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बरगद के 11 फेरे लगाकर बांधा रक्षासूत्र माताओं के साथ बच्चों ने भी पूजा की

3 वर्ष पहले
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दांपत्य जीवन की निष्ठा व शुचिता का प्रतीक वट सावित्री पर्व शहर समेत कुरूद, नगरी, मगरलोड और भखारा क्षेत्र में मनाया गया। इस मौके पर सुहागिनों ने पति की दीर्घायु की कामना को लेकर वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की और पेड़ के 11 फेरे लगाकर रक्षासूत्र बांधा। इस दौरान बच्चे भी अपनी माताओं के साथ पूजा में शामिल होते नजर आए। कई बच्चे बाल्टी में पानी लेकर दौड़भाग कर रहे थे, तो कई पूजा की थाली पकड़े दिखे।

वट सावित्री पर्व पर स्नान करने के बाद व्रती महिलाओं ने सूर्य देवता को जल अर्पित किया। इसके बाद मंदिर या घर के आसपास के वट वृक्ष के पास महिलाएं एकत्रित हुईं। सभी ने साथ मिलकर वट वृक्ष को रक्षा सूत्र बांधते हुए परिक्रमा की और पति की लंबी आयु की कामना की। महिलाओं ने बरगद के वृक्ष को फल, फूल और जल भी अर्पित किया। सुहागिनों ने प्रत्येक फेरे के दौरान चना, दाल, मूंगफली सहित अन्य सामग्रियों का भोग लगाया। शहर के रमसगरी गार्डन के पास, आमातालाब, जोधापुर वार्ड, सोरिद वार्ड, जालमपुर, विंध्यवासिनी वार्ड समेत ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाएं वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की।

धमतरी. रामसगरी तालाब के पास वट वृक्ष की पूजा करती सुहागिन महिलाएं।

इसलिए करते हैं वट वृक्ष की पूजा

पूजा करने पहुंची महिला नवीता तिवारी, ज्योति कश्यप, प्रियंका कश्यप, श्वेता आदि ने बताया कि अमावस्या में मनाए जाने वाले वट सावित्री पर्व के दौरान वे निर्जला व्रत रखकर पति की दीर्घायु और परिवार की सुख, समृद्धि की कामना करती हैं। इस व्रत का संबंध सत्यवान और सावित्री से है। सावित्री के पति सत्यवान के प्राण लेकर जब यमराज जा रहे थे, तब सावित्री अपने पति के नश्वर शरीर को वट वृक्ष के नीचे रख कर उनके प्राण वापस लाने के लिए यमराज के पीछे चल पड़ीं। सावित्री की प्रार्थना पर यमराज को सत्यवान के प्राण वापस करने पड़े। इसके बाद से ही महिलाएं वट सावित्री का व्रत रखती हैं

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