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कविता विमर्श में रेखांकित हुआ असंवैधानिक चुप्पी का दौर

3 वर्ष पहले
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डॉ. विजय पंजवानी के पहले काव्य संग्रह ‘कोई तो निर्भीक होगा यहां’ पर केन्द्रित कविता विमर्श ने बेहद मार्मिक और ठोस स्वर में चुप्पी के असंवैधानिक दौर को रेखांकित करते हुए समकालीन कविताओं का विश्लेषण किया। धमतरी जिला हिन्दी साहित्य समिति द्वारा गत दिवस अजीम प्रेमजी फाउंडेशन सभागृह में अयोजित कविता विमर्श में बिलासपुर, दुर्ग, भिलाई, कांकेर, जगदलपुर, जांजगीर चांपा, रायपुर, धमतरी जिले के कई रचनाकारों सहित प्रबुद्ध पाठकों ने हिस्सा लिया।

सबसे पहले बिलासपुर के वरिष्ठ पत्रकार एवं साहित्यकार सतीश जायसवाल ने कहा कि यह एक डरा हुआ समय है। या तो चुप्पी है या फिर जो बोला जा रहा है, वह सुना नहीं जा रहा। डॉ. विजय पंजवानी ने अपने काव्य संग्रह से ननकू-हलकू, ओ पहाड़ी कस्बे, वासुदेव आदि रचनाओं का पाठ करते हुए चुप्पी के असंवैधानिक दौर से गुजरते समय को रेखांकित किया। गोष्ठी के अध्यक्ष छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार त्रिभुवन पांडे ने कहा कि डॉ. विजय पंजवानी की कविताओं में अचानक ही जैसे प्रवेश होता है और अचानक ही मामला खत्म हो जाता है। जैसे कोई आत्मीय अचानक मिले और गायब हो जाए। उन्होंने कई कविताओं का गहन विश्लेषण कर कवि में अपार संभावना जताई।

जगदलपुर के विजय सिंह ने कहा कि संग्रह में यूं ही शीर्षक से लिखी गई कविताएं, विचार और अंतदृष्टि से भी पृथक हैं। हम विजय पंजवानी के काव्य में कलात्मकता की कमी ढूंढ सकते हैं, लेकिन उनकी कविताएं खारिज नहीं कर सकते। भिलाई के नासिर अहमद सिकंदर ने कहा कि यूं ही ढेर सी रचनाओं से लगता है जैसे कवि ने अपने को कवि मानने से इंकार किया है, लेकिन वे हिन्दी कविता के मौलिक हस्ताक्षर हैं। जांजगीर के सतीष सिंह ने कहा कि कवि मनुष्य के भीतर मासूमियत बचाना चाहता है। यह शुरूआत कमाल की है। डुमनलाल ध्रुव ने कहा कि डॉ. पंजवानी मानवीय आकांक्षओं एवं भावनाओं को खूब समझते हैं और उनकी कद्र करते हैं। दिनेश गौतम, कमलेश्वर साहू दुर्ग, केन्द्रीय विद्यालय के प्राचार्य डॉ. नंदन के अलावा प्रेमजी फाउंडेशन के नवनीत वेदार ने भी विमर्श में भाग लेकर डॉ. विजय की कविताओं में संवेदनशीलता की तारीफ की।

आयोजन

धमतरी जिला हिन्दी साहित्य समिति द्वारा अजीम प्रेमजी फाउंडेशन सभागृह में अयोजित हुआ कविता विमर्श

धमतरी। मंचासीन अतिथिगण।

नाट्य मंचन पर खूब बजी तालियां

शाश्वत उत्सर्ग यूथ थियेटर ग्रुप के आकाशगिरि गोस्वामी के निर्देशन में डॉ. पंजवानी की कविताओं पर आधारित लघुनाटिका का मंचन भी कार्यक्रम में हुआ, जिसे खूब सराहना मिली। कार्यक्रम का संचालन साहित्य समिति की अध्यक्ष डॉ. सरिता दोशी ने किया। इस अवसर पर सन्मुखदास पंजवानी, हर्षद मेहता, रंजीत भट्टाचार्य, गोपाल शर्मा, मदनमोहन खंडेलवाल, आसुदामल जसूजा, जानकी शर्मा, डॉ. वरिंदर नंदा, जितेन्द्र प्रताप सिंग, अभिषेक मानिकपुरी, शिवसिंह भदोरिया, विनोद जैन, पुष्पलता इंगोले, डॉ. रचना मिश्र, रेखा परमार, कामिनी कौशिक समेत अन्य लोग उपस्थित थे।

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