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न शिक्षक, न उपस्कर, बांट रहे सर्टिफिकेट

3 वर्ष पहले
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जिले में चार निजी आईटीआई ऐसे हैं, जहां न शिक्षक हैं और न ही उपस्कर। वहां बिना पढ़ाई कराए ही पैसे लेकर सर्टिफिकेट बांटे जाते हैं। अगर एक साथ इन चारों संस्थानों की जांच की जाए, तो सच्चाई सामने आ जाएगी। पता चल जाएगा कि बिना उपस्करों और शिक्षकों के कैसे इन आईटीआई का संचालन किया जा रहा है। प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर धनबाद के विद्यार्थियों ने मामले की जांच करने का आग्रह किया है। विद्यार्थियों ने पत्र में लिखा है कि इन संस्थानों में पढ़ाई के नाम पर मजाक हो रहा है। विद्यार्थियों का आर्थिक और मानसिक रूप से शोषण किया जा रहा है। हर विद्यार्थी से 40-40 हजार रुपए लिए गए हैं, जबकि वहां आधारभूत संरचना भी नहीं है। पत्र में कहा गया है कि चारों आईटीआई को एक ही व्यक्ति ने शुरू किया है। उनकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि गरीब छात्रों को न्याय मिल सके। पीएमओ ने शिकायत पर गौर करते हुए झारखंड के मुख्य सचिव को कार्रवाई का निर्देश दिया है।

डीईओ को जांच का जिम्मा

चार निजी आईटीआई के मामले में श्रम नियोजन एवं प्रशिक्षण विभाग के निदेशक ने धनबाद के डीसी को पत्र लिखकर एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। उनके निर्देश पर एसडीएम ने डीईओ डॉ माधुरी कुमारी को जांच करने का निर्देश दिया है। उनसे सभी बिंदुओं पर जांच कर जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है, ताकि जरूरी कार्रवाई की जा सके।

हर जांच के लिए तैयार

संस्थान में सभी तरह की सुविधाएं हैं। विद्यार्थियों की संख्या के अनुसार आधारभूत संरचना, शिक्षक भी हैं। पहले भी शिकायत की गई थी, लेकिन जांच में कोई गड़बड़ी नहीं निकली। बेवजह परेशान किया जा रहा है। हम हर जांच के लिए तैयार हैं।’’ - मनीष कुमार, प्राचार्य, कुमार प्राइवेट आईटीआई, दुहाटांड़

इन संस्थानों की शिकायत

कुमार प्राइवेट आईटीआई, दुहाटांड़, मनईटांड़, एसपी प्राइवेट आईटीआई, भूली बाईपास रोड, कौशल्या प्राइवेट आईटीआई, खरनीमोड़, कतरास और ग्लोबल प्राइवेट आईटीआई, बरमसिया।

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