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सरकारी स्कूलों को मिलेगा पहले से पांच गुना ज्यादा डेवलपमेंट फंड

3 वर्ष पहले
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सरकारी स्कूलों के विकास के लिए उन्हें अब पहले से पांच गुना अघिक राशि दी जाएगी। सत्र 2018-19 के लिए समग्र शिक्षा अभियान के लिए तैयार किए जा रहे बजट में ऐसा ही प्रस्ताव है। पहले कक्षा के आधार पर स्कूलों को ग्रांट मिलता था। पांचवीं कक्षा तक के स्कूल को हर साल पांच हजार और पहली से आठवीं कक्षा तक वाले स्कूलों को 12 हजार रुपए दिए जाते थे। अब छात्र संख्या के आधार पर कंपोजिट स्कूल ग्रांट मिलेगा। 100 या कम छात्र संख्या पर स्कूल को 25 हजार, 101-250 तक छात्र संख्या पर 50 हजार, 250-1000 छात्र संख्या पर 75 हजार और एक हजार से अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों को एक लाख रुपए हर साल दिए जाएंगे। इसमें से 10 प्रतिशत राशि शौचालयों की सफाई पर खर्च होगी। बाकी फंड खेल सामग्री, प्रयोगशाला सामग्री, बिजली का बिल, इंटरनेट, पानी, टीचिंग सामग्री आदि पर खर्च किया जा सकेगा। फिलहाल ये प्रस्ताव हैं, बजट को मंजूरी मिलने पर सारी बातें स्पष्ट हो जाएंगी।

पुस्तकालय के लिए अलग से दी जाएगी राशि

हर स्कूल को अब पुस्तकालय के विकास के लिए अलग से राशि दी जाएगी। पहली से पांचवीं कक्षा तक के स्कूल को 5 हजार, छठी से आठवीं कक्षा तक वाले स्कूलों को 10 हजार, पहली से आठवीं कक्षा तक को 13 हजार, 9-10वीं कक्षा को 10 हजार, 6-12वीं कक्षा को 15 हजार, 1-10वीं कक्षा तक को 15 हजार और 1-12वीं कक्षा तक के स्कूल को प्रतिवर्ष 20 हजार रुपए देने का प्रस्ताव है।

आने-जाने को मिलेगी राशि :

बजट के प्रस्ताव पर गौर करें तो दूर-दराज से स्कूल आने वाले बच्चों को आने-जाने के लिए राशि मिलेगी। पहली से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को प्रतिवर्ष छह हजार रुपये अधिकतम मिलेंगे। दूरी के अनुसार राशि कम भी दिए जा सकते हैं। यह राशि डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से सीधे छात्र के बैंक खाते में दी जाएगी। यूनिफॉर्म के लिए अब 400 की जगह 600 रुपये मिलेंगे।

दिव्यांग छात्राओं को छात्रवृत्ति : दिव्यांग बच्चों के लिए पहले तीन हजार रुपये प्रतिवर्ष राशि मिलती थी, जिसे अब बढ़ा कर 3500 रुपये प्रतिवर्ष करने का प्रस्ताव है। दिव्यांग छात्राओं को 200 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड साल में दस महीने के लिए मिलेंगे। डायट के सुदृढ़ीकरण के लिए 20 लाख रुपये का प्रस्ताव है, जो बजट में भी पास हुआ तो गोविंदपुर स्थित डायट में प्रशिक्षण के लिए प्रशिक्षुओं को बेहतर सुविधाएं मिल पाएंगी।

हर प्रखंड में बीआईटीई : जिले के सभी प्रखंडों में बीआईटीई (ब्लॉक इंस्टीट्यूट फॉर ट्रेनिंग एंड एजुकेशन) की स्थापना की जाएगी। इसके लिए हर प्रखंड को पांच लाख रुपये मिलेंगे। यहां शिक्षकों के प्रशिक्षण और बच्चों के सर्वांगिण विकास पर फोकस किया जाएगा। इसके अलावा जिले में एक स्कूल में पहली-12वीं कक्षा की पढ़ाई होगी। संभवत: बाबूडीह स्थित जिला स्कूल में यह शुरुआत हो सकती है।

स्ट्रीम में भी छात्र संख्या पर राशि : इंटरमीडिएट की पढ़ाई के लिए भी छात्र संख्या के आधार पर राशि उपलब्ध कराई जाएगी। एक स्ट्रीम में 150 बच्चे होंगे तो उस स्ट्रीम के लिए सरकार से 40 लाख रुपये मिलेंगे। दूसरे स्ट्रीम में भी 150 बच्चे होंगे तो अतिरिक्त 15 लाख और तीसरे स्ट्रीम में भी न्यूनतम 150 बच्चे होंगे तो 15 लाख रुपये अतिरिक्त मिलेंगे। इस तरह दो स्ट्रीम में 150-150 बच्चे होंगे तो 55 लाख और तीनों स्ट्रीम में 150-150 बच्चे होंगे तो कुल 70 लाख रुपये मिलेंगे। इस तरह इंटरमीडिएट की पढ़ाई का बजट में खास ख्याल रखे जाने की बात है।

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