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जल संसाधन विभाग नहीं चाहता स्थानीय स्तर पर किसी को गंगरेल में बोटिंग की अनुमति देना

3 वर्ष पहले
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जल संसाधन विभाग द्वारा रोक लगाने के कारण गंगरेल बांध में पर्यटकों को बाेटिंग की सुविधा अब नहीं मिल पा रही है। इसके लिए वन प्रबंधन समिति ने मुख्यमंत्री समेत अफसराें को आवेदन देकर अनुमति मांगी थी, पर विभाग अब स्थानीय स्तर पर किसी को अनुमति देने के मूड में नहीं है। इसकी सूचना कलेक्टर को भी दी जा चुकी है।

गंगरेल बांध के किनारे वन विभाग द्वारा विकसित मानव वन और इकाे एडवेंचर कैंप का संचालन मरादेव की वन प्रबंधन समिति ठेकेदार के माध्यम से कर रही है। पर्यटकों के मनाेरंजन के लिए समिति ने बांध में बोटिंग भी शुरू कराई थी, पर सालभर बाद जल संसाधन विभाग का ध्यान इस ओर गया और अफसरों ने बोटिंग के लिए विभाग से अनुमति नहीं लिए जाने का हवाला देकर अब इसे बंद करा दिया। इसके बाद समिति ने पिछले महीने मुख्यमंत्री, कलेक्टर समेत अन्य अधिकारियों को लिखित आवेदन देकर गंगरेल बांध में पर्यटकों को बाेटिंग कराने की अनुमति मांगी, पर विभाग का साफ कहना है कि स्थानीय स्तर पर इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।

आपसी खींचतान का नतीजा

वन प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि ठेकेदार के माध्यम से सालभर तक सब कुछ ठीक चलता रहा, पर दूसरे साल जब ठेके के नवीनीकरण का समय आया, तब समिति के ही चार सदस्य काेमल, सेवंत, संतोष व एक अन्य ने समिति के नाम से झूठी शिकायत कर दी, क्योंकि वे ठेकेदार को हटाकर गतिविधियों का खुद संचालन करना चाहते थे। इसकी भनक अन्य सदस्यों व गांव वालों को लगी, तब गांव में आम बैठक बुलाई गई, जिसमें वन विभाग के उच्चाधिकारी भी मौजूद थे। बैठक में चारों शिकायतकर्ताओं ने कहा कि वे खुद गतिविधियों का संचालन करना चाहते हैं, पर ठेके की राशि (12 लाख रुपए) देने के लिए तैयार नहीं थे। ऐसे में समिति ने सर्व सम्मति से चारों की सदस्यता खत्म करने और तीन साल के अनुबंध के तहत ठेके का सालभर के लिए नवीनीकरण करने का निर्णय लिया। इसके बाद ठेकेदार ने एडवेंचर कैंप, मानव वन व बोटिंग का संचालन फिर शुरू कर दिया, लेकिन कुछ दिनों बाद ही चारों निष्कासित सदस्यों द्वारा समिति के नाम से पूर्व में की गई फर्जी शिकायत के आधार पर जल संसाधन विभाग ने बांध में बोटिंग बंद करा दी।

पर्यटक हो रहे मायूस

गंगरेल बांध में बाेटिंग शुरू होने के बाद यहां आने वाले पर्यटक इसका भरपूर मजा ले रहे थे, पर अब बोटिंग बंद करा दिए जाने के कारण उन्हें मायूस होना पड़ रहा है। बांध के किनारे पड़ी मोटर बोट तक पर्यटक राेजाना आ रहे हैं, पर इसके संचालक नहीं रहने के कारण चौकीदार से पूछताछ कर बैरंग लौट रहे हैं।

आफिस आएं, तब बताऊंगा

बोटिंग की अनुमति न दिए जाने के संबंध में मोबाइल से पूछताछ किए जाने पर जल प्रबंध संभाग रूद्री के ईई अजय ठाकुर ने कहा कि इस मामले में कुछ नहीं कहूंगा। आफिस में आ जाएं, तब सारी बातें बता दूंगा।

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