किसी ने नहीं दिया आवेदन, पूछा-बकाए का भुगतान कौन करेगा, क्या होगी शर्तें
झमाडाकर्मियों ने नगर निकायों में समायोजन के प्रस्ताव काे ठुकरा दिया है। किसी भी कर्मी ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और किसी निकाय में जाने की इच्छा जतानेवाला आवेदन फॉर्म नहीं भरा। इसके बजाय कर्मियों ने पत्र लिखकर प्रबंधन से कहा है कि पहले वह स्पष्ट करे कि समायोजन की सेवा शर्तें क्या होंगी। साथ ही पूछा कि उनके तीन साल के बकाया वेतन का भुगतान कौन करेगा। झमाडा में अब तक सातवां वेतनमान लागू नहीं किया गया है, तो उसकी देनदारी किसकी होगी। उन्होंने कहा कि ये सारी बातें स्पष्ट होने के बाद ही कर्मी समायोजन या वीआरएस के प्रस्ताव पर विचार करेंगे।
विभिन्न यूनियनों ने अलग फाॅरमेट में दिया आवेदन
कर्मचारियों ने प्रबंधन की ओर से निकाले गए फॉर्म के बजाय अपनी ओर से बनाए गए फॉरमेट व आवेदन बनाकर प्रबंधन के यहां जमा किया है। खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार स्वास्थ्य, सफाई व जलापूर्ति कामगार यूनियन और सहायकों ने अलग फॉरमेट में आवेदन दिया है। झमाडा सहायक संवर्ग के नेता अशोक शुक्ला एवं कामगार यूनियन के नेता असलम खान का कहना है कि प्रबंधन की ओर से जो कार्यालय आदेश निकाला गया है, उसमें स्पष्ट नहीं है कि कर्मचारियों के समायोजन के बाद सेवा शर्त क्या होंगी, कर्मचारियों के बकाया वेतन का भुगतान पहले सुनिश्चित हो, झामाडा में अबतक सातवां वेतनमान लागू नहीं है, पहले यह वेतनमान लागू किया जाए। उन्होंने बताया कि माडा अधिनियम 1986 के प्रावधान 31 में स्पष्ट है कि माडा के विलय के बाद कर्मचारियों का समायोजन राज्य सरकार में होना है न कि नगर निकायों में। तब किस आधार पर सरकार निकाय में समायोजन की नीति बना रही है। अगर कर्मचारियों का समायोजन ही करना है तब राज्य सरकार के विभागों में किया जाए। कर्मचारी किसी भी स्थिति में कर्मचारी नगर निकाय में समायोजन को नहीं मानेंगे।