कक्षाएं हुईं ही नहीं, सिलेबस अधूरा, फिर भी ली जा रही है सेमेस्टर तीन की परीक्षा
धनबाद | धनबाद-बोकारो के विभिन्न कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने राज्यपाल को पत्र लिखकर बिना पढ़ाए सेमेस्टर तीन की परीक्षाएं लेने की शिकायत की है। उन्होंने पत्र में कहा है कि सेमेस्टर दो की परीक्षा के तुरंत बाद सेमेस्टर तीन की परीक्षा की घोषणा कर दी गई। विनोबा भावे विवि ने 14 मई से परीक्षाएं लेनी शुरू भी कर दी हैं, जबकि धनबाद और बोकारो के किसी कॉलेज में सेमेस्टर तीन की कक्षाएं नहीं के बराबर हुईं। जाहिर है कि सिलेबस पूरा नहीं हुआ। छात्र-छात्राओं ने पत्र में कहा है कि बिना पढ़ाई कराए परीक्षा लेने का यह पहला मामला नहीं है। विवि प्रशासन से जब से च्वाइस बेस्ट क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) लागू किया है, तब से ऐसा ही हो रहा है। शिकायत मिलने के बाद राजभवन ने जांच का आदेश दिया है। राजभवन के ओएसडी ने बीबीएमकेयू के कुलपति डॉ डीके सिंह को पत्र लिख कर रिपोर्ट मांगी है, ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।
टाॅर्चर बंद करे या एके 47 से उड़ा दे विवि प्रशासन
छात्रों ने पत्र में कहा है कि च्वाइस बेस्ट क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) सिस्टम लागू होने के बाद विवि प्रशासन उन्हें लगातार टॉर्चर कर रहा है। इससे बेहतर तो यह होता कि कुलपति और परीक्षा नियंत्रक उन्हें एके 47 से गोली मार देते। विवि प्रशासन की इस रवैए से स्टूडेंट में काफी रोष है।
स्टूडेंट की शिकायत, दिए जा रहे हैं औसत अंक
स्टूडेंट की शिकायत है कि परीक्षा विभाग बिना पढ़ाए परीक्षाएं तो ले ही रहा है, साथ ही रिजल्ट निकालने के चक्कर में उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन भी ठीक से नहीं करा रहा है। परीक्षार्थियों को अौसत अंक दे दिए जा रहे हैं।
बीबीएमकेयू ने प्राचार्यों से मांगी रिपोर्ट: राजभवन के निर्देश पर बीबीएमकेयू के रजिस्ट्रार ने धनबाद-बोकारो के सभी कॉलेज के प्राचार्यों को पत्र लिख कर स्नातक सेमेस्टर 3 की कक्षाओं के बारे में रिपोर्ट मांगी है।
जानिए क्या है पूरा मामला: विवि प्रशासन ने स्नातक में सत्र 2015-18 से सीबीसीएस सिस्टम को लागू कर दिया है। ऐसे में जून 2018 में इस सत्र का रिजल्ट जारी हो जाना चाहिए था, लेकिन अब तक सेमेस्टर 5 का रिजल्ट भी जारी नहीं हुआ है। यह स्थिति तब है, जब सेमेस्टर चार का रिजल्ट निकालने के तुरंत बाद सेमेस्टर पांच का परीक्षा फॉर्म भरवा दिया गया और परीक्षा भी ले ली गई। सत्र 2016-19 के स्टूडेंट के साथ भी यही हो रहा है। उनके लिए न तो कॉलेजों में कक्षाएं हो रही हैं और न ही उन्हें खुद से पढ़ने का समय दिया जा रहा है।