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रिहायशी क्षेत्रों में लगातार घुस रहे जंगली सूअर, हो चुकी है मौत भी

3 वर्ष पहले
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धमतरी| मगरलोड और कुरुद ब्लाक के करीब 35 गांवों में लोग जंगली सूअर के आतंक से त्रस्त हैं। ये पानी की तलाश में रिहायशी इलाके का रुखकर ग्रामीणों पर हमला कर रहे हैं। माहभर के भीतर कई ग्रामीण इनके हमले से घायल हो गए हैं। बीते 11 अप्रैल को बकरी चराने गई 65 साल की महिला पर जंगली सूअर ने हमला कर दिया, जिससे उसकी मौत हो गई।

क्षेत्र के ग्रामीण कई बार जिला प्रशासन से जंगली सुअरों को खदेड़ने की फरियाद कर चुके हैं। इसके बावजूद प्रशासन और वन विभाग कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। ग्रामीण गोपालन पटेल, बंशीलाल ध्रुव, भगवतीराम साहू, गैंदराम पटेल, धर्मेन्द्र साहू ने बताया कि कुरुद और मगरलोड ब्लाक के करीब 35 गांवों में जंगली सुअरों की दहशत है। यह समस्या पिछले 3-4 सालों से बनी हुई है। गर्मी में मार्च के अंतिम पखवाड़े से जून तक सबसे ज्यादा आतंक रहता है, क्योंकि जंगल में पानी नहीं मिलने से जानवर रिहायशी क्षेत्रों का रुखकर ग्रामीणों पर हमला करते हैं।

इन गांवों में ज्यादा दहशत: कुरुद, मगरलोड क्षेत्र के राजपुर, कुंडेल, बेलौदी, बोरसी, सरगी, डुमरपानी, कपालफोड़ी, करेली, लड़ेर, सिहाद, चोरभट्ठी, भुसरेंगा, डाही, भुसड़ी, थूहा, कोकड़ी, कातलबोड़, मोंगरागहन, बोदाछापर, देवरी समेत आसपास के गांवों में जंगली सुअरों का ज्यादा आतंक है। इन गांवों में रात 8 बजे के बाद लोग अकेले निकलने से घबराने लगे हैं। दहशत में कई घरों के दरवाजे भी बंद हो जाते हैं। क्षेत्र के ग्रामीणों ने कई बार कलेक्टोरेट पहुंचकर जंगली सुअरों को खदेड़ने की गुहार लगाई है, लेकिन आज तक प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया।

पानी तलाशते पहुंच जाते हैं
डीएफओ अमिताभ वाजयेपी ने कहा कि गर्मी के समय पानी की तलाश में भटककर जंगली सूअर रिहायशी क्षेत्रों में घुस जाते हैं, पर अधिकांश हमलें जंगल में ही हुए हैं। गर्मी के मद्देनजर जंगल के डबरी, तालाब में पानी की व्यवस्था की गई है। जंगली सूअरके हमले का यदि कोई शिकार होता है, तो उन्हें तत्काल विभाग की ओर से आर्थिक मदद की जाती है। सुअरों को खदेड़ने के लिए जल्द ही कोई बड़ा एक्शन लिया जाएगा।

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