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जैविक खेती से प्रति एकड़ 800 कम आ रही लागत

3 वर्ष पहले
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कुरूद विकासखंड के ग्राम हथबंद के युवक थनेंद्र साहू ने जैविक खेती अपनाकर कम लागत में ही अधिक आय का जरिया ढूंढ लिया है। जैविक खेती से उन्हें प्रति एकड़ 800 रुपए कम लागत खेती करने में आ रही है। साहू पिछले तीन सालों से साढ़े तीन एकड़ खेत में लगातार सुगंधित धान की खेती जैविक विधि से ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि जैविक खेती के लिए घर पर उपलब्ध सामग्री जैसे गोबर, गोमूत्र, नीम, करंज, धतूरा और कतिपय सामग्रियों का मिश्रण करके कीटनाशी दवा आसानी से तैयार की जा सकती है। साहू को जैविक खेती के लिए वर्ष 2017-18 के लिए राज्य स्तरीय उत्कृष्ट कृषक सम्मान भी दिया गया है।

दूसरे किसान भी हो रहे प्रेरित: थनेंद्र 3 साल से जैविक खेती कर रहे हैं, इससे न सिर्फ गांव के लोग, बल्कि आसपास इलाके के किसान भी प्रभावित होकर जैविक खेती अपना रहे हैं। युवक ने बताया कि खेतों में पेस्टिसाइड के लगातार प्रयोग से मृदा के प्राकृतिक गुणों का ह्रास हो रहा है। इसके चलते मिट्टी कठोर, कमजोर व उसर होती जा रही है। पेस्टिसाइड्स के बार-बार प्रयोग से अब ऐसा हो गया है कि बिना रासायनिक दवाओं और खादों के प्रयोग से फसल लेना असंभव हो गया है।

जैविक खेती रासायनिक खेती से सस्ता: युवक थनेंद्र ने बताया कि उनके पास 11 एकड़ खेत है। खेती कार्य के विभिन्न चरणों में लगभग दो हजार रुपए प्रति एकड़ के पीछे खर्च हो जाते हैं, जबकि जैविक विधि से मात्र 11-12 सौ रुपए में स्वयं के संसाधनों का उपयोग करके इसके लिए घोल आदि तैयार किया जा सकता है।

धमतरी। खेती में नवाचार के लिए राज्य शासन ने करेली छोटी के युवा किसान को पुरस्कृत किया।

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