सांकरा को मिलेगा पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार
नगरी ब्लाक के ग्राम पंचायत सांकरा का चयन दीनदयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार के लिए हुआ है। 10 हजार की जनसंख्या वाले ग्राम सांकरा में 20 वार्ड हैं। गांव में होने वाले विकास कार्यों सहित अन्य छोटे बड़े कार्यों के लिए पंचायत प्रतिनिधियों के अलावा ग्रामीणों से भी राय ली जाती है। यही नहीं, कार्ययोजना बनाने के बाद उसे पूरा करने में भी सबका सहयोग रहता है। खास बात यह है कि सांकरा में 3-4 वर्ष पूर्व सिर्फ ढाई लाख रुपए की ही वार्षिक टैक्स वसूली होती थी, अब इस गांव से वर्ष में 20 से 25 लाख रुपए की वसूली हो रही है। टैक्स वसूली के कारण छोटे-मोटे कार्यों के लिए पंचायत को भी सुविधा हो जाती है। सरपंच शक्ति मरकाम, सचिव मदन सेन ने कहा कि सांकरा सहित जिले के लिए यह पुरस्कार गौरव की बात है। यह सब ग्रामीणों, पंचाें के आपसी समन्वय से संभव हो सका है।
कमार बच्चों को नि:शुल्क ड्रेस
सांकरा आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है। कमार बच्चे स्कूल में मिलने वाली ड्रेस को जल्द फाड़ देते थे और ड्रेस फटने के बाद सिविल ड्रेस में ही स्कूल पहुंचते थे। इस स्थिति को देख पंचायत द्वारा हर साल 15 अगस्त, 26 जनवरी को पढ़ने वाले सभी कमार बच्चों को एक-एक जोड़ी ड्रेस वितरण किया जाता है।
छत्तीसगढ़ से 5 पंचायतों का चयन, इनमें सांकरा भी
छत्तीसगढ़ से 5 पंचायतों काे इस पुरस्कार के लिए चुना गया है, जिनमें धमतरी जिले का सांकरा भी शामिल है। 24 अप्रैल को जबलपुर में आयोजित समारोह में यहां की सरपंच शक्ति मरकाम यह पुरस्कार ग्रहण करेंगी। धमतरी के सांकरा के अलावा सूरजपुर जिले के सिलफिल्ली, कोरिया जिले के गढ़तार, घरौंदा तथा बलरामपुर जिले का जामवंतपुर पंचायत का चयन इस पुरस्कार के लिए हुआ है।
पहले ढाई लाख टैक्स वसूली होती थी, अब 25 लाख
दिल्ली की टीम को ग्रामीणों ने कहा- अच्छी है हमारी सरपंच
पुरस्कार के लिए चयन के पूर्व मार्च में दिल्ली से टीम पहुंची थी। गांव में हुए विकास कार्य, टैक्स वसूली सहित सरपंच की गतिविधियों की भी जानकारी टीम ने ली और ग्रामीणों से सरपंच की कार्यशैली को लेकर सवाल पूछा। ग्रामीणों ने कहा- अच्छी है हमारी सरपंच, सब मिलकर गांव में काम कर रहे हैं।
कुपोषित बच्चों को दूध-केला, गैस पर पकता है भोजन
सांकरा में 8 आंगनबाड़ी केन्द्र हैं। इनमें से 2 मॉडल आंगनबाड़ी हैं। यहां पंचायत द्वारा कुपोषित बच्चों को रोजाना दूध, केला दिया जाता है, साथ ही बच्चों का भोजन आदि गैस चूल्हे पर बनता है। इसी तरह प्रायमरी, मिडिल स्कूल में भी मिड ले मील गैस चूल्हे पर बनता है। गांव में 120 पीएम आवास का निर्माण हो चुका है। 80 लाख की लागत से घर-घर शौचालय निर्माण कराया गया। इसके अलावा नाली निर्माण सहित अन्य सुविधाओं के लिए गांव में कई कार्य हुए हैं।