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अस्पताल में हाजिरी, आउटसोर्सिंग कंपनी से वेतन और नौकरी पीएमसीएच प्राचार्य की क्लीनिक में

3 वर्ष पहले
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जीतेंद्र कुमार/विक्की प्रसाद | धनबाद

आउटसोर्सिंग एजेंसी के रजिस्टर में स्टाफ कई, पर अस्पताल में खोजो तो मिलते नहीं...। हर दिन कम कर्मचारियों की मौजूदगी से मरीज व उनके परिजन परेशान...। एक बड़ा सवाल... आखिर आउटसोर्सिंग एजेंसी के कर्मचारी अस्पताल में रहते क्यों नहीं? हाजरी बन रही है... उनके नाम पर वेतन उठ रहा है, फिर उनकी सेवा क्यों नहीं मिल रही? भास्कर के दो रिपोर्टर और दो फोटोग्राफर की टीमों ने 48 घंटे तक इन सवालों का जवाब तलाशा। पीएमसीएच में एजेंसी के एक-एक कर्मचारियों को खोजा। इस खोजबीन के दौरान एजेंसी के 9 कर्मचारी अस्पताल के किसी भी विभाग में नहीं मिले। अब पूरी पड़ताल लापता इन्हीं 9 कर्मचारियों के आसपास केंद्रित हो गई। एक-एक कर्मचारियों के घरों का पता ढूंढा। घर पहुंचे तो मालूम चला कि वे ड्यूटी गए हैं। जब पीएमसीएच में उन्हें खोजा, तो पता चला वे यहां आए ही नहीं। घर से निकले, पर ड्यूटी स्थल (अस्पताल) नहीं पहुंचे, तो फिर गए कहां...? इसका जवाब पीएमसीएच प्राचार्य की निजी क्लीनिक में पहुंच कर हासिल हुआ...। ड्यूटी से लापता एजेंसी के सभी 9 कर्मचारी प्राचार्य डॉ. विश्वास के मां कल्याणी क्लीनिक में काम करते मिले। तीन सालों से ये कर्मचारी पीएमसीएच से वेतन उठाकर प्राचार्य की निजी क्लिनिक में सेवा दे रहे हैं।

एजेंसी के 9 कर्मचारियों की तलाश में जुटी भास्कर टी एक टीम पीएमसीएच पहुंची, तो दूसरी टीम प्राचार्य डॉ विश्वास की क्लीनिक के बाहर खड़ी हो गई। जिन 9 कर्मचारियों के पीएमसीएच आने का इंतजार था, वे एक-एक कर डॉ विश्वास की क्लिनिक में पहुंचते गए। भास्कर ने ड्यूटी के समय डॉ विश्वास की क्लिनिक में उनके काम करने का वीडियो तैयार किया।

भास्कर स्टिंग

डॉ विश्वास की क्लीनिक से... पूछने पर कर्मी बोले: 3 वर्षों से यहीं तो काम कर रहे हैं

दिन के 2 बजे है। भास्कर की टीम क्लीनिक पहुंच कर एजेंसी के कर्मियों की खोज शुरू की। नाम लेकर पुकारा... मो गुलाम मुस्तफा अंसारी, रजनी कुमारी, अजय कुमार महतो, मानिक चंद्र महतो, विपिन कुमार मंडल, सनोका सेन और शीला देवी यहां हैं क्या...? जवाब आना शुरू हुआ... मैं विपिन, मैं सनोका और मेरा नाम शीला है। पूछताछ में उन्होंने स्वीकार किया कि वे एजेंसी के कर्मचारी हैं। पर पिछले तीन सालों से यही ड्यूटी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मो. गुलाम मुस्तफा अंसारी, रजनी कुमारी, अजय कुमार महतो, मानिक चंद्र महतो दूसरी शिफ्ट में यहां ड्यूटी करने आएंगे। वहीं, पीएमसीएच का वार्ड अटेंडेंट मनोज कुमार शर्मा प्राचार्य के यहां चालक (ड्राइवर) का काम करता है।

एजेंसी जिन 9 कर्मियों को पीएमसीएच का स्टॉफ बता उठा रहा भुगतान वे प्राचार्य डॉ. विश्वास के मां कल्याणी क्लीनिक में काम करते मिले

प्राचार्य का भाई भी एजेंसी का स्टॉफ

एजेंसी के रजिस्टर ने कई खुलासे किए। प्राचार्य डॉ. विश्वास के छोटे भाई लालेश्वर विश्वास भी एजेंसी के स्टॉफ निकले। वे एडवांस बिजनेस कार्पोरेट के कर्मचारी हैं। सूची के अनुसार वे टेक्नीशियन के पद पर कार्य करते हैं। इन्हें रोज 384 रुपए के हिसाब से प्रति माह 26 दिन का वेतन (9984 रुपए) मिल रहा है। जबकि वे अपनी सेवा अपने भाई डॉ. विश्वास के क्लीनिक में दे रहे हैं।

...तो यह खेल है

कभी-कभी ही एजेंसी के कर्मचारी काम करने आते हैं : डॉ विश्वास

सीधी बात

दरअसल, निजी सेवा दे रहे एजेंसी के सभी कर्मचारी प्राचार्य डॉ विश्वास के अपने ही क्लीनिक के हैं। उन्होंने अपने कर्मियों का नाम आउटसोर्सिंग एजेंसी की लिस्ट में शामिल करा दिया, ताकि इससे उन्हें अपनी जेब से इन कर्मचारियों को वेतन नहीं देना पड़े।

पीएमसीएच में काम कर रहे आउटसोर्सिंग कर्मचारी आपके क्लीनिक में क्यों काम कर रहे हैं?

-नहीं, ऐसा नहीं है।

एजेंसी की लिस्ट में शामिल कर्मचारी आपके क्लीनिक में काम करते मिले हैं। क्या कहेंगे?

-ये लोग अस्पताल में काम करते हैं। पार्ट टाइम में कभी-कभार आ जाते हैं।

कर्मचारियों का उपयोग आप अपने निजी कार्य में कर रहे हैं?

-सौ फीसदी ऐसा नहीं है, कभी-कभार कर्मचारी क्लीनिक में आते हैं।

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