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एग्रीमेंट करते हैं Rs.714 का और भुगतान करते हैं रोज Rs.349

3 वर्ष पहले
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एग्रीमेंट करते हैं... 714 रुपए रोज भुगतान का। देते हैं... 349 रुपए रोज। पीएमसीएच में आउटसोर्सिंग कंपनी के कर्मचारियों को शर्त के मुताबिक वेतन भुगतान नहीं हो रहा। आउटसोर्सिंग कंपनी अपने ही कर्मचारियों की हकमारी कर रही है। पिछले तीन सालों से यहां पगार घोटाला को अंजाम देकर कंपनी के लोग अपनी जेब भर रहे हैं। यही नहीं, कर्मियों की संख्या में भी गड़बड़झाला कर एजेंसी लाखों का वारा-न्यारा कर रही है। भास्कर ने जब पीएमसीएच में सेवा दे रही आउटसोर्सिंग कंपनी एडवांस बिजनेस कार्पोरेट लिमिटेड व श्री राम इंटरप्राइजेज की पड़ताल की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पता चला कि दोनों ही आउटसोर्सिंग कंपनियों के पास पीएमसीएच में काम करने का कोई लिखित आदेश नहीं है। दोनों ही कंपनी मौखिक आदेश पर ही पिछले तीन सालों से यहां मैनपावर सप्लाई कर रही हैं। तमाम अनियमितताएं चीख-चीख कर अपनी मौजूदगी बता रही है। बावजूद इसके प्रबंधन खामोश है।

तीन सालों से एजेंसी कर रही अपने कर्मियों की हकमारी, कागज पर अधिक कर्मचारियों की नियुक्ति दिखा कर उठा रहे पैसे

मई 2015 में एडवांस बिजनेस कार्पोरेट के साथ हुआ एग्रीमेंट।

जीएनएम को एजेंसी द्वारा किया गया भुगतान का ब्यौरा।

जानिए, कैसे हो रहा है वेतन घोटाला

पहला एग्रीमेंट

मई 2015 में पीएमसीएच प्रबंधन व एजेंसियों के बीच एग्रीमेंट हुआ। सबसे अधिक नर्सों की नियुक्ति मांगी गई। एक नर्स को 552.97 रुपए प्रतिदिन का वेतन अनुमोदित किया गया। नर्सों का वेतन 14377.22 रुपए मिलना चाहिए था। पर उपलब्ध दस्तावेज बताते हैं कि यहां एजेंसी ने नर्स को प्रति दिन 384 रुपए के हिसाब से 9984 रुपए वेतन दिया। जबकि नर्स के बैंक खाते में मात्र 9074 रुपए ही पहुंचा।

दूसरा एग्रीमेंट

अप्रैल 2016 में नया एग्रीमेंट हुआ। एग्रीमेंट के अनुसार पीएमसीएच प्रबंधन एजेंसी को प्रति नर्स 714 रुपए का भुगतान करने की बात कही। इसके अनुसार एक नर्स का एक माह का वेतन 18824 रुपए मिलना चाहिए था। पर नर्सोंं को सिर्फ 349 रु के हिसाब से 9074 रुपए ही मिल रहे हैं। मतलब यहां हर नर्स के वेतन से 9750 रुपए कटौती की गई।

घोटाले का गणित : लाखों रुपए एजेंसी की जेब में

पहला एग्रीमेंट के अनुसार प्रत्येक नर्स को शर्त से 5303 रुपए कम मिला। कुल यहां 172 नर्सो बहाल हुई। इस हिसाब से नर्सों का हक मार कर एजेंसी ने करीब 9.12 लाख रुपए प्रत्येक माह अपने नाम किए। दूसरे एग्रीमेंट के अनुसार प्रत्येक नर्स को 9750 रुपए कम पगार दिया। इस हिसाब से 172 नर्सों का पगार रखकर कंपनी 16.77 लाख रुपए हर माह अपनी जेब में डाली।

बगैर टेंडर के हो रहा काम

एजेंसी तीन सालों से बगैर टेंडर के कार्य कर रही हैं। एमसीआई के निर्देश के बाद प्रधान सचिव ने एमजीएम मेडिकल कॉलेज में 2014-15 में स्वीकृत दर पर स्वीकृत एजेंसी से मानव संसाधन की आपूर्ति का मौखिक आदेश दिया था। इसे ही आधार मान कर दोनों एजेंसी काम कर रही हैं।

टेक्नीशियन भी शिकार

पीएमसीएच में 145 टेक्नीशियन कार्य कर रहे हैं। एग्रीमेंट के अनुसार इनका रोज का वेतन भी 552 रुपए निर्धारित है, कंपनी के अनुसार दिया जा रहा है 384 रुपए, लेकिन कर्मियों को मिल रहा है मात्र 331 रुपए रोज। लगभग 8.5 लाख रुपए हर माह इनके पगार से भी काटी जा रही है।

बड़ा सवाल : बगैर उपस्थिति विवरणी के वेतन भुगतान कैसे?

कर्मियों को उपस्थिति विवरणी के आधार पर वेतन का भुगतान किए जाने का प्रावधान है, लेकिन पीएमसीएच में विभागाध्यक्षों की ओर से बगैर विवरणी लिए वेतन का भुगतान किया जा रहा है। नियमित कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक अटेंडेंस अनिवार्य है, लेकिन आउटसोर्स कर्मचारियों द्वारा रजिस्टर में हाजिरी बनाया जाना संदेह उत्पन्न करता है।

सीधी बात

सूची मांगते हैं, एजेंसी देती ही नहीं, मैं क्या करू

आउटसोर्स कर्मी प्राचार्य के निजी क्लीनिक में काम कर रहे हैं।

जवाब : आउटसोर्स कर्मियों की सूची नहीं है। मांगते है, पर कोई देता ही नहीं है।

कर्मचारियों के वेतन में भी गड़बड़ी है?

जवाब : आपकी जानकारी सही है। सरकार तक शिकायत पहुंचायी है। कभी मुझे साक्ष्य तक पहुंचने ही नहीं दिया गया।

नए सिरे से टेंडर क्यों नहीं ?

जवाब : मैंने टेंडर की प्रक्रिया शुरू की थी, मेरा ट्रांसफर हो रहा है, आगे का पता नहीं क्या होगा।

डॉ. सिद्धार्थ सान्याल, अधीक्षक

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