तोपचांची में जनप्रतिनिधियों के बैठक के लिए बनाए गए पीआरसी भवन जर्जर होते जा रही है। देख-रेख के अभाव में जहां भवन के खिड़कियों के सारे शीशे टूट गए है। वहीं अंदर में सिर्फ गंदगी ही गंदगी रहती है। ऐसा लगता है जैसे वर्षों से इसकी सफाई नहीं हुई हो। पंचायत प्रतिनिधि इसी गंदगी के बीच मेंं आकर बैठक में भाग लेते हैं। लाखों रुपए की लागत से पीआरसी भवन का निर्माण कराया गया। इसमें नीचे में बड़ा सा हॉल है इसकी भी सफाई शायद ही कभी होती है। वहीं उपर में पंचायत प्रतिनिधियों के लिए कमरे बने हुए है। लेकिन यहां भी सीढिय़ों से लेकर कमरे तक गंदगी का अंबार रहता है। वहीं भवन में जितने भी शीशे लगे हुए वह टूट चुके हैं और इसी वजह से भवन के अंदर तक गंदगी प्रवेश करते रहता है। यदि शीशे लगा दिए जाए तो शायद गंदगी कम हो। वहीं हर जगह मकड़े के जाले लगे हुए है इसकी भी सफाई नहीं हुई है।
गंदा पानी पीने को विवश हैं जनप्रतिनिधि : बैठक के दौरान प्रखंड कार्यालय की ओर से एक वाटर फिल्टर लगाया जाता है। इसी फिल्टर से जनप्रतिनिधियों को पीने का पानी दिया जाता है। लेकिन गुरुवार को जब इस फिल्टर की जांच की गई तो देखा गया कि इसमें हरा-हरा फफूंद लगा हुआ है। अंदर में भी गंदगी है। इस तरह के पानी पीने का मतलब बीमारी का आमंत्रण देना है।
भाजपा प्रखंड अध्यक्ष ने उठाया सफाई का मुद्दा : प्रखंड अध्यक्ष खिरोधर मंडल ने गंदगी देख कर कहा कि जब भी बैठक हो पहले यह तय हो जाए कि यहां सफाई हुई है या नहीं। यदि सफाई नहीं हुई है तो बैठक ना ही हो तो अच्छा है। क्योंकि एक ओर हमलोग नारे दे रहे स्वच्छ भारत का और जहां बैठक करते हैं वहीं पर इस तरह की गंदगी रहे तो जनता के बीच क्या मैसेज जाएगा। फफूंद लगे वाटर फिल्टर के बारे में कहा कि इससे तो हमलोग बीमार हो जाएंगें।