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स्टाफ नर्स 3 दिनों से हड़ताल पर, प्रशिक्षु छात्राओं के भरोसे है सरकारी अस्पताल

3 वर्ष पहले
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6 सूत्रीय मांगों को लेकर जिला अस्पताल समेत जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में पदस्थ 142 में से करीब 74 नर्स बेमुद्दत हड़ताल पर हैं। हड़ताल को 3 दिन हो चुके हैं। इससे जिला अस्पताल व अन्य शासकीय अस्पतालों में व्यवस्था चरमरा गई है। नर्सिंग की प्रशिक्षु छात्राओं के भरोसे जिला अस्पताल में चिकित्सीय सेवाएं संचालित हो रही है।

छग परिचारिका कर्मचारी कल्याण संघ के आह्वान पर 18 मई से जिला अस्पताल और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों में पदस्थ स्टाफ नर्स मांगों को लेकर बेमुद्दत हड़ताल पर चली गई। हड़ताल का असर जिला अस्पताल में दिख रहा है।

यहां पदस्थ 37 स्टाफ नर्स हड़ताल पर है। परिवीक्षा अवधि में काम करने वाली कुछ स्टाफ नर्स ड्यूटी कर रही है। स्टाफ नर्सों की हड़ताल से जिला अस्पताल में चिकित्सकीय सेवाएं निजी नर्सिंग कॉलेजों की प्रशिक्षु छात्राएं ड्यूटी कर व्यवस्था संभालने में लगी है। प्रशिक्षित स्टाफ नर्सों के नहीं होने से जिला अस्पताल में जरूरतमंद मरीजों को सही सेवा उपलब्ध नहीं हो पा रही है। छात्राएं प्रेक्टिकल के तौर पर सेवाएं दे रही हैं।

सिवििल सर्जन ने कहा- वैकल्पिक व्यवस्था की गई

जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. पीसी ठाकुर ने बताया कि स्टाफ नर्स की हड़ताल से जिला अस्पताल में मरीजों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है, ताकि मरीजों को परेशानी न हो। निजी नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं की ड्यूटी 3 शिफ्ट में लगाई गई है। जिला अस्पताल में 54 स्टाफ नर्स है। 37 हड़ताल पर है। कुछ छुट्टी पर है। परीविक्षावधि वाली ड्यूटी कर रही हैं।

ये हैं प्रमुख मांगें

स्टाफ नर्सों की प्रमुख 6 मांगें है। इनमें समान प्रशिक्षण, समान कार्य और समान वेतन। 4600 ग्रेड पे, ग्रेड टू का दर्जा, समस्त नर्सिंग केडर के वेतनमान में वृद्घि, नर्सिंग एलाउंस छत्तीसगढ़ में प्रारंभ करने, 3-4 इंक्रीमेंट का लाभ समानता से देने, अंतिम नर्सिंग ऑफिसर पद नाम के लिए आदेश देने की मांग शामिल हैं। हड़ताल में शामिल स्टाफ नर्सों ने बताया कि इन प्रमुख मांगों को लेकर पिछले 3 वर्षों से कई बार शासन को ज्ञापन सौंप चुके हैं, लेकिन मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कोई भी मांग पूरी नहीं हुई है। इसलिए बेमुद्दत हड़ताल कर रहे हैं।

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