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जेईई मेन एग्जाम के बाद निजी कॉलेजों में दाखिले के लिए सक्रिय हुईं प्लेसमेंट एजेंसियां

3 वर्ष पहले
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धनबाद. पिछले साल सर्किट हाउस के टी भास्कर ने एक कन्सल्टेंसी के संचालक पर वेल्लोर इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (वीआईटी) में दाखिला कराने के नाम पर धोखाधड़ी करने को लेकर प्राथमिकी दर्ज करायी थी। हर साल पुलिस में ऐसे मामले आते हैं। अब जब जेईई मेन की परीक्षा हो गई है और उसका रिजल्ट आने वाला है तो एक बार फिर ऐसी प्लेसमेंट एजेंसियां पैरेंट्स पर डोरे डालना शुरू कर दी है। प्राइवेट कॉलेजों में दाखिला कराने के लिए ये एजेंसियां पैरेंट्स से मोटी रकम वसूलते हैं। कई एजेंसियां इन इंजीनियरिंग कॉलेजों से सीधे संपर्क होने का दावा करते हैं। ऐसे में पैरेंट्स को इन एजेंसियों से सतर्क रहना बेहद जरूरी है। वीआईटी ने आधिकारिक तौर पर जमशेदपुर समेत झारखंड के दूसरे पैरेंट्स से अपील की है कि वे ऐसे एजेंट्स और कन्सल्टेंसी से दूर रहें। वीआईटी के खालिद ने कहा- झारखंड में फर्जी तौर पर वीआईटी के नाम पर संस्था चल रही है। पैरेंट्स इसे असली वीआईटी समझकर झांसे में आ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वीआईटी में दाखिला विशुद्ध तौर पर दाखिला परीक्षा के आधार पर होता है। इसके लिए वीआईटी किसी तरह का कैपिटेशन फीस नहीं लेता। उन्होंने यह भी साफ किया कि संस्थान में कोई मैनेजमेंट कोटा नहीं होता। ऐसे में वीआईटी के नाम पर फर्जी वेबसाइट चलाने वालों से सतर्क रहें।

सरकारी कॉलेजों को तवज्जो दें
देश के 23 आईआईटी, 31 एनआईटी, 23 ट्रिपलआईटी और 20 सरकारी सहायता प्राप्त केन्द्रीय संस्थानों में दाखिला ज्वाइंट सीट एलोकेशन ऑथोरिटी (जोसा) के तहत होता है। कोशिश करें कि जोसा के तहत ही कॉलेजों में दाखिला लें। अगर इन संस्थानों में दाखिला नहीं मिल रहा हो तो फिर राज्य सरकार के सरकारी कॉलेजों को तव्वजो दें। इसमें दाखिला उस राज्य की इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा के आधार पर होता है। राज्य सरकार की ओर से इन कॉलेजों में दाखिला के लिए काउंसलिंग होती है। अंतिम विकल्प प्राइवेट कॉलेजों को रखें, लेकिन इसका चुनाव बेहद सतर्कता से करें। जिस कॉलेज में दाखिला लेना हो, उसकी पूरी तरह छानबीन कर लें। इन कॉलेजों की सत्यता का पता खुद करें। कई बार एजेंसियां मार्गदर्शन के नाम पर भी फांसती है।

ऐसे फांसते हैं ये एजेंट्स

शहर में इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला को लेकर प्लेसमेंट एजेंसी और कन्सल्टेंसी सक्रिय है। जिन विद्यार्थियों का दाखिला प्रवेश परीक्षा के जरिए नहीं हो पाता है, उन्हें ये एजेंसी देश के अव्वल इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिला का भरोसा दिलाती है। सीधे-साधे पैरेंट्स इनकी जाल में फंस जाते है। वे शुरू में तीन लाख से लेकर पांच लाख तक की राशि ले लेते हैं। इन एजेंट्स का कनेक्शन ऐसे इंजीनियरिंग कॉलेजों से होता है, जो निम्न दर्जे के होते हैं। इन कॉलेजों में दाखिला लेने के बाद इन्हें पता चलता है कि उनके साथ धोखाधड़ी की गई है।

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