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जिन्होंने कभी पढ़ाया ही नहीं, उन्हें डीएलएड करा रहे निजी स्कूल

3 वर्ष पहले
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जो स्कूल में वर्षों से पढ़ा रहे थे, उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया और जिसने भी पैसे दिए, उसे बिना एक दिन की कक्षा के शिक्षक घोषित कर दिया। यह निजी स्कूलों में एनआईओएस से डीएलएड के नाम पर हुआ है। नेहरू एकेडमी, नदखुरकी बाघमारा के शिक्षकों ने अपने स्कूल प्रबंधन पर ऐसे ही आरोप लगाते हुए डीएसई विनीत कुमार से शिकायत की है। साथ ही मामले न्यायिक जांच की मांग की है। शिक्षकों का कहना है कि जब डीएलएड के लिए एसएसए, धनबाद ने स्कूल के अप्रशिक्षित शिक्षकों का नाम मांगा तो स्कूल प्रबंधन ने अपना रेट तय कर दिया। कह दिया गया कि चाहे स्कूल के शिक्षक हों या बाहर का कोई भी। 60 हजार रुपये दें और एनआईओएस से डीएलएड कर लें। पैसे देने पर ही उनके नाम बतौर शिक्षक भेजे जाएंगे। शिक्षकों ने यह भी कहा है कि उन्होंने इससे पहले चार मार्च को भी शिकायत की थी, लेकिन मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

डीएसई से शिकायत में यह आरोप :

शिक्षक सूर्यदेव प्रसाद का कहना है कि वे 1995 से स्कूल में थे और वर्ष 2005 में उन्हें प्रधान शिक्षक भी बनाया गया था। एनआईओएस से डीएलएड के लिए एसएसए, धनबाद ने स्कूल के अप्रशिक्षित शिक्षकों का नाम मांगा था। इसके बाद हमसे 60 हजार रुपये मांगे गए। हमने जब पैसे देने से इंकार कर दिया तो स्कूल प्रबंधन ने हमारा नाम नहीं भेजा गया। यह रकम शिक्षक रामप्रिय राम, किरण देवी आदि से भी मांगे गए थे और वे भी पैसे नहीं दे सके। दूसरी ओर 60-60 हजार से भी अधिक रुपये लेकर बाहर के लोगों के लोगों के नाम बतौर शिक्षक एसएसए को भेज दिए गए। इस तरह हम डीएलएड प्रशिक्षण से वंचित कर दिए गए। खुद स्कूल संचालक भरत लाल पांडेय भी डीएलएड कर रहे हैं। शिकायत पत्र की प्रतिलिपि उपायुक्त को भी भेजी गई है।

अचानक बढ़ गए अप्रशिक्षित शिक्षक :

जिले में अप्रशिक्षित शिक्षकों की संख्या 809 थी। इनमें सरकारी स्कूलों में 162, सहायता प्राप्त निजी स्कूलों में 9 और निजी स्कूलों में 638 शिक्षक थे। जैसे ही एनआईओएस से डीएलएड का पंजीयन शुरू हुआ, अचानक संख्या बढ़कर 5057 हो गई। निजी स्कूलों में जितने शिक्षक नहीं थे, उससे अधिक नाम एनआईओएस को भेजे गए।

क्यों जरूरी है डीएलएड

डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) का प्रशिक्षण निजी और सरकारी दोनों स्कूलों के शिक्षकों के लिए जरूरी कर दिया गया है। अप्रशिक्षित शिक्षकों को 31 मार्च 2019 तक प्रशिक्षण पूरा करना है। इस तिथि तक प्रशिक्षण पूरा नहीं करने पर शिक्षकों की सेवा स्वत: समाप्त हो जाएगी। इसलिए सरकार ने अप्रशिक्षित शिक्षकों को एनआईओएस से प्रशिक्षण दिलाना शुरू किया है। धनबाद में 5057 का पंजीयन कराया गया है और उनके प्रशिक्षण के लिए 50 केंद्र बनाए गए हैं। निजी कॉलेजों से डीएलएड में डेढ़ लाख रुपए तक खर्च होते हैं। एनआईओएस से कम खर्च में डीएलएड के लिए निजी स्कूलों ने चालबाजी की।

आरोप लगानेवाले छोड़ चुके हैं स्कूल

आरोप लगाने वाले शिक्षक स्कूल छोड़ चुके हैं, फिर भी डीएलएड के लिए कहा गया था। उन्होंने ही मना कर दिया। 60-60 हजार रुपए मांगने के आरोप गलत हैं। चूंकि स्कूल चलाना था और मार्च 2019 के बाद अप्रशिक्षित शिक्षक नहीं पढ़ा सकते हैं, इसलिए दूसरे शिक्षकों के नाम भेजे गए।’’ - भरत लाल पांडेय, प्राचार्य

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