बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से भूली स्थित बीसीसीएल के आवासों में वर्षों से रह रहे लोगों से आवास खाली कराने की दिशा में की जा रही कार्रवाई से वहां रह रहे परिवारों में आक्रोश व्याप्त है। वहां रह रहे लोगों का एक स्वर में कहना है कि किसी भी कीमत में आवास खाली नहीं करेंगे। पचास-साठ साल से भी अधिक समय से हमलोग यहां रह रहे है। ऐसे में हम कहां जाएं। बीसीसीएल बीच-बीच में कभी सर्वे और कभी नोटिस देकर यहां रह रहे लाखों लोगों को परेशान करने का काम करती है। कंपनी बेवजह लोगों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का काम कर रही है। वर्षों से रह रहे लोग शांति के साथ रहना चाहते हैं।। कंपनी नोटिस और सर्वे के नाम पर लोगों को उकसाने का काम कर रही है। हम सभी किसी भी कीमत में आवास खाली नहीं करेंगे। कंपनी आवास को लीज पर दे। या फिर आवास का भाड़ा तय करे। हम बिजली पानी के साथ आवास का किराया देने और लीज पर लेने को तैयार हैं। बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से भूली के आवासों का सर्वे कराने को लेकर वहां रह रहे लोगों के साथ डीबी स्टार ने बातचीत किया।
भूली में बीसीसीएल के आवासों में रह रहे लोगों ने कहा
लीज पर आवास दे बीसीसीएल
40 साल से भी अधिक समय से बी ब्लाक में रह रहे सुशील कुमार का कहना है कंपनी आवासों को लीज पर देने की व्यवस्था करे। बिजली, पानी का कनेक्शन काटना समस्या का समाधान नहीं है। कंपनी के राष्ट्रीयकरण होने के पहले से पिता नवल किशोर निचितपुर कोलियरी में काम करते थे। 2002 में रिटायर हुए। तब से उनका परिवार रह रहा है। आवास खाली करा पाना इतना आसान नहीं है। कंपनी को बीच का रास्ता निकालते हुए वहां रह रहे लोगो को आवास लीज पर दे देना चाहिए।
रह रहे लोगों को आवंटित करे आवास: सालों से रह रहे लोगों को बेघर करने का कंपनी का प्रयास कभी सफल नहीं होगा। ऐसा एक बार करके प्रबंधन ने देखा है। ऐसे में कंपनी को कोई रास्ता निकालना चाहिए। समस्या के समाधान के लिए कंपनी रह रहे लोगों के नाम लीज पर आवास दे। या फिर एक न्यूनतम भाड़ा तय कर दें।
जान दे देंगे पर आवास खाली नहीं करेंगे
भूली डी ब्लाक में रह रहे दिनेश यादव का कहना है कि भूली के आवासों में सालों से रह रहे लोगों से आवास खाली करने के लिए बीसीसीएल प्रबंधन रह रहकर शगुफा छोड़ता रहता है। कभी नोटिस भेजने और कभी सर्वे के नाम पर लोगों को डराने का काम किया जा रहा है। इसके पहले भी 27 अप्रैल 2011 को जबरन आवास खाली करने का प्रयास किया गया था। जिसका परिणाम सबके सामने है। कंपनी अपने प्रयास में सफल नहीं हो सकी। दिनेश के पिता श्री यादव नेशनलाइजेशन के पूर्व से कोलियरी में कार्यरत थे। 2002 में सेवानिवृत होने के बाद से उनका पूरा परिवार भूली के आवास में ही रह रहा है।
बीच का रास्ता निकाले बीसीसीएल
ए ब्लाक बाल्मिीकी नगर में रह रहे गंगा प्रसाद कहते है , आवास खाली करना समस्या का समाधान नहीं है। कंपनी जिसे बाहरी कह रही है, वास्तव में वो पूर्व बीसीसीएल कर्मी के ही परिवार है। आवास खाली करना कंपनी के लिए टेढ़ी खीर है। पिछले विधान सभा चुनाव के दौरान गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कोयला मंत्री के साथ वार्ता कर समस्या का समाधान करें की बात कही थी। विधायक राज सिन्हा के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल दिल्ली जाकर मंत्री से वार्ता भी किया था। उसके बाद आगे कुछ नहीं हुआ।