जिले के हाई स्कूलों और प्लस टू स्कूलों की करीब 18,500 छात्राओं को राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत नि:शुल्क पाठ्य-पुस्तकें दी जानी हैं, लेकिन राज्य में पिछले दो साल से एनसीईआरटी की किताबों की छपाई ही नहीं हुई है। ऐसे में बाजार में उपलब्ध एनसीईआरटी की किताबों को नकली मानते हुए उनकी खरीद पर रोक लगा दी गई है। अब स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव अमरेंद्र प्रताप सिंह ने राज्य के सभी डीईओ को पत्र लिख कर छात्राओं को नि:शुल्क किताबें उपलब्ध कराने के लिए दो विकल्प दिए हैं - या तो एनसीईआरटी से किताबों की ऑनलाइन खरीदारी करें या फिर किताबाें के लिए तय राशि छात्राओं के बैंक खाते में जमा करा दें। सचिव के निर्देश पर डीईओ डॉ माधुरी कुमारी ने जिले के सभी हाई स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के साथ बैठक कर उन्हें दोनों विकल्प बता दिए हैं, ताकि छात्राओं को असली किताबें मिल सकें।
स्कूलों को बिना डिलीवरी चार्ज के किताबें भेजने को तैयार है एनसीईआरटी
शिक्षा सचिव अमरेंद्र ने पिछले दिनों एनसीईआरटी को पत्र लिख कर किताबों की उपलब्धता के बारे में जानकारी मांगी थी। जवाब में उन्हें बताया गया कि इस सत्र में उसने 6 करोड़ सेट किताबें छापी हैं। साथ ही देश के कई हिस्सों में उनके ऑथोराइज्ड वेंडरों ने भी किताबें छापी हैं। इसके बाद भी किताबें कम पड़ रही हैं, तो स्कूल या विद्यार्थी एनसीईआरटी के पोर्टल पर ऑनलाइन ऑर्डर कर सकते हैं। बिना डिलीवरी चार्ज के किताबें बताए गए पते पर पहुंचा दी जाएंगी। इस बारे में एनसीईआरटी के टोल फ्री नंबर 1800112199 या 1800111265 पर कॉल कर जानकारी हासिल की जा सकती है।
मॉडल स्कूल की छात्राओं को दी जानी हैं इंग्लिश मीडियम की किताबें
सचिव ने अपने निर्देश में यह भी कहा है कि राज्य के सभी 80 मॉडल स्कूलों में छात्राओं को अंग्रेजी माध्यम की किताबें उपलब्ध कराई जानी हैं। इसके लिए भी एनसीईआरटी को ऑनलाइन ऑर्डर किया जा सकता है।