ऐ दोस्त! जवानी की रईसी को बहुत रुलाती है बचपन की फकीरी...
अरे... तुम अब भी वैसी ही शायरी लिखते हो क्या? यार... स्कूल में तो हम सभी तुम्हारी शायरी के कायल थे। अब तो तू बड़ा आदमी हो गया है...। बड़ा घर में रहता है। महंगी गाड़ी में चलता है... बचपन की शायरी तुझे याद भी होगी या नहीं? अब तू कुछ लिखता भी है या नहीं...? भाभी जी लिखने तो देती हैं न...? दोस्त ने दोस्त के इस सवाल का जवाब कुछ यूं दिया... ‘ए दोस्त... सबकुछ पा लिया, एक तुझे खोकर... देख! जवानी की इस रईसी को बचपन की फकीरी बहुत रुलाती है...।’ माहौल में वाह-वाह होने लगी और महफिल तालियां से गूंज उठी...। मौका था... आईएसएल सरायढेला की पहली एलुम्नी मीट का, जहां 1991 बैच के छात्र-छात्राएं यह शाम अपनों के नाम करने आए थे। सालों बाद जब दोस्त एक-दूसरे से मिले, तो गीत-संगीत का दौर चल पड़ा। सब खूब नाचे। धमाल मच गया। बरसों पुरानी भूली-बिसरी यादों ने कई रंग दिखाए। बचपन की शरारतों का जिक्र कर दोस्त खूब हंसे, तो बिछड़े दोस्त की याद में पलकें आंसुओं से भीगी भी...। बचपन के वे पल आंखों के सामने थे। रात 9 बजे तक दोस्तों की महफिल जवां रही। इस दौरान उन्होंने कभी एक-दूसरे की खिंचाई की, तो कभी एक-दूसरे को गले लगाया। पुरानी शरारतों पर एक-दूसरे को सॉरी भी बोला। भविष्य में मिलते रहेंगे... ऐसे वादे भी किए। साथ नाचे और साथ में खाना भी खाया। अपनी-अपनी प|ियों से एक-दूसरे को मिलाया, तो मजाक का एक दौर ही चल पड़ा। कार्यक्रम के दौरान मुख्य रूप से आईएसएल सरायढेला के पूर्व प्राचार्य एएल दास, मौजूदा प्राचार्य तहसीन अहमद, आईएसएल भूली के प्राचार्य शैलेंद्र सिंह, डीएवी मुगमा के प्राचार्य संजय सिंह, डीएवी सिंदरी के प्राचार्य आशुतोष और शिक्षिका निक्की श्वेता आदि मौजूद थे। मंच संचालन रश्मि वर्मा और अनुराग सेठ ने किया।
उन नामों से बुलाया, जो स्कूलों में रखा था
कार्यक्रम बढ़ता गया और महफिल का माहौल खुशनुमा होता गया। जैसे-जैसे 1991 का बैच जुटता गया, कार्यक्रम में रंगत आती गई। इस दौरान दोस्तों ने एक-दूसरे को उन नामों से भी बुलाया, जो उन्होंने स्कूल में पढ़ने के दौरान रखे थे। प|ियों से दोस्तों की मुलाकात कराई, तो अंदाज देखने लायक था। हंसी-ठहाके गूंजते रहे। कार्यक्रम में 1991 बैच के छात्र दीपक मोदी, संजीव, अनिल अग्रवाल, रफीक, संजय महतो, मानव प्रेम, मुरारी, अनुराग, अमित, मृत्युंजय, विवेक, महुआ, रितु, काकोली, रश्मि, विशाल, सरोज, नि्तेश, राजेश, राकेश पाठक, राज कुमार, प्रवीर कुमार सिन्हा, सचिन पाठक आदि शामिल हुए।
... जब गुरु सामने आए, तो सम्मान में झुके सिर
कार्यक्रम में जुटे 1991 बैच के तमाम विद्यार्थी उस समय एक साथ खड़े हो गए, जब उनकी नजरें सरायढेला आईएसएल के पूर्व प्राचार्य एएल दास पर पड़ी। अपने गुरु को सामने देख सब उनकी ओर एक साथ बढ़े। गुरु के सम्मान में झुक गए। गुरु ने भी उनका सम्मान स्वीकार किया। गुरु ने किसी को गले लगाया, तो किसी की पीठ थपथपाई। एक-एक कर उन्होंने अपने सभी शिष्यों का हाल जाना। शिष्यों की सफलता पर गुरु नाज करते नजर आए।
आईएसएल सरायढेला की पहली एलुम्नी मीट में अपने स्कूल के दिनों की यादों को ताजा करने के लिए जुटे साल 1991 बैच के छात्र-छात्राएं।