिंग 2013 में करीब 25 लाख रुपए की लागत से बनी थी। इसके बाद लोगों को उम्मीद थी कि अब जिलेभर में बिखरी पड़ी पुरा संपदा को यहां लाकर संरक्षित किया जाएगा, लेकिन 5 साल बाद भी ऐसा कुछ होता नहीं दिख रहा है। संग्रहालय का भवन 4 सालों तक खाली पड़ा था और गेट पर ताला लटक रहा था। यहां न अधिकारी आते थे, न ही कोई कर्मचारी। भास्कर ने मंगलवार को दोपहर 1.30 बजे इस भवन का जायजा लिया, तब यहां आधार कार्ड बनाने के लिए च्वाइस सेंटर खुला दिखा।
धमतरी जिले को भगवान श्रीराम के वनगमन का रास्ता भी माना गया है, यहां-वहां बिखरी पड़ी हैं पुरा संपदा
हमारा जिला पुरा संपदा की दृष्टि से काफी समृद्ध है। धमतरी जिले को भगवान श्रीराम के वन गमन का रास्ता भी माना गया है। इसका उल्लेख रामायण के श्रीराम गरूड मिलन प्रसंग में मिलता है। इसके अलावा डोंगापथरा, छाती, पोटियाडीह, नगरी, सिहावा, मगरलोड ब्लाक के अलावा, कांकेर और उड़ीसा के सीमावर्ती क्षेत्रों में इतनी पुरा संपदा बिखरी पड़ी है कि इन्हें संग्रहालय में लाकर रखा जाए, तो लोगों को न केवल जिले के इतिहास के संबंध में नई-नई जानकारियां मिलेंगी, बल्कि यहां के आध्यात्मिक, धार्मिक महत्व और इतिहास से भी लोग रूबरू हो सकेंगे।
सालभर पहले कलेक्टर ने कहा था-बताएं कहां हैं पुरा संपदा, लाकर रख देंगे, अब तक कोई व्यवस्था नहीं
इस मामले में सालभर पहले कलेक्टर डॉ. सीआर प्रसन्ना ने भास्कर से कहा था कि संग्रहालय बंद रहता है, इसकी जानकारी मुझे आप से मिल रही है। मैं पता करवाता हूं और सुनिश्चित करता हूं कि पुरातत्व संग्रहालय का भवन अपने स्थापना के उद्देश्य की पूर्ति करे। इसके बाद अब उनका कहना है कि जिले में कहां-कहां पड़ी है पुरातत्व संपदा, इसकी जानकारी दें, तो उन्हें लाकर संग्रहालय में रखवा देंगे।