पालक नहीं, परीक्षा से वंचित बच्चे-भाई ने मांगी प्रशासन से मदद
नगरी ब्लाक के बेलरगांव निवासी भाई-बहन संतकुमार नेताम (19), संतोषी नेताम (16), सुरेन्द्र नेताम (13) बेसहारा हो गए हैं। 5 वर्ष पहले सांप के डसने से पिता तिहारूराम चल बसे। 14 दिन पहले मां शारदा बाई की बीमारी के चलते मौत हो गई। पिता की छोटी झोपड़ी थी, वह भी जर्जर होकर भसक गई, तब बेसहारा बच्चों ने अपने बड़े पिता मिलऊराम के घर में आश्रय तो ले लिया, पर वे भी मजदूरी कर परिवार चलाते हैं।
2 अप्रैल को बच्चों की मां शारदा बाई की मौत हो गई। इस कारण 8वीं में पढ़ रही संतोषी और 6वीं में पढ़ रहा सुरेन्द्र इस साल परीक्षा भी नहीं दे सके। दोनों आगे पढ़ना चाहते हैं। सोमवार को तीनों भाई-बहन जनपद सदस्य हेमलता प्रजापति के साथ प्रशासन से मदद की गुहार लगाने पहुंचे। खुद की स्थिति और गुजर-बसर की समस्या भाई-बहनों ने कलेक्टर डॉ. सीआर प्रसन्ना को बताई। बड़े भाई संतोष नेताम ने कलेक्टर से पीएम आवास, छोटे भाई-बहनों को आदिवासी छात्रावास में प्रवेश दिलाने के साथ ही अार्थिक मदद भी मांगी।
धमतरी. जनपद सदस्य हेमलता के साथ बेसहारा बच्चों ने कलेक्टर से मिल गुहार लगाई।
भाई-बहन को पढ़ाना चाहता है
संत कुमार ने कहा कि वह अपनी छोटी बहन संतोषी और छोटे भाई सुरेन्द्र को पढ़ा-लिखाकर काबिल बनाना चाहता है। जब वह 7वीं में था, तब पिता की मौत हो गई, इसी समय उसने स्कूल जाना छोड़ दिया था। वर्तमान में संतकुमार मजदूरी कर रहा है। वह चाहता है कि उसके छोटे भाई-बहन कुछ पढ़-लिख लें, ताे उन्हें अच्छा काम भी मिल जाएगा। मेरी तरह मजदूरी के लिए उन्हें भटकना नहीं पड़ेगा।
संतोषी, सुरेन्द्र छात्रावास में रहेंगे
कलेक्टर डॉ. सीआर प्रसन्ना ने बताया कि संतोषी और सुरेन्द्र गट्टासिल्ली छात्रावास में रहेंगे। उन्हें यहां एडमिशन दिलाया जाएगा। बड़े भाई संतकुमार को भी छात्रावास में डेलीवेजेस पर किसी काम पर रखने के लिए कहा गया है। काम पर रखने के पूर्व संत कुमार के उम्र का परीक्षण होगा कि वह 18 साल का हुआ है या नहीं।