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आरक्षण और शरियत से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं

3 वर्ष पहले
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इमारत-ए- शरिया की ओर से आयोजित दीन बचाओ- देश बचाओ सम्मेलन में नई दोस्ती का नया पैगाम दिया गया। उलेमाओं ने दो टूक कहा कि मुस्लिम व अल्पसंख्यकों के पर्सनल लॉ के साथ ही एससी-एसटी के आरक्षण में छेड़छाड़ कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे। पहली बार दलित-मुस्लिम एकता की पुरजोर वकालत की गई। रविवार को गांधी मैदान में हुए इस सम्मेलन में लाखों लोग शामिल हुए। सभी वक्ताओं ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर जमकर निशाना साधा। दस प्रस्ताव भी पारित किए गए। लोगों ने इन प्रस्तावों का हाथ उठाकर समर्थन किया।

मौलाना वली रहमानी बोले-हम देश बचाना चाहते हैं, सुप्रीम कोर्ट

भी दबाव में है, लोगों के मौलिक अधिकार भी खत्म किए जा रहे हैं

सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए इमारत-ए- शरिया के अमीर-शरियत व ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव हजरत मौलाना सैयद वली रहमानी ने कहा कि हम शरियत को बचाने की क्षमता रखते हैं। देश को बनाना चाहते हैं पर देश की हालत इन दिनों ठीक नहीं है। हालत यह है कि संविधान में दिए गए मूल अधिकारों को समाप्त करने की कोशिश की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट को भी प्रभावित किया जा रहा है। इस वजह से ही सुप्रीम कोर्ट के चार जजों को जनता की अदालत में आने को मजबूर होना पड़ा। जब सुप्रीम कोर्ट ने एसी-एसटी एक्ट पर फैसला सुनाया तो लोग सड़क पर आ गए। नतीजा यह हुआ कि केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट जाना पड़ा। मौलाना रहमानी ने कहा कि मुसलमान जिंदा कौम है। शरियत की हिफाजत के लिए कई बार सबूत दिए हैं। सामान आचार संहिता के विरोध में करीब पांच करोड़ लोगों ने हस्ताक्षर कर केंद्र सरकार को भेजा। शरियत की सुरक्षा के लिए देशभर की करीब डेढ़ करोड़ मुस्लिम महिलाएं सड़क पर उतर गईं।

बिहार

, धनबाद, सोमवार, 16 अप्रैल, 2018

दस प्रस्ताव भी पारित हुए

1. मुस्लिम महिला सुरक्षा के नाम पर मुस्लिम वीमेंस (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरेज) बिल 2017 वापस हो।

2. सभी को धार्मिक आजादी मिले।

3. महिलाओं की सुरक्षा हो।

4. स्वतंत्र न्याय प्रणाली लोकतंत्र की बुनियाद है। इसे बहाल रखा जाए।

5. दलितों व मुस्लिमों पर जुल्म बंद हो।

6. सांप्रदायिक व जातीय दंगे पर रोक लगे।

7. सभी धर्मों के धार्मिक स्थलों व शैक्षिक संस्थानों की सुरक्षा हो।

8. उर्दू भाषा की सुरक्षा हो। बच्चों को शिक्षा व प्रशिक्षण दिया जाए।

9. इस्लामिक देशों म्यांमार, सीरिया, फिलिस्तीन में नस्लकुशी बंद हो।

10. भीड़ द्वारा हिंसा पर पूरी तरह से रोक लगे।

बिहार समेत 4 राज्यों की मुसलमानों की सबसे बड़ी संस्था इमारत-ए-शरिया के

क्या है इमारत-ए-शरिया

इमारत-ए- शरिया बिहार, झारखंड, ओडिशा व बंगाल के मुसलमानों की सबसे बड़ी संस्था है। इसकी स्थापना मौलाना अबुल कलाम आजाद और मौलाना सज्जाद ने 1921 में की थी। इस संस्था का मुख्य मकसद सामाजिक सुधार, कल्याणकारी काम, शिक्षा का प्रचार व प्रसार करना। शरियत के आधार पर फैसला देना। इस्लाम धर्म के बारे में लोगों को बताना। गरीबों की मदद करना। आपदा के समय पीड़ितों की सहायता करना।

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