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खेतों में पड़ गई थीं दरारें, 24 घंटे में 65 मिमी बारिश से भर गया पानी

3 वर्ष पहले
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सावन लगने के साथ ही जिले में मानसून थम गई थी। 10 दिनों तक बारिश नहीं होने से किसानों के माथे पर चिंता की लकीर खींच गई थी। वहीं धूप निकलने के कारण खेतों में दरारें और धान के पौधे भी पीले पड़ रहे थे। पर 6 अगस्त की देर-शाम मानसून फिर से सक्रिय हुआ और रात से अलसुबह तक रुक-रुककर बारिश हुई। अंचल में तेज बारिश होने से सूखे की मार झेल रहे खेतों में भी पानी भर गया। इससे किसानों ने राहत की सांस ली है। भू-अभिलेख शाखा के अनुसार जिले में 24 घंटे में 65 मिमी बारिश हुई। कुरूद तहसील में सबसे अधिक 100 मिमी और नगरी तहसील में सबसे कम 27.2 मिमी बारिश दर्ज की गई। धमतरी में 36.6 मिमी और मगरलोड में 96 मिमी बारिश दर्ज की गई । मंगलवार को दोपहर 3 बजे के बाद रुक-रुककर बारिश का दौर भी जारी रही।

गंगरेल में मात्र 9.224 टीएमसी उपयोग का जल : जिले में 3 बांध हैं। इसके अलावा कांकेर जिले के दुधावा बांध का पानी भी जिले में आता है, लेकिन 10 दिनों से मानसून थमने के कारण बांधों की स्थिति भी चिंताजनक है। गंगरेल बांध में मात्र 9.224 टीएमसी उपयोगी जल है। यहां से सिंचाई पानी देना मुश्किल है। माडमसिल्ली बांध में 16 प्रतिशत ही जलभराव है। दुधावा में 24.11 और सोंढूर बांध में 49.51 प्रतिशत पानी है। जिला प्रशासन ने सोंढूर बांध से पानी देने का निर्णय लिया है, लेकिन इस बांध से मात्र 10 से 11 हजार हेक्टेयर खेतों को ही पानी मिल पाएगा, जबकि इस साल धान का रकबा 1.50 लाख एकड़ से ज्यादा है।

अगले 48 घंटे में भारी बारिश की चेतावनी : लालपुर मौसम विभाग के वैज्ञानिक पीएल देवांगन ने बताया कि उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी और समीपवर्ती क्षेत्र पर एक कम दबाव का क्षेत्र बना है। जिसके चलते वायु का चक्रवाती घेरा समुद्र तल से 7.6 किमी की ऊंचाई पर विस्तारित है। 10 दिनों के ब्रेक के बाद फिर मानसून सक्रिय हो गया है। प्रदेश के कई स्थानों पर अगले 48 घंटों के दौरान अति भारी बारिश की संभावना है। इसे देखते हुए मौसम विभाग ने अलर्ट जारी किया है। इसका ज्यादा प्रभाव उत्तरी और मध्य हिस्सा सरगुजा, बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग संभाग में है।

6 को हुई देर-रात की तेज बारिश से इस क्षेत्र के ही सभी खेतों में पानी भर गया।

एक नजर इन आंकड़ों पर

इस साल 61128 किसानों ने कराया बीमा।

112 करोड़ 87 लाख 46हजार रूपए ऋण भी बांटा गया।

पिछले साल 2017 में 117 करोड़ 94 लाख ऋण बंटा था।

2017 का 15 करोड़ 88 लाख 51 हजार रूपए कर्ज है 10 किसानों पर।

अब तक 1.31 लाख हेक्टेयर में बोनी हो पाई, जबकि लक्ष्य 1.35 लाख हेक्टेयर है।

39629 हेक्टेयर में ही रोपा लग पाया, जबकि लक्ष्य 52780 हेक्टेयर है।

वर्षा और बांध का हाल

जिले में अब तक 537.3 मिमी औसत बारिश हुई, जबकि 644.0 मिमी वर्षा हो जानी थी।

गंगरेल में अभी 9.248 टीएमसी ही उपयोगी जल है।

3 अन्य बांध मुरुमसिल्ली, दुधावा, सोंढूर में 5.592 टीएमसी पानी शेष है।

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