ग्राम परेवाडीह के टिकेश्वर ध्रुव की दंतेवाड़ा के पास नक्सली हमले में 20 मई को सुबह 11.30 बजे मौत हो गई। टिकेश्वर धमतरी ब्लाक के ग्राम परेवाडीह का ही मूल निवासी था। 2 माह पूर्व प|ी और बच्चे को साथ ले जाकर वह किरंदुल में किराए के मकान में रह रहा था। उसकी एक 4 साल की बेटी नम्रता है। 21 मई को सुबह 9.40 बजे गृहग्राम परेवाडीह में शहीद को अंतिम विदाई दी गई।
शहीद की प|ी तारिणी ने आरती कर पति को अंतिम विदाई दी। तारिणी का रूदन देखकर फफक कर रो पड़ा। फूलों से सजे वाहन में शहीद के पार्थिव शरीर को रखकर गांव में अंतिम यात्रा निकाली गई, जो 11.30 बजे शमशान घाट पर पहुंची। स्कूली छात्र-छात्रा भी अंतिम यात्रा में शामिल थे। देशभक्ति गीत गाते गांव के बुजुर्ग टिकेश्वर ध्रुव अमर रहे के नारे लगा रहे थे। महिला कमांडाे की टीम रास्तेभर फूल बिछा रही थी।
फूलों की वर्षा कर दी विदाई, महिला कमांडो ने रास्तेभर दी पुष्पांजलि
धमतरी. गांव में अंतिम विदाई के समय लोगों ने अग्नि को परंपरानुसार छेने के पांच टुकड़े अर्पित किए। इस दौरान आसपास के गांवों से भी लोग पहुंचे थे।
मां बोलीं- कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी एक दिन नक्सलमुक्त होगा प्रदेश
शहीद टिकेश्वर अपनी प|ी तारिणी और 4 साल की बेटी नम्रता के साथ किरंदुल में ही किराए के मकान में रहता था। प|ी तारिणी को अभी भी भरोसा नहीं हो रहा कि उसके पति हमेशा के लिए छोड़कर चले गए। मासूम नम्रता पापा को आवाज लगाकर रोती- बिलखती रही। शहीद की मां भगवंतीन का कहना है कि बेटे की कुर्बानी व्यर्थ नहीं जाएगी। एक दिन यह प्रदेश नक्सलियों के आतंक से मुक्त होगा।
दोस्तों से किया था वादा- गर्मी की छुट्टी में आऊंगा, अा गई शहादत की खबर
शहीद टिकेश्वर के दोस्त राजेश ध्रुव, राजेश्वर ध्रुव, भुनेश्वर साहू ने बताया कि वे काफी जिंदादिल इंसान थे। बचपन से ही देश सेवा का जुनून था, इसलिए उसने पुलिस की नौकरी ज्वाइन की। 2 महीने पहले वह जब घर आया था, तब साथ में काफी मौज-मस्ती की थी। उसने वादा किया था कि गर्मी की छुट्टी में फिर आऊंगा। जब उसकी शहादत की खबर मिली, तो यकीन नहीं हुआ।
2007 में फोर्स में शामिल तमन्ना थी बेटी डॉक्टर बने
शहीद आरक्षक क्रमांक 186 टिकेश्वर का जन्म परेवाडीह में 16 फरवरी 1982 को हुआ। वे बीसीएस पीजी काॅलेज धमतरी में बीए किया। 12 जून 2007 को वे सीएफ में आरक्षक के पद पर पदस्थ हुए और पहली पोस्टिंग दंतेवाड़ा जिले के किस्टाराम थाने में हुई। इसके बाद कटेकल्याण और वर्तमान में किरंदुल में पदस्थ थे। उसका सपना था कि अपनी बेटी नम्रता को वह डाॅक्टर बनाएगा।
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घटना के 3 घंटे पहले प|ी के हाथ से बुझ गया था दीया, अनहोनी की शंका के बीच आ गई पति के मौत की खबर
धमतरी। घर से शहीद टिकेश्वर की अर्थी उठी तो प|ी तारिणी दहाड़ मारकर रो पड़ी, जिससे पूरे गांव वालों की आंखों से आंसू छलक आए। अंतिम यात्रा में शामिल सैकड़ों लोग बिलखते रहे। फोटो एवं कटेंट: अजय देवांगन
प|ी ने 5 फोन किए, छठवीं बार स्विच अॉफ मिला
प|ी को घटना का अाभास पहले ही हो गया था। 20 मई को सुबह 9 बजे रोज की तरह उसने भगवान के समक्ष दीप जलाकर पूजा अर्चना की। आधे घंटे बाद देखा, तो दीप बुझ चुका था। अत: उसे कुछ अनहोनी की आशंका सताने लगी थी। कुछ देर बाद घर से बाहर निकली, तो किरंदुल रोड पर नक्सली-पुलिस मुठभेड़ की चर्चा हो रही थी। उसने तत्काल टिकेश्वर को मोबाइल पर कॉल किया, पर कोई रिस्पांस नहीं मिला। लगातार 5 कॉल करने के बाद भी फोन नहीं उठा और 6वीं बार कॉल करने पर मोबाइल स्वीच अाफ मिला। दोपहर 12 बजे पुलिस अधिकारी घर पहुंचे और टिकेश्वर के शहीद होने की सूचना दी, तब तारिणी गश खाकर गिर पड़ी।
प|ी तारिणी ने आरती उतारी, इसके बाद उसके साथ पूरा गांव रो पड़ा।