- Hindi News
- National
- बच्चों की टोली ने रचाया गुड्डे गुड़िए का ब्याह, परिजन बने घराती और बराती
बच्चों की टोली ने रचाया गुड्डे-गुड़िए का ब्याह, परिजन बने घराती और बराती
अक्षय तृतीया पर बुधवार को शहर के विभिन्न मोहल्लों में पारंपरिक तरीके से गुड्डे-गुड़ियाें (पुतरा-पुतरी) की शादी रचाई गई। घरों में बच्चों की टोली ने बड़ों के साथ मिलकर इसके लिए मंडप सजाया और बारात निकालकर शादी की सारी रस्में पूरी की।
गुड्डे-गुडियों की शादी में परिजन ही घराती-बराती बने। शहर के हटकेशर, जालमपुर, लालबगीचा, अधारी नवागांव, कोष्टापारा, दानीटोला, गोकुलपुर, मकेश्वर वार्ड सहित अन्य वार्डों में धूमधाम से अक्षय तृतीय पर्व मनाया गया। बच्चों में शादी को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह देखने को मिला। परिवार समेत आस-पास के लोग भी गुड्डे-गुडियों को तेल हल्दी लगाने पहुंचे और उपहार भेंट किए।
कई जोड़ों ने लिए फेरे: अक्षय तृतीय के अवसर पर 56 साल बाद इस बार सिद्धि, आयुष्मान और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग पड़ा। ऐसे में शादी के लिए 24 घंटे मुहुर्त था। जिलेभर में कई वर-वधुओं ने फेरे लिए। ग्रामीण क्षेत्रों में कई शादियां हुई। उनके लिए यह तिथि यादगार बनी। इधर पर्व पर नाबालिग शादियां न हों, इसके लिए महिला बाल विकास की 5 टीमों ने जिलेभर में पैनी नजर रखी। विभाग को देर-शाम तक कहीं भी नाबालिग जोड़े नहीं मिले। टीम में जिला बाल संरक्षण अधिकारी आनंद पाठक, यशवंत साहू, खिलेश्वरी साहू, वेदवती दरियो और सरोज चवरे शामिल थीं।
शुभ मुहूर्त में की खरीदी: अक्षय तृतीया को खरीददारी के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन कुछ भी खरीदा जाता है, तो उसका क्षय नहीं होता, यानि उसमें कोई कमी नहीं आती। इस दिन को सोने की खरीददारी के लिए सबसे शुभ माना जाता है। अत: बुधवार को शहर के सराफा बाजार में अच्छा कारोबार हुआ।
10 जुलाई के बाद अगले साल होंगी शादियां: छत्तीसगढ़ पंचांग के अनुसार इस साल शादियों का आखिरी मुहूर्त 10 जुलाई तक है। यानि 18 अप्रैल के बाद इस साल शादियों के लिए सिर्फ 15 मुहूर्त ही मिलेंगे। 10 जुलाई के बाद देवशयनी एकादशी से सभी तरह के मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। इसके बाद सीधे 17 जनवरी को शादी का अगला मुहूर्त पड़ेगा। अप्रैल में 19, 26, 27, 29, मई में 11, 12, जून में 19, 20, 21, 22, 23, 25, 29, और जुलाई में 6 व 10 तारीख को शादी के मुहूर्त हैं।
शहर के विभिन्न मोहल्लाें में लोगों ने पारंपरिक तरीके से गुड्डे-गुड़िए की शादी रचाई।