स्वास्थ्य व्यवस्था लड़खड़ाई, फरसिया में निमोनिया से दुधमुंही बच्ची की मौत
जिला मुख्यालय के गौशाला मैदान में जिलेभर की करीब 1700 मितानिन 7 दिनों से बेमुद्दत हड़ताल पर हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्था लड़खड़ा गई है। ग्राम फरसिया की निमोनिया पीड़ित ढाई माह की बच्ची को बेहतर उपचार नहीं मिलने से उसकी मौत भी हो गई। इसके अलावा समय पर मितानिन का सहयोग नहीं मिलने से डिलीवरी के दौरान एक नवजात बच्चे की भी मौत हो गई।
जिला मितानिन संघ ने गौशाला मैदान में जारी बेमुद्दत धरने में प्रत्येक मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, स्वास्थ्य पंचायत समन्वयक व हेल्प डेस्क प्रभारी की उपस्थिति अनिवार्य कर दी है, इस कारण सभी मितानिनें हड़ताल में शामिल हैं। इसके चलते गांवों में लोगों को प्राथमिक उपचार और दवाइयां समय पर नहीं मिल पा रही हैं।
संघ की अध्यक्ष बबीता साहू, मोंगरा साहू, लक्ष्मी देवांगन ने बताया कि मितानिन पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को ग्रामीण स्तर तक पहुंचाने का काम कर रही हैं। इससे शिशु मातृ मृत्यु दर में कमी आई है और संस्थागत प्रसव में बढ़ोतरी हुई है। पोषण के क्षेत्र में भी सुधार आया है, लेकिन मितानिनों को नाममात्र की प्राेत्साहन राशि दी जा रही है। उन्होंने कहा कि मांगें पूरी होते तक हड़ताल जारी रहेगी।
स्वास्थ्य कार्यक्रम इनके भरोसे : ग्रामीण क्षेत्रों में भले ही स्वास्थ्य विभाग के कार्यकर्ता पदस्थ रहते हैं, लेकिन स्वास्थ्य कार्यक्रमों में मितानिनों की मुख्य भूमिका रहती है। पल्स पोलियो अभियान, टीकाकरण, संस्थागत प्रसव, गर्भवती की जांच, परिवार नियोजन, गांव में बीमारी होने पर दवा वितरण, नवजात की सुरक्षा, पोषण व कुपोषण निवारण समेत अन्य कार्यक्रमों में वे सहयोग करती हैं।
गौशाला मैदान में 10 मई से जिलेभर की मितानिन मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन कर रही हैं।
शासकीय सेवा में भर्ती की मांग
जानकी साहू, नेमूचंद साहू, पुष्पलता साहू ने कहा कि हमारी 3 सूत्रीय मांगें हैं। इनमें मितानिनों को स्वास्थ्य पंचायत समन्वय बनाने और एएनएम प्रशिक्षण प्राप्त मितानिनों को सीधे शासकीय सेवा में लेने की मांग शामिल है। उन्होंने बताया कि प्रोत्साहन राशि में 25 प्रतिशत अंशदान की वृद्धि की गई थी, वह भी नहीं दी जा रही है। इसका भुगतान हर माह होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अच्छा कार्य करने पर भी उनकी मांगों पर नजरअंदाज किया जा रहा है। ब्लाक समन्वयक व पंचायत समन्वयक को 30 हजार मानदेय, मितानिन प्रशिक्षक को 20 हजार, हेल्प डेस्क व मितानिन को 15 हजार रुपए दिया जाना चाहिए।
1. नहीं मिला इलाज
मितानिन गणेश बाई ने बताया कि बीते 11 मई को इलाज के अभाव में नगरी ब्लाक के फरसिया निवासी कुलेश के ढाई माह के बेटे की मौत हो गई। उसे निमोनिया था और समय पर उपचार नहीं मिल पाया।
2. घर में प्रसव
मितानिन दुलारी बाई ने बताया कि 15 मई को नगरी ब्लाक के ग्राम बोड़रा में भेलकी बाई के घर में प्रसव हुआ। गांव में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता है, इसके बावजूद लापरवाही से जच्चे-बच्चे की जान पर आफत आ गई।
3. नवजात ने दम तोड़ा
मितानिन अनीता मानिकपुरी ने बताया कि ग्राम सिरसिदा निवासी गालोराम ध्रुव की प|ी को 15 मई को प्रसव पीड़ा उठी, तब परिजन बुलाने आए थे। शाम करीब 6 बजे उसे जिला अस्पताल लाया गया, जहां प्रसव के दौरान नवजात बच्चे की मृत्यु हो गई।
शासन स्तर का मामला
सीएमएचओ डॉ. डीके तुर्रे ने कहा कि मितानिनों की मांगें शासन स्तर की हैं। हड़ताल पर जाने से स्वास्थ्य सेवा पर प्रभाव नहीं पड़ा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और फील्ड वर्क करने वाली नर्स व्यवस्था संभाल रही हैं। दवा और इलाज के अभाव में किसी की मौत होने की जानकारी नहीं है। आप बता रहे हैं, तो पता करवा लेता हूं।