शहर में 50 हजार का सामान 10 किमी लेकर गए तो रखना होगा ई-वे बिल
जीएसटी के तहत 1 जून से राज्य के भीतर 50 हजार रुपए से अधिक के माल के परिवहन पर ई-वे बिल अनिवार्य कर दिया जाएगा। सेल्सटैक्स विभाग द्वारा इसे लेकर बुधवार की सुबह 10.30 बजे धनवंतरी भवन में कार्यशाला का आयोजन किया गया, जिसमें राज्य कर सहायक आयुक्त रामनरेश चौहान ने शहर के व्यापारियों को ई-वे बिल के संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि ई-वे बिल पंजीयन के लिए व्यापारियों का मोबाइल नंबर और जीएसटी नंबर अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि राज्य या शहर के भीतर 50 हजार या इससे अधिक का सामान लेकर चलते हैं, या कोई सामान लेकर 10 किमी से ज्यादा चलते हैं, तब आपके पास ई-वे बिल होना अनिवार्य है। बिल के अभाव में सामान के निर्माता, सामान खरीदने वाले और सामान का ट्रांसपोर्ट करने वाले में से किसी भी एक के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। 1 जून से यह लागू हो रहा है। समय रहते कारोबारी ई-वे बिल बनवा लें, नहीं तो परेशानी बढ़ जाएगी। 1 जून से अंतर जिला ई-वे बिल योजना शुरू हो रही है। इसके लिए कारोबारियों का पंजीयन जरूरी है।
जीएसटी की गाइड लाइन में यह प्रावधान
छत्तीसगढ़ जीएसटी 2017 के नियम 138 (14) डी द्वारा दी गई शक्तियों के अधीन राज्य के अंदर माल क्रय-विक्रय पर ई-वे बिल व्यवस्था में सरलीकरण का प्रावधान है, जिसे राज्य के कर आयुक्त व मुख्य केन्द्रीय कर आयुक्त की सहमति से जो वस्तुएं अधिसूचित की जाएंगी, सिर्फ उन्हीं पर ई-वे बिल व्यवस्था लागू होगी। मध्यप्रदेश में इसी के तहत शासन ने सिर्फ चुनिंदा वस्तुओं को ही इस दायरे में रखा है।
धमतरी. कार्यशाला में ई-वे बिल की जानकारी देते सेल टैक्स अफसर।
राज्य कर सहायक आयुक्त रामनरेश चौहान ने कहा कि ई-वे बिल 1 जून से छत्तीसगढ़ में लागू हो रहा है। जो कारोबारी पहले अपना कारोबार छिपाते थे, वे अब नहीं छिपा पाएंगे। यदि कारोबारी कारोबार को छिपाकर गलत जानकारी देता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी, साथ ही सामान का 5 गुना तक टैक्स पेनाल्टी के रूप में भी देना होगा।
गलत जानकारी पर 5 गुना पेनाल्टी
दूसरी फर्म का जीएसटी बिल डालने पर गिरफ्तारी : अगर कोई व्यवसायी किसी दूसरे व्यवसायी का जीएसटी नंबर डालकर बिल जारी करेगा, तो उसके खिलाफ जीएसटी अधिनियम व भारतीय दंड संहिता के तहत कार्रवाई की जाएगी। बिल जारी करने के स्पष्ट और विस्तृत पंजीयन नंबर, बिल का नंबर, तारीख व सामान का नाम, टैक्स का उल्लेख करना होगा।
दो तरह से देनी होगी जानकारी
1. ईडब्यूबी 01 : माल क्रय-विक्रय करने के बाद इसके तहत जानकारी भरनी होगी। इसमें सामान की मात्रा, लागत, संबंधित कारोबारी व विक्रयकर्ता का नाम आदि भरा जाएगा।
जीएसटी से परेशान, अब ई-वे बिल चुनौती
छत्तीसगढ़ में अंतरा ई-वे बिल की घोषणा होते ही कारोबारियों की चिंता दोगुनी हो गई है। कारोबारी सोच रहे हैं कि जीएसटी के बाद शुरू हो रही इस नई व्यवस्था के साथ वे कारोबार कैसे पर पाएंगे। इसे लेकर कई तरह की दुविधाएं हैं। यही वजह है कि इसकी प्रक्रिया को समझाने के लिए वे एक्सपर्ट के पास पहुंच रहे हैं। पुट्टी और पेंट के कारोबार से जुड़े कारोबारी मनोज गजेन्द्र, देवेश यादव बताते हैं कि जीएसटी से पहले ही वे परेशान हैं। हर महीने दस्तावेजों को सहेजने और पूरी जानकारी के साथ रिटर्न दाखिल करने में उनके पसीने छूट रहे हैं। ऐसे में ई-वे बिल उनके सामने एक बड़ी चुनौती है।
2. ईडब्ल्यूबी 02 : पार्ट- दो में परिवहन के लिए निर्धारित वाहन से संबंधित जानकारी कारोबारियों को देनी होगी। इसमें प्राईवेट वाहन से बस, ट्रेन आदि की जानकारी भरकर बिल जनरेट करना होगा।