मरीज के बेड के पास एचआईवी और हेपेटाइटिस किसने लिखा...? किसने लिखवाया...? भास्कर में इससे संबंधित खबर छापने के बाद सोमवार को इस सवाल पर पीएमसीएच के स्त्री एवं प्रसव रोग विभाग में हंगामा मच गया। अधिकारी और कर्मचारी आपस में उलझ गए। आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला। मरीज के बेड के पास एचआईवी और हेपेटाइटिस लिखने और लिखवाने वालों की पहचान की कोशिश की गई। हर किसी ने एक-दूसरे के सिर पर इसका ठीकरा फोड़ा। हंगामा बढ़ता देख कर प्रबंधन न तत्काल लिखे गए एचआईवी और हेपेटाइटिस को मिटाने का निर्देश दिया। प्रबंधन के निर्देश पर पांच मिनट में दोनों ही रोग का नाम (जिसे मरीज की पहचान के लिए लिखा गया था) मिटा दिया गया।
अब वार्ड के बाहर इन्फेक्शियस डिजीज लिखवाया गया है। प्रबंधन ने विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिभा राय को पत्र के माध्यम से भविष्य में इस तरह की पुनरावृत्ति नहीं होने की हिदायत दी है। भास्कर में खबर छपने की सूचना पर नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (नाको) के संयुक्त निदेशक डॉ मतीन अहमद खान भी पीएमसीएच पहुंचे। उन्होंने अधीक्षक और गायनी विभाग की डॉक्टरों को खूब फटकार लगाई।
भास्कर इंपैक्ट
विरोध के बाद बेड के उपर लिखा ‘एचआईवी’ हटाया गया। तस्वीर सोमवार की।
क्लर्क से सिस्टर तक हुई पूछताछ
वार्ड में बीमारी का नाम लिखवाने को लेकर अस्पताल में ड्रामेबाजी भी हुई। वार्ड में मरीज के बेड के ऊपर एचआईवी का बोर्ड किसने लिखवाया...? पीएमसीएच अधीक्षक के इस सवाल पर स्त्री एवं प्रसव रोग विभाग के कर्मचारी फेंका-फेंकी करते रहे। क्लर्क ने बताया वह छुट्टी पर था। इसके बाद अधीक्षक ने सिस्टर इंचार्ज को बुलवाया। सिस्टर इंचार्ज पहुंची तो बताया कि नियमित सिस्टर इंचार्ज अवकाश पर है, वह तो सिर्फ प्रतिनियुक्ति पर हैं। इसलिए नहीं बता सकती।