अल्पवर्षा व भू-जल स्त्राेत बचाने रबी सीजन में धान पर प्रतिबंध लगा था। कृषि विभाग ने गांव-गांव में जागरूकता रथ घुमाकर धान के बदले दलहन-तिलहन, गेहूं, चना लगाने किसानों को प्रेरित किया। प्रतिबंध का 90 प्रतिशत असर पड़ा, फिर भी जिले के 3636 हेक्टेयर में धान की फसल लग ही गई। सबसे ज्यादा मगरलोड ब्लाॅक में 2440 हेक्टेयर में धान की फसल ली गई, यहां गर्मी में जल स्तर ज्यादा गिरता है। यही नहीं बेमौसम बारिश, आेलावृष्टि और तनाछेदक से धान की फसल बर्बाद होने की शिकायत मगरलोड ब्लाक से ही मिल रही है।
खैरझिटी, सांकरा, खुसरेंगा क्षेत्र के किसान धान बर्बाद होने की जानकारी प्रशासन को देकर मुआवजा की मांग कर चुके हैं। इधर कृषि विभाग का कहना है धान पर प्रतिबंध लगा था। किसान अपने रिस्क पर धान लगाएं थे। वे खुद जवाबदार हैं। धान पर तो फसल क्षति मुआवजा देने का सवाल ही नहीं है।
चना बोने वाले 39 हजार किसानों को मिलेगी प्रोत्साहन राशि: जिले में हजारों किसानों ने 14 हजार हेक्टेयर में चना फसल लिया। इन्हें अब शासन की ओर से 1500 रुपए प्रति एकड़ के हिसाब से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसका वितरण 23 मई से शुरू हो जाएगा। जिले में 39035 किसानों को इसका लाभ मिलेगा।
मुआवजा की पात्रता नहीं: उपसंचालक कृषि एलपी अहिवार ने कहा कि रबी में धान की फसल लेने पर प्रतिबंध था, इसलिए मुआवजा की कोई पात्रता नहीं रखते। प्रतिबंध का 92 प्रतिशत असर हुआ है।
बीते साल 45,840 हेक्टेयर में धान की फसल लगी थी
बीते वर्ष रबी सीजन में 45,840 हेक्टेयर में धान की फसल लगी थी। इस वर्ष 3636 हेक्टेयर में ही फसल लगी है। कृषि विभाग के अनुसार प्रतिबंध के बाद 92 प्रतिशत धान पर ब्रेक लगा है। इस रबी में धमतरी ब्लाॅक के सबसे कम 308 हेक्टेयर, कुरूद में 315, नगरी में 572 और मगरलोड में 2440 हेक्टेयर में धान लगा है।