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यूनियन क्लब में 5 मई को चुनाव

3 वर्ष पहले
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धनबाद | जब चुनाव है तो राजनीति जरूर होगी...। जहां राजनीति होगी, वहां आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चलेगा...। यूनियन क्लब में 5 मई 2018 को चुनाव है और क्लब अभी चुनाव और राजनीति के इन रंगों में रंग चुका है। इसकी शुरुआत 8 अप्रैल 2018 को हुई। कमेटी ने चुनाव की घोषणा करते हुए क्लब के सदस्य अजय राय को बर्खास्त कर दिया। अजय की बर्खास्तगी के बाद क्लब की राजनीति परवान चढ़ गई। क्लब के कुछ सदस्यों ने क्लब के उपाध्यक्ष बिनोद कुमार सिन्हा की सदस्यता को फर्जी बताते हुए वर्तमान कमेटी पर सवाल उठा दिया। बिनोद कुमार सिन्हा की साल 2001 की सदस्यता को अवैध करार देते हुए उन्हें भी बर्खास्त करने की मांग तेज कर दी। अब इसे लेकर क्लब के सदस्य दो फाड़ में दिख रहे हैं। अजय राय का समर्थक और कमेटी के सदस्य आमने-सामने हैं। पेश है, इस विवाद पर यह रिपोर्ट।

बिनोद की सदस्यता फर्जी, सचिव के खास हैं, इसलिए नहीं हटाया: अजय

यू नियन क्लब की सदस्यता से हटाए गए अजय राय अपनी बर्खास्तगी को गलत बताते हैं। अजय राय का कहना है कि मुझे सिर्फ इसलिए कमेटी ने बर्खास्त कर दिया, क्योंकि मैंने कोर्ट में गवाही दी थी। क्या किसी भी संस्था का बाइलॉज देश के कोर्ट से ऊपर है? मैंने गवाही दी थी, कोई गुनाह नहीं किया था। गवाही देना क्लब के अनुशासन के खिलाफ कैसे हो गया। उन्होंने कहा कि मैं सचिव पद का प्रबल दावेदार था। चुनाव न लड़ सकूं, इसलिए मुझे बर्खास्त कर दिया गया। वहीं, कमेटी के उपाध्यक्ष बिनोद कुमार सिन्हा पर कोई कार्रवाई नहीं होती, जबकि उनकी सदस्यता ही फर्जी है। उन्होंने साल 2001 में स्वयं को बीसीसीएल से जुड़ा बता कर क्लब को गुमराह किया था। पिछले कमेटी की जांच में उनकी सदस्यता फर्जी पायी गई थी। उस समय की कमेटी ने कार्रवाई का पत्र जारी किया था, जिसे वर्तमान कमेटी ने दबा दिया। अजय राय ने कहा कि बिनोद कुमार सिन्हा सचिव के प्यारे हैं, इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती। हस्ताक्षर अभियान चलाकर सच्चाई सामने लाने का प्रयास कर रहा हूं।

अजय राय की बर्खास्तगी के बाद क्लब की राजनीति परवान चढ़ी

विनोद सिन्हा का वर्ष 2001 का सदस्यता फॉर्म जिस पर ‌Rs.1000 देकर सदस्य बनाने की बात कही गई है।

कुछ असामाजिक तत्व थे, कार्रवाई हुई तो गुस्सा निकाल रहे हैं : बिनोद

यू नियन क्लब की वर्तमान कमेटी के उपाध्यक्ष बिनोद कुमार सिन्हा अपने ऊपर लग रहे आरोपों को गलत बिनोद कहते हैं कि 17 सालों में 10 कमेटियों में रहा। तब तो किसी ने विरोध नहीं किया। फिर आज मेरी सदस्यता को लेकर सवाल क्यों उठाया जा रहा है। यह चंद लोग है, जो यह काम कर रहे हैं। उनका कोई वजूद नहीं है। मेरी सदस्या वैध है। मैंने कोई गलत नहीं किया। गलत किया तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उन्होंने कहा कि कुछ असामाजिक तत्व थे, माहौल खराब कर रहे थे। उनके खिलाफ कार्रवाई हुई है। बस इसलिए अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। बिनोद ने स्वयं की सदस्यता पर उठ रहे सवालों के पीछे क्लब सदस्य सम्राट चौधरी की भूमिका बतायी है। उन्होंने कहा है कि सम्राट के भाई के खिलाफ कार्रवाई की पहल हुई थी। बस इसलिए वे एक माहौल बना रहे हैं। मेरी सदस्यता सही थी। मैंने पूरा पैसा देकर सदस्यता लिया था। न मेरी गलती है और न ही कमेटी की गलती है।

मेरा इससे कोई लेना-देना नहीं है : सम्राट चौधरी

क्लब के सदस्य सम्राट चौधरी ने कहा है कि बिनोद सिन्हा मामले को तूल देने में उनका कोई हाथ नहीं है। उनके भाई ने क्या किया था... मुझे इसकी जानकारी भी नहीं है। बिनोद की सदस्यता से जुड़े कागजात मैंने निकाला क्या...? बेतुकी बातें हैं। इस तरह की हरकत मैं नहीं करता।

सचिव बोले : बर्खास्तगी सही, जो उचित था किया

यूनियन क्लब के सचिव अमितेश सहाय ने कहा कि साल 2013 के एक कार्यक्रम में सदस्य विनीत ने व्यवधान डाला था। अनुशासन कमेटी ने मामले की जांच की और उन्हें दोषी पाया। इसी आधार पर उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था। सदस्य अजय राय ने कोर्ट में एक शपथ पत्र देकर कमेटी के निर्णय पर सवाल उठाया। कमेटभ् के पदाधिकारी ने इसे अनुशासनहीनता मानते हुए उनसे जवाब मांगा। अजय राय ने जवाब मांगने वाले पदाधिकारी को ही कानूनी कार्रवाई की धमकी दी। मामले की जांच के लिए अनुशासन कमेटी बनाई गई। अनुशासन कमेटी के निर्णय के अनुसार अजय को हटाया गया। बिनोद सिन्हा के मामले को बेवजह तूल दिया जा रहा है। इसके पीछे सदस्य सम्राट चौधरी का हाथ है। उनके भाई के गलत व्यवहार के खिलाफ कमेटी ने नोटिस भेजा था, इसलिए वे इस तरह का मुद्दा उठाकर बदला ले रहे हैं।

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