एसएसएलएनटी अस्पताल में इंसीनरेटर नहीं रख-रखाव के लिए मिल रहे हैं लाखों रुपए
श्री श्री लक्ष्मी नारायण ट्रस्ट सरकारी अस्पताल। इस अस्पताल में बायो मेडिकल वेस्ट के डिस्पोजल के लिए इंसीनरेटर नहीं है। पाटलीपुत्र मेडिकल कॉलेज व अस्पताल का इंसीनरेटर वर्षों से खराब है। लेकिन इन दोनों ही अस्पतालों में इंसीनरेटर के रख-रखाव पर लाखों रुपए खर्च हो रहें हैं। स्वास्थ्य विभाग झारखंड सरकार की ओर से इन अस्पतालों को समय-समय पर इंसीनरेटर के मेंटेनेंस के लिए लाखों रुपए आवंटित किया जा रहा है। सवाल उठता है कि एक अस्पताल जहां इंसीनरेटर है ही नहीं और दूसरे का इंसीनरेटर वर्षों से बेकार पड़ा है तो सरकार से मेंटेनेंस के लिए दी जा रही राशि कहां खर्च हो रहा है? मामले में दोनों ही अस्पताल प्रबंधन से सवाल किया गया तो जवाब गोल-मोल था।
राशि कहां खर्च हो रही, इस सवाल पर अस्पताल प्रबंधन का गोल-मोल जवाब
एक माह में दोनों अस्पतालों को मिले दो-दो लाख
स्वास्थ्य चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग झारखंड सरकार की ओर से 20 फरवरी को जारी आवंटन आदेश में पीएमसीएच को जेनरेटर व इंसीनरेटर मद में दो लाख रुपए आवंटित किया गया। ठीक इसी प्रकार एसएसएलएनटी अस्पताल जहां न तो जेनरेटर है और ना ही इंसीनरेटर है उसे 19 मार्च को जारी आवंटन आदेश के माध्यम से दो लाख रुपए आवंटित किया गया। यह पहली बार नहीं है जब अस्पतालों को इंसीनरेटर के रख-रखाव के लिए विभाग की ओर से राशि दी गई है। पहले भी इससे अधिक राशि आवंटित की जा चुकी है।
अस्पताल परिसर में जला देते हैं वेस्ट
इंसीनरेटर नहीं रहने के कारण पीएमसीएच से निकलने वाला बायो मेडिकल वेस्ट व म्यूनिसपल वेस्ट अस्पताल परिसर में ही डिस्पोज कर दिया जाता है। डिस्पोजल का तरीका भी बिल्कुल अनोखा है। कचरे को स्टूडेंट हॉस्टल के पास ग्राउंड में फेंकने के बाद उसमें आग लगा दी जाती है। वहीं अस्पताल परिसर में हफ्तों कचरे का पहाड़ जमा रहता है। अस्पताल से निकलने वाले कचरे को डिस्पोज करने की जिम्मेवारी सफाई एजेंसी को दे दी गई है। लेकिन विवादों के कारण एजेंसी ने अधीक्षक को पत्र लिखकर स्पष्ट कहा गया है कि यह काम उनका नहीं है और वह कचरे का डिस्पोजल करने में असमर्थ है।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष : सएसएलएनटी अस्पताल के अधीक्षक डॉ जीतेश रंजन कहते हैं कि इंसीनरेटर के मेंटेनेंस के लिए उन्हें कोई आवंटन नहीं मिलता। उनके यहां इंसीनरेटर है भी नहीं। वहीं पीएमसीएच अधीक्षक डॉ सिद्धार्थ सान्याल का कहना है कि जेनरेटर के ईंधन के लिए तो राशि आवंटित होती है लेकिन इंसीनरेटर के लिए पैसा मिलने की जानकारी उन्हें नहीं है। इस मद में आवंटन प्राप्त भी होता होगा तो नियमानुसार वह राशि वापस कर दी जाती है।