एक तरफ महज एक सप्ताह पहले राज्य शासन ने शहर में मिशन क्लीन सिटी अभियान के तहत बेहतरीन कार्य के लिए नगर निगम को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया तो दूसरी तरफ शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। स्वच्छता रैंकिंग का रिजल्ट आने से पहले ही शहर की सफाई व्यवस्था लचर नजर आने लगी है।
डोर टू डोर कचरा तो एकत्र हो रहा है, लेकिन शहर में इधर-उधर पड़ा कचरा उठाया नहीं जा रहा है। हफ्तेभर से नालियां भी साफ नहीं हो रही हैं। राज्य शासन की ओर से महापौर और कमिश्नर को सप्ताहभर पहले यह मिशन क्लीन सिटी के तहत अनुकरणीय कार्याें के लिए प्रशस्ति पत्र प्रदान किया गया था। ठीक उसी दिन निगम ने अपने 50 ठेका सफाई कर्मियों को काम से निकाल दिया। इसके बाद निकाले गए कर्मियों के समर्थन में प्लेसमेंट एजेंसी के 75 सफाई कर्मियों ने भी काम बंद कर दिया।
4 करोड़ खर्च के बाद भी नहीं सुधरी हालत
नगर निगम ने पिछले तीन सालों में सफाई पर करीब चार करोड़ खर्च कर दिए। इसमें करीब डेढ़ करोड़ तो ठेका कर्मचारियों के वेतन भुगतान के लिए राज्य शासन ने दिए। इसके अलावा प्लेसमेंट एजेंसी से जो 75 सफाई कर्मी लिए गए, उन पर भी 2 करोड़ से रुपए अधिक खर्च हुए। इसके बाद भी स्वच्छता रैंकिंग आने से पहले शहर की सफाई व्यवस्था बदहाल है।
नगर निगम के पास सफाई के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं
निगम के पास सफाई के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है, फिर भी उसने 50 ठेका सफाई कर्मचारियों को एक झटके में हटा दिया। व्यवस्था बिगड़ने के बाद अब इनमें से 15 कर्मियों को काम पर वापस लेने की तैयारी निगम कर रहा है। इन्हें हटाने के पहले ही इसके दुष्परिणाम पर सोच विचार कर लिया जाता, तो यह नौबत ही नहीं आती।
डोर टू डोर कचरा तो उठ रहा लेकिन सड़कों से नहीं, नालियां भी हैं जाम
धमतरी। शिव चौक स्थित भगवती मैरिज ग्राउंड के सामने शुक्रवार सुबह 11.30 बजे यह स्थिति थी। इस चौक से 4 दिन से कचरा नहीं उठा है।
ठेका कर्मियों के हटने से व्यवस्था बिगड़ी है, जल्द सुधार किया जाएगा: कमिश्नर
इस मामले में कमिश्नर रमेश जायसवाल का कहना है कि ठेका कर्मचारियों को हटाए जाने के बाद सफाई व्यवस्था थोड़ी बिगड़ी है। 75 प्लेसमेंट सफाई कर्मी अब काम पर लौट आए हैं। इसके अलावा निकाले गए ठेका सफाई कर्मियों में से 15 को काम पर वापस ले रहे हैं। इसके बाद स्थिति सुधर जाएगी।
150 महिलाओं के जिम्मे शहर की सफाई व्यवस्था
ठेका कर्मचारियों के हटाए जाने और उनके समर्थन में अन्य 75 सफाई कर्मियों के काम नहीं करने के बाद पूरी सफाई व्यवस्था स्व सहायता समूहों की 150 महिलाओं पर आ टिकी, लेकिन वे डोर टू डोर कचरा कलेक्शन ही करती हैं। नालियांं साफ करना और इधर-उधर फेंके गए कचरे को उठाने का काम सफाई कर्मचारी ही करते रहे हैं। यही काम सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है।
तो स्वच्छता की दौड़ से बाहर हो जाएगा शहर
सफाई व्यवस्था का यदि यही हाल रहा, तो निगम भविष्य में कभी शहर को स्वच्छता सर्वे में अच्छी रैंकिंग नहीं दिला सकेगा। न ही मिशन क्लीन सिटी में बेहतर काम हो सकेगा, जिसके लिए उसे प्रशस्ति पत्र मिला है। ऐसे में हमारा शहर स्वच्छता की दौड़ से बाहर हो जाएगा।