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पीएमसीएच में बच्ची की मौत पर हंगामा, लापरवाही का आरोप

3 वर्ष पहले
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पीएमसीएच की इमरजेंसी आईसीयू में शनिवार को 14 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। इसके बाद परिजनों ने अस्पताल के इमरजेंसी में जमकर हंगामा किया। परिजनों का कहना था कि बच्ची की आंत में छेद होने की वजह से आॅपरेशन के लिए 9 अप्रैल को अस्पताल में भर्ती कराया गया था। लेकिन, छह दिनों में बच्ची का आॅपरेशन नहीं किया गया और आखिरकार तड़पते हुए उसकी मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर पर लापरवाही का आरोप लगाया। बताया कि पेट में दर्द होने पर निचितपुर स्थित डॉ उमा शंकर के क्लीनिक में भर्ती कराया गया। जांच के बाद आंत में छेद बताकर बेहतर इलाज के लिए पीएमसीएच रेफर कर दिया गया। सोमवार को परिजनों ने बच्ची को पीएमसीएच के इमरजेंसी में भर्ती कराया। बुधवार तक दवाएं दी गईं। फिर से जांच के बाद डॉ वर्णवाल ने माना कि आंत में छेद है। 13 अप्रैल को आॅपरेशन तय किया, पर ओटी ले जाकर लौटा दिया गया।

बच्ची की मौत के बाद पीएमसीएच में हंगामा।

वेंटिलेटर पर चलती रहीं सांसें
परिजनों ने कहा कि बच्ची की मौत दोपहर 2 बजे ही हो गई थी, पर डॉक्टर नहीं थे। हंगामे पर 3:25 बजे बच्ची को मृत घोषित किया गया। उसके बाद भी दो घंटे तक वेंटिलेटर पर रखकर सांसें दी गईं। बच्ची के बहनोई ने बताया कि उमा शंकर अस्पताल में ऑपरेशन पर 22 हजार रुपया खर्च बताया गया था। पीएमसीएच में मुफ्त इलाज होगा यह जानकर लाए थे, लेकिन यहां 10 हजार खर्च हो गए और बच्ची भी नहीं बची।

शव ले जाने को नहीं था पैसा
बच्ची की मौत व हंगामा के बाद शव ले जाने में भी पीड़ित परिवार असमर्थ था। परिजन अस्पताल में मौजूद लोगों से गाड़ी करने की मिन्नत करते रहे। सूचना मिलने पर डॉ आशुतोष ने सहयोग किया और अस्पताल का एंबुलेंस मुहैया कराया गया।

टायफायड के कारण बच्ची की आंत फट गई थी। उसकी स्थिति ऑपरेशन के लायक नहीं थी। स्थिति में सुधार का काफी प्रयास किया गया। लापरवाही का आरोप गलत है। मैंने नियमित रूप से बच्ची की निगरानी की।’’ - डॉ एके वर्णवाल, एचओडी (सर्जरी) पीएमसीएच

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